सिलबट्टे की थपथपाहट से महकती रसोई! आधुनिक दिल्ली में चटनी के लिए अपना रहे ये देसी तरीका

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Traditional Indian Chutney: लोग अब फिर वापस देसी परंपरा की ओर लौट रहे हैं. बात करें आधुनिक दिल्ली की तो सिलबट्टे पर हरी चटनी भारतीय रसोई की परंपरा, स्वाद और बचपन की यादों को आधुनिकता के बीच जीवित रखती है. कई लोग अब वापस देसी स्वाद की ओर लौट रहे हैं.

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दिल्लीः आज के समय में जहां मशीनें रसोई के लगभग हर काम को आसान बना चुकी हैं, वहीं एक साधारण-सा दृश्य सिलबट्टे पर चटनी पीसते हुए लोगों को पुराने दौर की मिट्टी से जोड़ देता है. इसी तरह इस वीडियो में जिसमें एक महिला पारंपरिक सिलबट्टे पर हरी चटनी तैयार करती दिखाई देती है. यह न कोई मेकओवर वीडियो है, न किसी बड़े शेफ की रेसिपी बल्कि एक आम भारतीय रसोई का वही असली रंग है, जो हर घर की पहचान हुआ करता था.

देसी स्वाद का असली राज
वीडियो में दिखने वाला सिलबट्टा सिर्फ एक पत्थर नहीं, बल्कि स्वाद की वह परंपरा है जो पीढ़ियों से भारतीय घरों में चली आ रही है. धनिया, हरी मिर्च, अदरक और लहसुन को हल्के हाथ से पीसते हुए जो सुगंध निकलती है, वह मिक्सर की आवाज में कभी महसूस नहीं होती. कई गृहिणियां मानती हैं कि सिलबट्टे पर पीसी चटनी का स्वाद ज़्यादा गहरा, ज्यादा ताजा और ज्यादा प्राकृतिक रहता है, क्योंकि उसका रस धीरे-धीरे निकलता है और मसालों का असली तेल वहीं खुलता है.

शहरों में भी लोग फिर अपनाने लगे देसी तरीके
हालांकि आज की पीढ़ी मिक्सर-ग्राइंडर पर ही निर्भर है, लेकिन ऐसे सरल दृश्य यह दिखाते हैं कि परंपरा अभी भी जिंदा है. कई लोगों का मानना है कि सिलबट्टे पर पीसने से सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि खाना बनाने का मज़ा भी अलग होता है. रसोई की आवाज़ें बदल गई हों, लेकिन सिलबट्टे पर रस निकलते मसालों की थपथपाहट अभी भी दिल को छू जाती है.

घर परिवार की यादें, संस्कृति की पहचान
ऐसे दृश्य लोगों को उनके बचपन की यादें दिलाते हैं नानी के घर की रसोई, मां का सुबह-सुबह धनिया मिर्च पीसना, और उस ताजी चटनी की खुशबू जो पूरे घर में फैल जाती थी. भारतीय रसोई सिर्फ खाने का स्थान नहीं, बल्कि परंपरा और अपनापन की जगह है जहां हर स्वाद के साथ यादें भी तैयार होती हैं. सिलबट्टा उस विरासत का हिस्सा है जिसे कई लोग आज भी संभालकर रखते हैं.

परंपरा और आधुनिकता का संतुलन
यह वीडियो यह भी याद दिलाता है कि तकनीक की सुविधा अच्छी है, लेकिन कुछ स्वाद और तरीके ऐसे हैं जिन्हें मशीनें भी पूरी तरह नहीं बदल सकतीं. सिलबट्टे पर बनी चटनी सिर्फ एक रेसिपी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का वह ज़िंदा हिस्सा है जिसे देखने से ही घर जैसी गर्माहट महसूस होती है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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सिलबट्टे की थपथपाहट से महकती रसोई! देसी चटनी के असली स्वाद का क्रेज बढ़ा

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