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Charan Paduka Chhatarpur News: त्रेतायुग में जब भगवान राम चित्रकूट से वनवास के लिए दक्षिण दिशा की ओर गमन कर रहे थे, तो यहां उर्मिल नदी स्थित एक विशाल शिला पर खड़े होकर उन्होंने स्नान के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित किया था.
छतरपुर. प्रभु श्रीराम के चरण जहां पड़े, वह जगह तर हो गई. उन्होंने अपने चरणों से शिला बनीं मां अहिल्या का उद्धार किया, वैसे ही मध्य प्रदेश के छतरपुर में भी एक ऐसी शिला है, जो अमर हो गई. दरअसल छतरपुर के नौगांव जनपद के सिंहपुर गांव के जंगल इलाके में एक ऐसी भी शिला है, जिस पर भगवान राम ने चरण रखकर सूर्यदेव को अर्घ्य दिया था. तभी से यह शिला आस्था का प्रतीक बन गई. इस शिला पर आज भी श्रीराम के चरण बने हुए हैं. इस शिला की पूजा-अर्चना होती है. हालांकि यहां कोई मंदिर नहीं बना है क्योंकि यह शिला नदी के किनारे रखी हुई है. इसके दर्शन करने दूर-दूर से लोग आते हैं.
चरण पादुका स्थित राम-जानकी मंदिर के पुजारी सुरेश दास लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि यह बहुत ही प्राचीन स्थान है. त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम चंद्र चित्रकूट से वनवास के लिए दक्षिण दिशा की ओर गमन कर रहे थे, तो यहां उर्मिल नदी स्थित एक विशाल शिला पर खड़े होकर भगवन ने स्नान के बाद सूर्य भगवान को जल चढ़ाया था. तभी से इस शिला पर उनके चरण चिह्न बन गए. इसके बाद यह पवित्र स्थान चरण पादुका के नाम से प्रसिद्ध हो गया. यहां सुबह-शाम पूजा होती है.
इसी पर पड़ा गांव का नाम
वह आगे बताते हैं कि उर्मिल नदी के किनारे जो यह प्राचीन शिला है, इसपर रामजी के चरण बने हुए हैं और इसी के नाम से हमारे गांव का नाम भी चरण पादुका सिंहपुर रखा गया है. बता दें कि इस स्थान के नाम का इतिहास भगवान श्रीराम के वनवास यात्रा से जुड़ा है.
बरसों से लग रहा मेला
पुजारी बताते हैं कि यहां बरसों से हर साल मकर संक्रांति पर्व पर मेले का आयोजन भी होता है. इस दिन बड़े-बड़े अधिकारी और नेता आते हैं. वे इस शिला में अंकित चरण पादुका के दर्शन जरूर करते हैं. छतरपुर जिले के साथ ही दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां आते हैं. मकर संक्रांति पर्व पर लाखों की संख्या में भक्त आते हैं.
पुरखों से सुनते आए हैं
शिक्षक हेमंत तिवारी ने लोकल 18 से कहा कि हम पुरखों से सुनते आए हैं कि इस स्थान पर भगवान श्रीराम जब दक्षिण दिशा में गमन कर रहे थे, तो उन्होंने स्नान के बाद सूर्य नमस्कार किया. वह इस शिला पर बैठ गए और फिर यहीं से खड़े होकर सूर्यदेव को जल दिया. तब से इस शिला पर भगवान राम के चरण चिह्न बन गए.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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