महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा अधिक! जरूरी नहीं हर बार साने में दर्द हो, जानें दिल की सेहत से जुड़ी 5 अहम बातें

Last Updated:

Health Tips: महिलाओं में हृदय रोग का खतरा पुरुषों से भिन्न और अधिक साइलेंट होता है. जरूरी नहीं कि उन्हें हमेशा सीने में तेज दर्द महसूस हो. शोध बताते हैं कि महिलाओं को दिल की सेहत के प्रति अधिक जागरूक रहना चाहिए, क्योंकि उनके लक्षण अक्सर सामान्य थकान या बेचैनी जैसे दिख सकते हैं.

अक्सर दिल की बीमारी को पुरुषों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन सच यह है कि महिलाओं में हार्ट डिज़ीज़ का खतरा अलग तरह से और कई बार ज्यादा चुपचाप बढ़ता है. यही कारण है कि महिलाओं के लिए दिल की सेहत को समझना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं वे पांच अहम बातें जो हर महिला को पता होनी चाहिए.

दिल

महिलाओं में दिल की बीमारी के कारण केवल हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल तक सीमित नहीं हैं. PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम), गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएँ, ऑटोइम्यून बीमारियाँ और समय से पहले मेनोपॉज़ जैसे कारक भी हृदय रोग का खतरा बढ़ाते हैं. हार्मोनल बदलाव शरीर के मेटाबॉलिज्म और धमनियों की सेहत पर गहरा असर डालते हैं.

हेल्थ

एस्ट्रोजन हार्मोन महिलाओं के दिल को सुरक्षा देता है. मेनोपॉज़ के बाद इसका स्तर घट जाता है, जिससे ब्लड वेसल्स सख्त होने लगती हैं और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है. यही वजह है कि 50 साल के बाद महिलाओं में हार्ट अटैक का जोखिम अचानक बढ़ जाता है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

हेक्टेग

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर अलग होते हैं. सीने में तेज दर्द की बजाय थकान, सांस फूलना, उलझन, जी मिचलाना, पीठ या जबड़े में दर्द जैसे संकेत मिल सकते हैं. यही कारण है कि कई बार महिलाएँ लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं.

हित

पुरुषों में आमतौर पर बड़ी धमनियों में ब्लॉकेज दिखता है, जबकि महिलाओं में छोटी रक्त नलिकाओं की बीमारी (माइक्रोवैस्कुलर डिज़ीज़) ज्यादा देखी जाती है. ऐसे में एंजियोग्राफी सामान्य आने के बाद भी समस्या बनी रह सकती है. इसलिए लक्षणों को गंभीरता से लेना जरूरी है.

heart

अगर पारंपरिक टेस्ट में समस्या साफ न दिखे तो MRI, PET स्कैन जैसी आधुनिक जांचें दिल की मांसपेशियों और ब्लड फ्लो की गहराई से जानकारी दे सकती हैं. ये तकनीकें खासकर महिलाओं में छुपी हुई हार्ट डिज़ीज़ पकड़ने में मददगार हैं.

हेक्टेग

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संतोष गुप्ता बताते हैं कि महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए. नियमित जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और तनाव नियंत्रण दिल को स्वस्थ रखने की कुंजी हैं. वे सलाह देते हैं कि अगर असामान्य थकान या सांस लेने में दिक्कत लंबे समय तक रहे तो तुरंत हृदय विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि सही समय पर पहचान ही जीवन बचा सकते है.

homelifestyle

महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा अधिक! जरूरी नहीं हर बार साने में दर्द हो

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *