व्यवसाय और जिम्मेदारी का संगम: भारत को हरित और समावेशी कैसे बना रहा पतंजलि का मॉडल?

पतंजलि आयुर्वेद न केवल अपने आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उत्पादों के लिए जानी जाती है, बल्कि यह अपने पर्यावरण और सामाजिक कल्याण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता के लिए भी चर्चा में है. पतंजलि का दावा है कि कंपनी के लिए स्थिरता (Sustainability) केवल एक कॉर्पोरेट जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह कंपनी की मूल दर्शन और कार्यप्रणाली का एक अभिन्न अंग है. कंपनी का लक्ष्य एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना है, जहां लोग प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहें और प्राकृतिक तरीकों से स्वास्थ्य और कल्याण प्राप्त करें.

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए उठाए कई कदम- पतंजलि

पतंजलि का कहना है, ”कंपनी ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं. यह कंपनी किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करने के लिए प्रोत्साहित करती है. इसके बजाय, गोबर खाद और स्थानीय प्राकृतिक दवाओं का उपयोग कर मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और जल प्रदूषण को कम किया जा रहा है. इससे न केवल पर्यावरण को लाभ हो रहा है, बल्कि उपभोक्ताओं को रासायन-मुक्त, स्वस्थ भोजन भी मिल रहा है. पतंजलि ने 57,000 से अधिक किसानों को तेल पाम वृक्षारोपण परियोजनाओं में शामिल किया है, जो 74,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करता है. यह न केवल स्थानीय कृषि को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत की खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता को भी कम करता है.”

पतंजलि ने कहा, ”पर्यावरण संरक्षण के लिए कंपनी ने हरित पहल शुरू की हैं. कंपनी ने बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग को अपनाया है, जिससे प्लास्टिक कचरे को कम करने में मदद मिल रही है. इसके अलावा, कंपनी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सौर और पवन ऊर्जा पर निवेश कर रही है. पतंजलि फूड्स ने 2023-24 में 125,000 मेगावाट-घंटे से अधिक पवन ऊर्जा उत्पन्न की और 119,000 टन से अधिक CO2 उत्सर्जन को कम किया. इसके साथ ही, कंपनी ने अपने कई संयंत्रों में शून्य तरल निर्वहन प्रणाली स्थापित की है, जो पानी के पुनर्चक्रण को सुनिश्चित करती है.”

शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर ध्यान- पतंजलि

पतंजलि का दावा है, ”सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में पतंजलि ने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया है. कंपनी ने हरिद्वार में गुरुकुलम की स्थापना की है, जो वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है. इसके अलावा, पतंजलि ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं. कंपनी ने 2023 में अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के लिए 12.36 करोड़ रुपये आवंटित किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 87% की वृद्धि दर्शाता है.”

पतंजलि का कहना है, ”कंपनी की यह प्रतिबद्धता न केवल पर्यावरण और समाज के लिए लाभकारी है, बल्कि यह भारत में एक स्थायी और समावेशी विकास मॉडल को भी प्रेरित करती है. कंपनी का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि व्यवसाय और सामाजिक जिम्मेदारी एक साथ चल सकते हैं, जिससे एक स्वस्थ और हरित भविष्य का निर्माण हो सकता है.”

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