Superintelligent AI: आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के बाद अब हर कोई इसके अगले चरण सुपर इंटेलीजेंस या Superintelligent AI की तरफ देख रहा है. मेटा समेत कई कंपनियां इस दिशा में काम कर रही हैं. अब ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI ने इसे लेकर वार्निंग जारी की है. कंपनी का कहना है कि दुनिया जल्द ही Superintelligent AI के ऐसे दौर में प्रवेश करने वाली है, जहां मशीनें सबसे स्मार्ट इंसानों को भी पीछे छोड़ देगी और समाज इसके लइिए तैयार नहीं है. OpenAI का कहना कहना है कि ‘सुपरइंटेलीजेंस’ उम्मीद से जल्दी आ सकती है और इसके लिए इकॉनोमिक्स, नौकरियों और गवर्नेंस सिस्टम में तुरंत बदलाव की जरूरत है.
Superintelligent AI आने से क्या बदल जाएगा?
OpenAI का मानना है कि भविष्य में एआई सिस्टम किसी स्पेसिफिक टास्क को पूरा करने वाले टूल तक सीमित नहीं रहेंगे. ये सिस्टम इतने कैपेबल हो जाएंगे कि उन मुश्किल कामों को भी आसानी से हैंडल कर सकेंगे, जिन्हें करने में इंसानों को हफ्तों या महीनों का समय लगता है. कंपनी के सीईओ सैम ऑल्टमैन का मानना है कि ऐसा फ्यूचर दूर नहीं है. उन्होंने कहा था कि 2028 के अंत तक दुनिया की इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी बाहर की बजाय डेटा सेंटर के अंदर होगी. ऑल्टमैन के मुताबिक, ऐसे सिस्टम लीडरशिप और रिसर्च को पूरी तरह बदल देंगे. ये इंसानों की बजाय बेहतर तरीके से कंपनियां चला सकेंगे और दुनिया के बेस्ट साइंटिस्ट की तुलना में बेहतर रिसर्च कर पाएंगे.
OpenAI ने बताई तैयारी शुरू करने की जरूरत
बहुत ही कम समय में एआई टूल्स बहुत एडवांस हो गए हैं. अब ये उन कामों को चुटकियों में कर देते हैं, जिन्हें करने में इंसानों को कई घंटे या दिन लग जाते हैं. अगर यह स्पीड रहती है तो जल्द ही ऐसे टूल्स आ जाएंगे, जो अलग-अलग फील्ड के intellectual tasks में इंसानों को पीछे छोड़ देंगे. OpenAI का कहना है कि यह कोई नहीं जानता कि यह ट्रांजिशन कैसे होगा, लेकिन इसके लिए अभी से तैयारी शुरू करने की जरूरत है. कंपनी का मानना है कि सुपरइंटेलीजेंस बिजली और इंडस्ट्रियल मशीनरी की तरह एक बड़ी अचीवमेंट हो सकती है.
Superintelligent AI की ये चुनौतियां भी हैं
भले ही Superintelligent AI को एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, लेकिन इससे जुड़ी चुनौतियां भी कम नहीं हैं. OpenAI ने अपनी वार्निंग में बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी, कुछ कंपनियों के पास धन एकत्रित हो जाना, पावरफुल एआई सिस्टम का मिसयूज और मौजूदा नियमों का लागू न होने जैसी कई चुनौतियां का जिक्र किया है.
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