पट्टे की जमीन होगी अपनी! विस्थापित परिवारों को मिलेगा मालिकाना हक, जानें कैसे

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Khargone News: शिविरों में आवेदकों से आवेदन पत्र, घोषणा पत्र, मूल पट्टा या आवंटन पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड या फॉर्म-80 जैसे दस्तावेज लिए जा रहे हैं. अगर पट्टाधारी का निधन हो चुका है, तो उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र और तहसीलदार द्वारा जारी मृत्यु प्रमाणपत्र भी अनिवार्य है.

खरगोन. सरदार सरोवर परियोजना के कारण जिन परिवारों को अपने गांव छोड़ने पड़े थे, उन्हें शासन ने पुनर्वास स्थलों पर पट्टे के रूप में जमीन दी थी. समय बीतने के साथ कई पट्टाधारियों का निधन हो गया, जिससे उनके परिजनों को जमीन के अधिकार को लेकर दिक्कतें आने लगीं. अब सरकार ने ऐसे परिवारों को राहत देते हुए जमीन का मालिकाना हक देने का फैसला किया है. यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए है, जो डूब क्षेत्र से प्रभावित होकर सरकारी जमीनों पर अपने परिवार के साथ रह रहे हैं. अब शासन पट्टाधारी के कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम पर रजिस्ट्री कराकर उन्हें जमीन का स्थायी अधिकार देगा ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो.

उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के आदेश के पालन के तहत यह पूरी प्रक्रिया शुरू की गई है. खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल के निर्देश पर जिले में स्थानीय स्तर पर विशेष दल गठित किए गए हैं, जो पुनर्वास स्थलों पर शिविर लगाकर विस्थापितों के दस्तावेज एकत्र कर रहे हैं. जिले के कसरावद और मंडलेश्वर क्षेत्र के पुनर्वास स्थलों में इन दिनों शिविर लगाए जा रहे हैं. इन शिविरों में नायब तहसीलदार, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, पटवारी, ग्राम सचिव और पुनर्वास कार्यालय के कर्मचारी मौजूद रहकर लोगों की मदद कर रहे हैं.

आवेदकों के लिए जरूरी दस्तावेज
शिविरों में आवेदकों से आवेदन पत्र, घोषणा पत्र, मूल पट्टा या आवंटन पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड या फॉर्म-80 जैसे दस्तावेज लिए जा रहे हैं. यदि पट्टाधारी का निधन हो चुका है, तो उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र और तहसीलदार द्वारा जारी मृत्यु प्रमाणपत्र भी जरूरी है. दस्तावेज सही पाए जाने पर जमीन की रजिस्ट्री की जाएगी. इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण होगा और नक्शों में भी संशोधन किया जाएगा.

शिविर में नहीं पहुंच पाए तो…
इस पूरी प्रक्रिया के बाद परिजनों को जमीन का कानूनी मालिकाना हक मिल जाएगा. वहीं प्रशासन ने पात्र परिवारों से अपील की है कि वे अपने सभी दस्तावेज जमा करें. यह पहल विस्थापित परिवारों को स्थायित्व देने और वर्षों से चली आ रही परेशानी को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. हालांकि जो लोग शिविर में नहीं पहुंच पाए, वे संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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