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Success story: सीतामढ़ी जिले के नानपुर के रहने वाले संजय कुशवाहा की पत्नी अनीता कुशवाहा जिसकी मायके मुजफ्फरपुर जिले के बोचहा प्रखंड के पटियासा जलाल गांव में हैं. अनीता कुशवाहा पिछले 25 वर्षों से मधुमक्खी पालन से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी मेहनत और लगन से अपनी आर्थिक स्थिति को न केवल सुदृढ़ किया है, बल्कि अन्य लोगों को भी मधुमक्खी पालन और शहद मार्केटिंग का प्रशिक्षण दे रही हैं. इस व्यवसाय से सालाना 14 लाख रुपये से अधिक की कमाई हो रही है. वहीं, उनकी सफलता की कहानी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की चौथी कक्षा की पाठ्यपुस्तक में भी शामिल की गई है.
अनीता कुशवाहा बताती हैं कि उन्होंने 2002 में केवल दो बॉक्स के साथ मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी. लेकिन इन दो बॉक्स को खरीदने के लिए भी उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी. बचपन से ही उन्हें पढ़ने का बहुत शौक था, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण नियमित स्कूल नहीं जा पाती थीं. किताबों के प्रति उनके लगाव ने उन्हें बिना घर वालों को बताए स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया. विद्यालय द्वारा कक्षा पांच तक निःशुल्क शिक्षा दी गई. लेकिन, आगे की कक्षाओं के लिए आर्थिक समस्या बनी रही. इसी कारण, उन्होंने कक्षा छह से ही छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया.

उनके गांव के लीची बागानों में बाहर से लोग मधुमक्खी पालन के लिए आते थे, जिन्होंने उन्हें भी इस व्यवसाय करने की सलाह दी. जिसके बाद उन्होंने ट्यूशन से बचाए हुए दो हजार रुपये और परिवार से मिले तीन हजार रुपये मिलाकर कुल पांच हजार रुपये में दो बॉक्स खरीदे और मधुमक्खी पालन शुरू कर दिया. आज उनके पास 450 बॉक्स हैं, जिनसे सालाना लगभग 15,000 किलो शहद का उत्पादन होता है. वर्तमान में वह सरसों, लीची, जामुन और तुलसी के फूलों से शहद संग्रह कर रही हैं.

गांव में 80 प्रतिशत लोग मधुमक्खी पालन से जुड़े हुए हैं. हालांकि, किसानों को उनकी मेहनत के अनुरूप शहद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है. इसका मुख्य कारण यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बाजार में शहद बेचने का सही तरीका नहीं पता है. इसी जानकारी के अभाव में किसान मजबूर होकर 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से शहद कंपनियों को बेच देते हैं. इन्हीं समस्याओं को देखते हुए अनीता ने खुद की शहद प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की.
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पिछले दो वर्षों से वे ‘अनीता’s शहद’ के नाम से शहद का पैकेजिंग और बिक्री कर रही हैं. जहां पहले वे 80 रुपये प्रति किलो शहद बेचती थीं, अब वे 300 से 400 रुपये प्रति किलो शहद बेच रही हैं. अनीता न केवल अपने शहद का प्रसंस्करण करती हैं, बल्कि अन्य किसानों के शहद की प्रोसेसिंग भी करती हैं और उन्हें शहद को खुद बेचने के लिए प्रेरित करती हैं. वे अपने शहद को सरकार द्वारा आयोजित मेलों और विभिन्न दुकानों में भी बेचती हैं.

अनीता शिक्षा और अपनी मेहनत की बदौलत आज सामाजिक स्तर पर इस मुकाम पर पहुंच चुकी हैं कि उनकी सफलता की कहानी लोग जानना चाहते हैं. वहीं, अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् NCERT की चौथी क्लास के एनवायरमेंट स्ट्डीज लुकिंग अराउंड पाठ्य पुस्तक में विद्यार्थी इनकी सफलता की कहानी पढ़ रहे हैं. अपने जीवन में उसका अनुसरण कर रहे हैं.

अनीता के पति ने बताया कि मूल रूप से हम 5 से 6 तरह का शहद निकालते हैं. हम इसे बनाते नहीं हैं सर, निकालते हैं. जैसे लीची, जामुन, तुलसी, सहजन और करंज का शहद तैयार करते है। जिस भी चीज का बनाना होता है वह संबंधित इलाके में जाकर तैयार करती है. बताया कि हमारे पास बी-बॉक्स (मधुमक्खी का डिब्बा) होता है. जैसे जब लीची का सीज़न होता है.

जहां लीची के बागान होते हैं, वहां हम इन डिब्बों को रखते हैं. फिर मधुमक्खियां लीची के फूलों से रस इकट्ठा करती हैं और डिब्बे के फ्रेम में जमा करती हैं. फिर हम उसे मशीनों के ज़रिए निकालकर अलग कर लेते हैं.क्रिया सभी के लिए एक जैसी ही है. जामुन के लिए हम दरभंगा की तरफ जाते हैं, सहजन के लिए गया की तरफ, सरसों के लिए उत्तर प्रदेश और तुलसी और करंज के लिए हमें झारखंड जाना पड़ता है. कहा कि हमारे शहद की पूरे भारत में मांग है.

वर्ष 2013 में अनीता की शादी सीतामढ़ी के नानपुर दक्षिणी के रहने वाले संजय कुशवाहा, जो प्राइवेट कंपनी में काम करते थे और होटल मैनेजमेंट का काम करते थे. शादी के बाद उन्होंने अनीता का साथ दिया और वर्ष 2021 में नानपुर दक्षिणी में प्रोसेसिंग प्लांट लगाया. अब यहां से ही सारा जगह सप्लाई करती है. इतना ही नहीं, सीतामढ़ी के साथ अपने मायके मुजफ्फरपुर में भी इसका दुकान खोल रखा है.

जहां मायके के लोग वर्क करते है. मुजफ्फरपुर के जुब्बा सहनी पार्क के पास दुकान भी है. जहाँ से भी ऑर्डर आता है, हम कूरियर के ज़रिए पूरे भारत में सप्लाई करते हैं। यह हमारा 25 सालों का अनुभव है. आज भी जहां कृषि मेला, बिहार दिवस, समेत अन्य जगहों पर सूचना मिलने के बाद स्टॉल लगाती है. इसमें फिलहाल अनीता के पति के साथ साथ उनकी सास, ससुर, और मायके के लोग स्पोर्ट करते है.
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