पौधे का नाम बेशर्म-बेहया लेकिन है बड़ा कमाल! जहर भी-अमृत भी, क्या बला है ये?

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Satna News: बेशर्म पौधे की पत्तियां सूजन और दर्द कम करने के लिए पारंपरिक इलाज में इस्तेमाल में लाई जाती है. विशेषज्ञ कहते हैं कि इसकी पत्तियों को हल्का गर्म कर सूजन वाली जगह पर बांधने से राहत मिलती है.

सतना. बघेलखंड के ग्रामीण इलाकों में मिलने वाला एक साधारण सा पौधा जिसे बेशर्म या बेहया के नाम से जाना जाता है, ये अपने भीतर ऐसे औषधीय गुण समेटे हुए है, जो कई महंगी दवाओं पर भारी पड़ सकता है. खेतों, तालाबों और नहरों के किनारे उगने वाला यह पौधा जहां अपने जहरीले गुणों के कारण जानवरों से बचा रहता है, वहीं इंसानों के लिए यह अमृत समान माना जाता है. लोकल 18 से बात करते हुए औषधीय विशेषज्ञ विष्णु तिवारी बताते हैं कि बेशर्म का पौधा घाव से लेकर दांत, त्वचा और यौन दुर्बलता जैसे रोगों के उपचार में वर्षों से इस्तेमाल किया जा रहा है.

बेशर्म का पौधा किसी विशेष देखभाल के बिना भी उग जाता है. यह सालभर हरा-भरा रहता है और सूखता नहीं है. हालांकि यह जहरीला होता है, इसलिए पशु इसे नहीं खाते. इसकी पत्तियां, टहनियां और दूध (सफेद रस) औषधीय उपयोग के लिए खासे प्रसिद्ध हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे घरेलू इलाज का एक आसान उपाय माना जाता है, जो बिना किसी दवा या डॉक्टर के सामान्य बीमारियों में राहत देता है.

चर्म रोगों में बेशर्म पौधे के फायदे
बेशर्म पौधे में मौजूद एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा संबंधी रोगों को ठीक करने में मददगार हैं. विटिलिगो जैसे चर्म रोगों में इसकी जड़ को सुखाकर पीसने के बाद कपूर और कोकड़े के तेल में मिलाकर लगाने से आराम मिलता है. यह दाद, खुजली, फोड़े-फुंसी और अन्य त्वचा रोगों में भी प्रभावी है. ग्रामीण चिकित्सक इसे देसी क्रीम के रूप में पहचानते हैं.

दांत और मसूड़ों के रोगों में असरदार इलाज
पायरिया और दांतों की सड़न जैसी समस्याओं में भी यह पौधा उपयोगी साबित हुआ है. ग्रामीण परंपरा में लोग इसकी टहनी से दातून करते हैं. इससे मसूड़ों की सूजन कम होती है और दांतों में कीड़े नहीं लगते. बेशर्म की टहनी में मौजूद प्राकृतिक तत्व मुंह की दुर्गंध को भी दूर करते हैं और जबड़ों की हड्डी को मजबूत बनाते हैं.

सूजन और दर्द में राहत देने वाला पौधा
बेशर्म की पत्तियां सूजन और दर्द कम करने के लिए पारंपरिक उपचार में व्यापक रूप से प्रयोग की जाती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि इसकी पत्तियों को हल्का गर्म कर सूजन वाली जगह पर बांधने से आराम मिलता है. मोच या मांसपेशियों के दर्द में भी इसका लेप कारगर है. यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाकर दर्द से राहत दिलाता है.

घाव भरने में चमत्कारी गुण
इस पौधे में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल तत्व पाए जाते हैं, जो घाव को तेजी से भरने में मदद करते हैं. ग्रामीण लोग इसकी पत्तियों का रस निकालकर सीधे घाव पर लगाते हैं. इससे न केवल संक्रमण का खतरा कम होता है बल्कि घाव जल्दी भर जाता है. पुराने या गहरे घावों में भी यह लाभकारी माना गया है.

यौन दुर्बलता में भी लाभकारी
बेशर्म के बीज और जड़ें पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने के लिए भी पारंपरिक चिकित्सा में प्रयोग की जाती हैं. माना जाता है कि इसका नियमित सेवन शरीर में ऊर्जा और सहनशक्ति बढ़ाता है. हालांकि विशेषज्ञों का सुझाव है कि इसे सीमित मात्रा में और जानकार वैद्य की सलाह से ही प्रयोग करें क्योंकि इसकी अधिक मात्रा हानिकारक भी हो सकती है.

जहां आधुनिक चिकित्सा लगातार नई दवाओं की खोज में लगी है, वहीं ग्रामीण भारत के लोग आज भी प्रकृति की गोद में छिपे इन पारंपरिक नुस्खों से स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. यह पौधा इस बात का उदाहरण है कि धरती पर कोई भी पौधा व्यर्थ नहीं होता, बस उसके गुणों को पहचानना जरूरी है.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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