बड़ों की बीमारी अब छोटे बच्चों में, 24 घंटे में फट सकती है पेट में थैली, ये लक्षण दिखें तो देर न करें

Appendix or Appendicitis is Dangerous in Children: आमतौर पर किशोरों और व्यस्कों में होने वाली अपेंडिसाइिटस यानि अपेंडिक्स अब छोटे बच्चों को तेजी से प्रभावित कर रही है. बच्चों में इस बीमारी की गंभीरता इतनी है कि लक्षण दिखाई देने के 24 घंट के भीतर पेट में अपेंडिक्स की थैली फट सकती है और फिर बच्चे की हालत गंभीर हो सकती है. ऐसी स्थिति में आनन-फानन में मरीज के पेट की सर्जरी करनी पड़ती है. वरना इससे बच्चे की जान भी चली जाती है.

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो आजकल अपेंडिक्स की सूजन से जुड़ी यह परेशानी बच्चों में आपातकालीन पेट की सर्जरी का प्रमुख कारण बन गई है. गुरुग्राम स्थित मेडनाटा-द मेडिसिटी में पीडियाट्रिक सर्जरी और यूरोलॉजी विभाग के निदेशक हैं डॉ. संदीप कुमार सिन्हा कहते हैं, ‘अपेंडिसाइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है, यहां तक कि बहुत छोटे बच्चों में भी.हालांकि यह आमतौर पर पांच साल से बड़े बच्चों में पाया जाता है, लेकिन हमने टॉडलर्स (एक से तीन साल के बच्चों) में भी इसके मामले देखे हैं. लेकिन जो सबसे खतरनाक बात है वह यह है कि छोटे बच्चों में लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं, ऐसे में बीमारी की पहचान करना मुश्किल हो जाता है और कई बार हालात क्रिटिकल हो जाते हैं.’

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हो सकता है जानलेवा इन्फेक्शन

अपेंडिक्स एक छोटी सी नली के आकार की थैली होती है जो बड़ी आंत से जुड़ी होती है.जब यह मल, संक्रमण या सूजे हुए लसीका ऊतक के कारण अवरुद्ध हो जाती है, तो यह सूज जाती है और उसमें पस भरने लगता है. अगर समय रहते इसका इलाज न हो तो यह फट सकती है और पेट की गुहा यानि एब्डोमिनल कैविटी में एक गंभीर व जानलेवा संक्रमण पेरीटोनाइटिस फैला सकती है.

ये होते हैं अपेंडिसाइटिस के लक्षण

अपेंडिसाइटिस आमतौर पर 10 से 19 वर्ष की उम्र के किशारों में ज्यादा देखा जाता है, लेकिन छोटे बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं. डॉक्टरों के अनुसार टॉडलर्स और प्रीस्कूल जाने वाले बच्चों में लक्षण अस्पष्ट होते हैं, जिससे बीमारी की पहचान करना और चुनौतीपूर्ण हो जाता है.हालांकि इस बीमारी के सामान्य संकेतों में पेट दर्द (जो नाभि के पास शुरू होकर पेट के निचले दाएं हिस्से में जाता है), बुखार, मतली, उल्टी और भूख में कमी शामिल हैं. कुछ बच्चों को कब्ज या दस्त भी हो सकते हैं.

बहुत छोटे बच्चों में अगर पेट फूला हुआ दिख रहा है, चिड़चिड़ापन हो या बच्चा खाना खाने से इंकार कर रहा हो तो ऐसी स्थिति में भी अपेंडिसाइटिस हो सकता है.

24 घंटे में फट सकती है अपेंडिक्स की थैली

डॉ. सिन्हा कहते हैं, ‘छोटे बच्चे हमेशा अपने लक्षणों को ठीक से बता नहीं पाते. बच्चों में एपेंडिसाइटिस की सबसे बड़ी समस्या है देर से पहचान. खास बात है क पांच साल से छोटे बच्चों में लक्षण शुरू होने के 24 घंटे के भीतर ही एपेंडिक्स फट सकता है, इसलिए माता-पिता और देखभाल करने वालों को बहुत सतर्क रहने की जरूरत है.’

जब डॉक्टरों को एपेंडिसाइटिस की आशंका होती है, तो वे आमतौर पर शारीरिक जांच, खून की जांच और अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन जैसे इमेजिंग टेस्ट कराते हैं.इन सभी में सबसे अहम है किसी अनुभवी पीडियाट्रिक सर्जन द्वारा किया गया क्लीनिकल परीक्षण.छोटे बच्चों में हम आमतौर पर सीटी स्कैन से बचते हैं क्योंकि इसमें रेडिएशन का खतरा होता है और इसे केवल विशेष मामलों में किया जाता है.

क्या बिना सर्जरी के हो सकता है इलाज

डॉ. सिन्हा कहते हैं कि अगर अपेंडिसाइटिस की पुष्टि हो जाए, तो आमतौर पर उपचार में अपेंडिक्स को शल्य चिकित्सा यानि सर्जरी द्वारा निकालना (एपेंडेक्टॉमी) शामिल होता है.कुछ शुरुआती मामलों में, जहां अपेंडिक्स नहीं फटा होता, वहां एंटीबायोटिक्स के माध्यम से बिना सर्जरी इलाज किया जा सकता है.हालांकि, सर्जरी को अभी भी सबसे सुरक्षित और आम उपचार माना जाता है.

रिकवरी का समय अलग-अलग हो सकता है। ज्यादातर बच्चे सर्जरी के बाद जल्दी ठीक हो जाते हैं और कुछ ही दिनों में घर जा सकते हैं. अगर एपेंडिक्स फट चुका होता है तो अस्पताल में ज्यादा दिन रहना पड़ सकता है और अंतःशिरा (IV) एंटीबायोटिक्स की जरूरत होती है.

पेरेंट्स जरूर बरतें सावधानी

वहीं अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार कहते हैं कि अगर बच्चे को लगातार पेट दर्द हो, विशेष रूप से निचले दाएं हिस्से में और साथ में बुखार, मतली या उल्टी हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. एपेंडिसाइटिस के मामलों में समय बेहद अहम होता है,जल्दी पहचान और समय पर इलाज से जटिलताओं का खतरा काफी कम हो जाता है.जहां हर घंटा मायने रखता है, वहां समय रहते चेतावनी संकेतों को पहचानना न सिर्फ बच्चे को दर्द से बचा सकता है, बल्कि उसकी जान भी बचा सकता है.

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