गुल्लक से निकली सेवा की ताकत, सतना में 150 लोग बने जरूरतमंदों का सहारा

सतना. मध्य प्रदेश के सतना में जब सेवा को किसी पहचान, प्रचार या लाभ से नहीं जोड़ा जाए, तब उसका रूप कैसा होता है, इसका जीवंत उदाहरण पिछले 25 वर्षों से लगातार देखने को मिल रहा है. शहर के कुछ संवेदनशील नागरिक, जिनमें रिटायर्ड अधिकारी, डॉक्टर और सामान्य कर्मचारी मिलकर समाज के उन वर्गों के लिए काम कर रहे हैं, जो अक्सर व्यवस्था की प्राथमिकता से बाहर रह जाते हैं. अस्पताल के बाहर भूखे परिजन हों, रेलवे स्टेशन पर प्यास से जूझते यात्री हों या फिर शिक्षा से वंचित ग्रामीण बच्चे, इन सभी के लिए यह समूह चुपचाप लेकिन पूरे समर्पण के साथ सेवा में लगा हुआ है.

लोकल 18 से बातचीत में उद्योग विभाग से वॉलंटियर रिटायरमेंट लेने वाले ओंकार तिवारी बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उन्होंने स्वयं को पूरी तरह सेवा के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया. वह श्री सत्य साईं सेवा संगठन से पिछले 25 वर्षों से जुड़े हुए हैं. यह संगठन सतना जिले में चार से पांच प्रमुख सेवाओं का संचालन करता है, जिनमें गर्मियों में प्याऊ सेवा, नवरात्रि के दौरान मैहर देवी धाम में सेवा और 15 अप्रैल से 15 जून तक रेलवे स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को निशुल्क पानी उपलब्ध कराना प्रमुख है. ओंकार तिवारी बताते हैं कि जिले में ऐसी कुल 8 समितियां सक्रिय हैं, जो अलग-अलग माध्यमों से सेवा कार्यों को आगे बढ़ा रही हैं. संगठन की प्रमुख सेवा नारायण सेवा है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद को भोजन उपलब्ध कराना है. उन्होंने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि शास्त्रों में दान को सर्वोच्च बताया गया है. स्वर्ण दान, गौ दान, अन्नदान और कन्यादान सबसे महत्वपूर्ण है. इसी सोच से प्रेरित होकर संगठन ने अन्नदान को नियमित रूप देने का निर्णय लिया.

अस्पताल में भोजन सेवा
उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में सभी सेवादार अपने-अपने घरों से हर महीने चार दिन भोजन बनाकर लाते थे और शहर के अलग-अलग हिस्सों में वितरित करते थे. बाद में विचार आया कि इस सेवा को जिला अस्पताल से जोड़ा जाए, जहां मरीजों के परिजन सबसे अधिक कठिनाई में रहते हैं. इसी सोच के तहत 20 अक्टूबर 2024 से जिला अस्पताल में प्रतिदिन सुबह 9 बजे सेवा प्रारंभ की गई. तीन ओंकार के उच्चारण के बाद भोजन वितरण होता है, जहां महिलाएं और पुरुष खुद ही अलग-अलग पंक्तियों में लग जाते हैं.

प्रतिदिन 3000 रुपये का खर्च
उन्होंने कहा कि प्रतिदिन करीब 120 पैकेट अस्पताल परिसर में वितरित किए जाते हैं जबकि 20 पैकेट शहर में चिह्नित असहाय परिवारों तक पहुंचाए जाते हैं. एक भोजन पैकेट में 6 पूरी, सब्जी, केला और बिस्किट शामिल होता है. इस सेवा पर प्रतिदिन लगभग 3000 रुपये का खर्च आता है, जो सभी सदस्य अपनी बचत से गुल्लक में जमा करते हैं.

संगठन ने गोद लिए 10 गांव
उन्होंने आगे कहा कि भोजन सेवा के साथ-साथ संगठन ने लगभग 10 गांव गोद लिए हैं, जहां गरीब बच्चों को नैतिक, सामाजिक और राष्ट्र शिक्षा दी जाती है. हर महीने एक दिन बाल विकास की कक्षाएं आयोजित होती हैं, जिन्हें महिला शिक्षिकाएं संचालित करती हैं. इसके अलावा स्वच्छता अभियान, वर्षा ऋतु में वृक्षारोपण जैसे कार्य भी नियमित रूप से किए जाते हैं.

सतना में संगठन के 150 सदस्य
वर्तमान में सतना में संगठन के लगभग 150 सदस्य हैं, जो अपने जन्मदिन और पारिवारिक आयोजनों का खर्च भी सेवा कार्यों में लगाते हैं. भविष्य की योजना के तहत संगठन एक वैन लेने की तैयारी में है ताकि शहर और आसपास के इलाकों में और अधिक जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाया जा सके. वास्तव में ‘मानव सेवा ही माधव सेवा’ का यह मंत्र सतना में पिछले 25 वर्षों से साकार होता दिखाई दे रहा है.

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