रामायण में वर्णित जिस कुंड ने बुझाई थी श्रीराम की प्यास, उसे JCB से कर दिया गया ध्वस्त

मान्यता है कि वनवास काल के दौरान सुतीक्ष्ण आश्रम से लौटते वक्त भगवान राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ यहां रुककर फलाहार किया था, लेकिन पीने के …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 11 Mar 2026 09:33:15 PM (IST)Updated Date: Wed, 11 Mar 2026 09:33:15 PM (IST)

जिस कुंड ने बुझाई थी श्रीराम की प्यास, उसे JCB से कर दिया गया ध्वस्त, AI Generated Image

HighLights

  1. चित्रकूट में भगवान राम से जुड़ा ऐतिहासिक कुंड जेसीबी से तोड़ा
  2. तालाब गहरीकरण के नाम पर लक्ष्मण बाण से निर्मित कुंड ध्वस्त
  3. चित्रकूट के नयागांव में त्रेतायुगीन जलस्रोत मिटाने पर भड़के ग्रामीण

शिवम कृष्ण त्रिपाठी, नईदुनिया, सतना। भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट के पग-पग में उनसे जुड़े स्थल हैं। इन्हीं में से एक मझगवां विकासखंड के नयागांव स्थित फलाहारी आश्रम है। मान्यता है कि वनवास काल के दौरान सुतीक्ष्ण आश्रम से लौटते वक्त भगवान राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ यहां रुककर फलाहार किया था, लेकिन पीने के लिए जब जल नहीं दिखा तो लक्ष्मण ने बाण मारा जिससे जलधारा प्रकट हुई। तभी से यह कुंड लोगों की आस्था केंद्र रहा है। इसके जल को लोग अमृत मानते रहे हैं।

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तालाब विस्तारीकरण के नाम पर ऐतिहासिक धरोहरों का विनाश

अब ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग के ठेकेदार ने तालाब विस्तारीकरण के लिए इस ऐतिहासिक कुंड को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया है। उसने यहां स्थित प्राचीन कुएं को भी तोड़ दिया है। ये दोनों जलस्रोत रामवनपथ गमन मार्ग से जुड़े रास्ते के ठीक किनारे पर हैं। भगवान राम करीब 10 वर्ष तक रहे सुतीक्ष्ण आश्रम से आगे स्थित सगर मुनि आश्रम के पंडित युगल किशोर शास्त्री बताते हैं कि इस कुंड का उल्लेख बाल्मीकि रामायण के अरण्य कांड में है। सर्ग 09 से सर्ग 11 के बीच वर्णन है कि प्रभु श्रीराम यहां 10 वर्षों तक आश्रम बनाकर रहे, बाद के दो वर्ष उन्होंने आसपास के जंगल में बिताए थे।

कुंड और कुएं की विशेषता एवं ग्रामीणों का विरोध

कुंड के पास फलाहारी बाबा ने तप किया, जिस कारण इसका नाम फलाहारी आश्रम पड़ा। पास में फलाहारी तालाब है, जिसका गहरीकरण ग्वालियर के ठेकेदार अर्जुन सिंह द्वारा किया जा रहा है। ग्रामीण दीपेंद्र सिंह, विनोद सिंह आदि ने कुआं तोड़ने का विरोध किया, जिसके बाद काम बंद है।

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विशेषता: कुएं और बोर सूख जाते हैं, तब भी इन जलस्रोतों में पानी बना रहता है। अकाल की स्थिति में भी यह ज्यादा नीचे नहीं जाता। मान्यता है कि कुंड और कुएं का जल गैस संबंधी उदर विकार व चर्म रोग में काफी असरदार है।

आरईएस विभाग से प्राचीन जलस्रोतों को ध्वस्त न करने की अपील की थी, लेकिन वे नहीं माने। ग्रामीणों के विरोध के बाद एक कुआं छोड़ दिया, लेकिन कुंड का अस्तित्व अब नहीं बचा है। – गणेश सिंह, सरपंच, ग्राम पंचायत नयागांव

फलाहारी तालाब में काम चल रहा है। कुएं और कुंड के विषय में मुझे जानकारी नहीं है। शुक्रवार को मैं खुद जाकर निरीक्षण करूंगा। – लांजरूस केरकेट्टा, ईई, पीएचई

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