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Farmer Success Story: खेत पथरीला था. किसान ने कभी करेला, कभी आलू, कभी गोभी तरह-तरह की फसल बोई, लेकिन उतनी कमाई नहीं हुई. फिर बेटे की सलाह पर खेती का तरीका बदला और अब हर महीने एक लाख की कमाई हो रही है. आप भी ये तरीका अपना सकते हैं…
Agri Tips: खेती के क्षेत्र में जैसे-जैसे सुविधाएं बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे किसान नए-नए नवाचार कर रहे हैं. अब किसान खेतों में पानी की कमी हो या पथरीली भूमि हो, वहां पर फसल ही बदल देते हैं. एक ऐसा ही उदाहरण बालाघाट जिले से 95 किलोमीटर दूर धनवार में देखने को मिलता है. यहां एक किसान ने अपने बेटों की सलाह पर आधुनिक खेती शुरू की है. दरअसल, उनकी जमीन पथरीली थी. ऐसे में वहां पर धान और गेहूं की फसल में काफी नुकसान उठाना पड़ता था. ऐसे में किसान को उनके बेटों ने खेती का तरीका बदलने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने साल 2019 में आधुनिक खेती करना शुरू कर दिया.
धनवार के रहने वाले छैय्यालाल पटले ने बताया कि साल 2019 में उन्होंने आधुनिक खेती शुरू कर दी थी. सबसे पहले उन्होंने करेले की खेती से शुरुआत की. लेकिन, नुकसान हुआ फिर ड्रिप इरिगेशन किए. इसके उत्पादन बढ़ गया. इसके बाद गोभी, आलू, सहित दूसरी सब्जियों की खेती की. अब उद्यानिकी विभाग की मदद से गेंदे की खेती शुरू की, जिससे उनके खेत की सुंदरता बढ़ी और उसे बेचकर अच्छी आय भी कमा रहे हैं. छैय्यालाल अपने दोनों बेटों के साथ मिलकर खेती कर रहे हैं.
गेंदे की खेती से कमाई हुई बेहतर
परसवाड़ा विकासखंड की ग्रामीण उद्यान विकास अधिकारी चांदनी राहंगडाले ने बताया कि समय-समय पर वह किसानों से संपर्क करते हैं. ऐसे में वह उद्यानिकी विभाग की योजनाओं को बताते हैं. ऐसे में विभाग पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना के तहत विभाग से बीज लिए. किसानों को पारंपरिक खेती छोड़ उद्यानिकी ओर आए, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके.
सप्ताह में दो तुड़वाई, पांच क्विंटल उत्पादन
छैय्यालाल पटले ने बताया कि वह हर सप्ताह दो बार फूलों की तुड़ाई करते हैं. यानी दो तुड़ाई में करीब 5 क्विंटल उत्पादन होता है. ऐसे में हर सप्ताह 25 हजार से ज्यादा के फूल बेच रहे हैं. फूलों को बेचने के लिए वह परसवाड़ा, बैहर और मंडला के बाजार ले जाते हैं. जहां पर उन्हें ठीक दाम मिल जाते हैं. वहीं, गेंदे की फसल दो महीने बाद हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाती है. ऐसे में किसान इससे अच्छी खासी कमाई कर लेते हैं. गेंदे की खेती में लागत कम होती है. वहीं, मुनाफा भी अच्छा मिलता है. इसकी मांग साल भर बनी रहती है, जिससे किसान अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं.
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें
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