उज्जैन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में स्थायी निर्माण का मामला दिल्ली पहुंच गया है। भारतीय किसान संघ की शिकायत पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने मंगलवार को मप्र सरकार से जानकारी ली है। शाह
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सिंहस्थ क्षेत्र में सरकार 2 हजार 376 हैक्टेयर जमीन का अधिग्रहण कर रही है। इसमें किसानों की जमीन है और वे स्थायी निर्माण का विरोध कर रहे हैं। किसान संघ ने बताया कि सरकार स्थायी निर्माण के लिए भूमि का अधिग्रहण कर रही है। तब शाह ने सरकार से पूछा की स्थायी निर्माण क्यों करना चाहते हैं? मार्च 2028 में होने वाले सिंहस्थ में 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।
अमित शाह ने कहा: नासिक, हरिद्वार जैसे शहरों की स्टडी करें केन्द्रीय गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में अफसरों से कहा कि उज्जैन के सिंहस्थ में जिस तरह श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है उसके अनुसार हर स्तर पर प्लानिंग करें। शाह ने कहा नासिक, हरिद्वार जैसे धार्मिक नगरों की स्टडी करके अपने प्लान का तुलनात्मक अध्ययन करें। अमित शाह ने प्रजेंटेशन देखने के बाद अफसरों से कहा आप लोग फिर से तैयारी करके आएं। 15 दिन बाद इस मामले पर चर्चा करेंगे।
सरकार ने हरिद्वार कर दिया हवाला
शाह के सवाल पर मप्र सरकार की ओर से बताया गया कि हरिद्वार में ऐसी ही व्यवस्था है। बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि हरिद्वार में स्थायी व्यवस्था सालों पुरानी है। उज्जैन में इसकी क्या जरूरत है? नगरीय विकास एवं आवास विभाग के एसीएस संजय दुबे ने लैंड पुलिंग स्कीम के बारे में बताया कि ऐसे काम किए जाएंगे कि किसानों को नुकसान न हो।
जमीनों के स्थायी अधिग्रहण की शिकायत भी शाह तक पहुंची सूत्रों की मानें तो उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में जमीनों के स्थायी अधिग्रहण की शिकायत भी अमित शाह तक पहुंची है। भारतीय किसान संघ ने इस मामले में सीएम डॉ. मोहन यादव से लेकर केन्द्रीय नेतृत्व तक से शिकायत की है। सूत्र की मानें तो सिंहस्थ क्षेत्र में जमीनों के स्थायी अधिग्रहण के मामले पर अमित शाह ने भी बैठक में नाराजगी जाहिर की है।
भारतीय किसान संघ उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र में किसानों की जमीनों के स्थाई अधिग्रहण को लेकर शिकायत कर चुका है।
जमीन अधिग्रहण पर किसान संघ के मुद्दे…
किसान संघ ने अपने ज्ञापन में यह मांग की है कि सरकार कोई भी निर्णय लेने से पहले भारतीय किसान संघ और किसानों के साथ औपचारिक चर्चा करे। क्योंकि सभी सांस्कृतिक यात्राएं किसानों से जुड़ी होती हैं।
सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी निर्माण करने की बजाय नदी के दोनों किनारों पर मेले की जगह निर्धारित की जाए। किसान खुशी से अपनी जमीन उपलब्ध कराते रहे हैं, लेकिन स्थायी निर्माण से आपत्तियां और विवाद पैदा होंगे।
भूमि अधिग्रहण की बजाय अस्थायी उपयोग हो
हर सिंहस्थ में 2–3 महीने के लिए ही जमीन अधिग्रहित करने की व्यवस्था रखी जाए। स्थायी निर्माण करने से जमीन हमेशा के लिए किसानों से छिन जाएगी। यदि सड़क, बिजली, पानी की व्यवस्था करनी है तो सीमित भूमि अधिग्रहण कर उसी क्षेत्र में अस्थायी निर्माण किया जाए। उज्जैन सिंहस्थ में प्रयागराज महाकुंभ की तर्ज पर अस्थायी संरचनाएं बनाई जाएं।
किसानों के नुकसान की भरपाई
जिस भूमि का अस्थायी उपयोग हो, उसके बदले किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। क्योंकि 2–6 महीने जमीन खेती के योग्य नहीं रहेगी। किसान संघ ने यह मांग की है कि सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के अतिरिक्त किसी भी तरह का स्थायी निर्माण न किया जाए। किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित किसानों से औपचारिक बैठक कर सहमति ली जाए।
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