रांची: झारखंड की राजधानी रांची में कुछ ऐसे स्टूडेंट हैं, जिनका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है. जिन्होंने अपने दिमाग से कुछ ऐसे डिवाइस और कुछ ऐसे प्रोजेक्ट बनाये हैं. जिसको देखकर आप तारीफ किए बगैर नहीं रह पाएंगे. इनमें से कुछ स्टूडेंट्स संत ज़ेवियर स्कूल के हैं, तो कुछ रांची के डीपीएस स्कूल से हैं. खास बात यह है कि ये सभी बच्चे 9वीं और 12वीं के स्टूडेंट हैं.
एआई टूल डेवलप किया
सबसे पहले बात करते हैं शैल तिग्गा की. जो संत जेवियर स्कूल से पढ़ाई कर रहे हैं और कक्षा 9वीं के छात्र हैं. उन्होंने एक एआई टूल डेवलप किया है. दरअसल, इस टूल के माध्यम से आपको पढ़ाई में अगर कोई भी दिक्कत आ रही है, तो आसानी से हल कर पाएंगे. मतलब आपको कोई मैथ्स प्रॉब्लम नहीं समझ में आ रहा है या फिर आपको कोई क्वेश्चन का आंसर चाहिए, तो आपको यूपीएससी का सिलेबस तक भी चाहिए, तो यहां पर टाइप करें और आंसर आपके सामने आ जाएगा और वह कैसे आया है. उसके पीछे क्या मेथड है, वह भी पूरा समझा दिया जाएगा.
छात्र शैल बताते हैं कि इसको डेवलप करने में 4 से 5 दिन का समय लगा है. आजकल का जमाना एआई का है, तो हमने सोचा क्यों ना इसी में कुछ ऐसा किया जाए, जो बच्चों के पढ़ाई और खास तौर पर कंपटीशन की तैयारी करते हैं. उनके लिए चीज आसान हो जाए.
शैल ने बनाया अनोखा रोबोट
संत जेवियर स्कूल के ही 12वीं के छात्र हर्षित राज ने रोबोट तैयार किया है. सबसे खास बात ये है कि उन्होंने घर में पड़ा हुआ बेकार सीपीयू की मदद से रोबोट तैयार किया है. उन्होंने सीपीयू को रोबोट का बॉडी बनाया और उसमें सेंसर फिट किया. कुछ और भी मोडीफिकेशन के साथ. अब आलम यह है कि आप इसे जहां बोलेंगे वह वहां चला जाएगा. इसके लिए आपको कोई मेहनत करने की जरूरत नहीं है. आपके हाथ में जो मोबाइल फोन है, उसी में आपको एक एप्लीकेशन डाउनलोड करना पड़ेगा और उस एप्लीकेशन से आप इस रोबोट को चला सकते हैं.
वहीं, हर्षित बताते हैं कि खासतौर पर जो बूढ़े बुजुर्ग रहते हैं. उनके लिए यह रामबाण है. क्योंकि रोबोट इस तरीके से कस्टमाइज किया गया है कि जो सामान आप चाहेंगे. वह लाकर आपको दे देगा. आपको एक गिलास पानी चाहिए, तो वह भी दे देगा. ऐसे में जो बूढ़े बुजुर्ग उठ नहीं पाते हैं. छोटे-छोटे काम के लिए दूसरे पर निर्भर रहते हैं. उनको काफी सहूलियत हो जाएगी.
इन्होंने किसानों के लिए किया काम
रांची के डीपीएस स्कूल के छात्र अनुपम जो कि 9वीं के स्टूडेंट हैं. उन्होंने सिंचाई मॉडल तैयार किया. जिससे खासतौर पर किसानों को जो बूढ़े बुजुर्ग किसान हैं खेत नहीं पटा सकते हैं. उनके लिए काफी आसान हो जाएगा. उन्होंने ऐसा रोबोट बनाया है. जो फील्ड में पानी के साथ जाएगा और खुद ही समझ जाएगा कि कहां पर और किस पौधे को पानी की जरूरत है और कहां पर नहीं. सेंसर से यह पता कर पाएगा. ऐसे में कहां कितना पानी और कब डालना है. यह वही तय कर लेगा और डाल भी देगा.
छात्र अनुपम बताते हैं कि किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि आज भी हमारे देश में ऐसे किसान हैं, जो पढ़े नहीं है और वह तकनीकी चीजों को उतना नहीं समझ पाते. क्योंकि, किसानी करना भी इंजीनियरिंग से कम नहीं है. आपको देखना होता है किस पौधे में कितना और कब पानी डालना है. जरूरी नहीं कि एक पौधे को हर दिन पानी डाला जाए, क्या पता नमी काफी हो और उसे जरूरत ना पड़े. ऐसे में यह रोबोट उन सारी छोटी बड़ी चीजों का ख्याल बारीकी से रखेगा.
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