फिल्म में मिला रोल, पर परिवार ने नहीं दी इजाजत, फिर भी नहीं हारीं नीतू, आज संगीत की दुनिया

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फिल्म में मिला रोल, पर परिवार ने नहीं दी इजाजत, आज संगीत में मचा रहीं धमाल

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छतरपुर की नीतू चौरसिया को बचपन से ही संगीत और एक्टिंग का शौक़ था. फिल्म में एक्टिंग के लिए चयनित भी हो गईं, लेकिन घरवालों ने परमिशन नहीं दी.  हालांकि, इसके बाद भी इन्होंने हार नहीं मानी और अपने शौक को आगे बढ़ाया और कॉलेज में संगीत शिक्षक के तौर पर पढ़ाया भी. आज वह छतरपुर में एक जाना-पहचाना नाम बन चुकी हैं. देखिए खास रिपोर्ट…

Neetu Chaurasiya Success Story. आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी बताने जा रहे हैं जिन्हें बचपन से ही संगीत और एक्टिंग का शौक था. फिल्म में एक्टिंग के लिए चयनित भी हो गईं. लेकिन घरवालों ने परमिशन नहीं दी.  हालांकि, इसके बाद भी इन्होंने हार नहीं मानी और अपने शौक को आगे बढ़ाया और कॉलेज में संगीत शिक्षक के तौर पर पढ़ाया. साथ ही बड़े-बड़े मंचों पर प्रस्तुति भी देती हैं.

नीतू चौरसिया लोकल 18 से बातचीत में बताती हैं कि मुझे बचपन से ही एक्टिंग और संगीत का शौक हो गया था. घर में पापा बहुत फ्रैंक थे तो उन्हीं से एक्टिंग करते रहते थे. साथ ही पापा संगीत में भी पारंगत थे. पापा गाते रहते थे तो उन्हीं से सुनते रहते थे. पापा ने संगीत भी सिखाया है. मैं बुंदेली सम्राट देशराज पटेरिया के गीत भी सुनती थी. संगीत के साथ ही मुझे एक्टिंग का भी शौक था. हालांकि, छतरपुर से बाहर नहीं जाने को मिला तो बड़ा मौका नहीं मिला.

बच्चों को संगीत की फ्री शिक्षा दी
उन्होंने बताया कि छतरपुर में ही शादी हो गई. फिर तो ऐसा लगा कि अब तो मेरे बचपन के शौक यहीं दबकर रह जाएंगे. कुछ साल तक तो मैं अपने सपने ही भूल गई. लेकिन फिर मैंने अपने संगीत को आगे बढ़ाया. मैंने संगीत से एमए किया था और संगीत में दिलचस्पी थी तो कॉलेज में संगीत शिक्षक के तौर पर पढ़ाया. अपने घर पर भी बच्चों को संगीत की फ्री शिक्षा दी. हालांकि, पढ़ाने में रोक-टोक नहीं थी.

फिल्म ऑडिशन में हुईं सिलेक्टे
नीतू बताती हैं कि आज से 10 साल पहले छतरपुर के संस्कार वाटिका में फिल्म पलायन के लिए ऑडिशन हो रहे थे. मेरी फ्रेंड ने मुझे जानकारी दी और बोली यहां आ जाओ. मैं भी देखने पहुंच गई. मुझे भी मिलने के लिए बुलाया गया. मुझसे कहा गया कि आप हमारी फिल्म में किस रोल में एक्टिंग कर सकती हैं. मैंने कहा हर तरह के रोल में एक्टिंग कर सकती हूं. इसके बाद मैंने ही रोल बनाया और एक्टिंग की. मेरी एक्टिंग से वह बहुत इंप्रेस हो गए. इसके बाद वह अपनी क्रू मेंबर से बोले, उन्हें रुकाइगा. लेकिन मैं अपने घर आ गई. इसके बाद वह घर का पता आ गए. उन्होंने बहुत कोशिश की लेकिन मेरे पति नहीं मानें. उन्होंने तर्क दिए कि मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं. घर गृहस्थी कौन देखेगा. मैं अकेले छोटे-छोटे बच्चे और घर गृहस्थी नहीं संभाल पाऊंगा. मुझे घर से परमिशन नहीं मिली. अगर मैं काम कर लेती तो शायद मैं आज कहीं और होती. छतरपुर के लोग ही नहीं मेरी कला को देशभर के लोग देखते.

हाल ही में लिखा होली पर गीत
नीतू बताती हैं कि मैंने फिर भी हार नहीं मानी. मैंने संगीत भी सिखाया. गाने भी लिखती रही. समय-समय पर एक्टिंग भी करती हूं. अभी मैंने होली त्योहार के लिए एक गीत लिखा है. …

“अरे मोरी चुनर है रेशेदार, न मोपे रंग डालो
मैं तो विनती करुं बारम बार, न मोपे रंग डालो”

लोगों करते हैं आमंत्रित 
नीतू आगे बताती हैं कि भले ही मुझे घर से फ्रीडम न मिली लेकिन मैंने सालों साल धैर्य रखकर अपनी कला को जीवित रखा. एक्टिंग तो नहीं दिखाने का मौका मिला लेकिन संगीत में खुद को आगे बढ़ाया. छतरपुर के अलावा दूसरे शहरों में शादी-विवाह और जन्मदिवस पर संगीत कार्यक्रम के लिए बुलाया जाता है. नीतू बताती हैं कि मैंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अकाउंट बना रखा है. मैं छतरपुर तक सीमित नहीं रहना चाहती थी इसलिए युट्यूब में भी चैनल है. नीतू चौरसिया नाम से युटयूब चैनल है जो मोनेटाइज भी हो गया है.

आकाशवाणी में भी प्रोग्राम करती हैं 
नीतू बताती हैं कि मैंने आकाशवाणी छतरपुर में भी काम किया है. इस प्लेटफॉर्म पर भी मेरे कार्यक्रम होते हैं. सालों से आकाशवाणी से जुड़ी हूं. यहां मैं पैसे कमाने के लिए नहीं गाती हूं. यहां मुझे अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिलता है.

About the Author

Dallu Slathia

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें

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