स्टार्टअप्स की धूम! आईपीओ के जरिए कंपनियां कर रहीं मोटी कमाई, कतार में अभी कई और भी


Upcoming IPOs: अगर आप आईपीओ के जरिए मुनाफा कमाने का प्लान बना रहे हैं, तो नवंबर का महीना आपके लिए है. एक तरफ जहां लेंसकार्ट, ग्रो, पाइन लैब्स और फिजिक्सवाला जैसी कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होने के लिए तैयार हैं. यह सभी कंपनियां मिलकर 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा रही हैं. वहीं, मीशो, बोट, शैडोफैक्स और वेकफिट जैसी कई नई कंपनियां आईपीओ लाने के कतार में हैं.

जेपी मॉर्गन के भारत इक्विटी कैपिटल मार्केट्स हेड, अभिनव भारती का अनुमान है कि नई कंपनियां आईपीओ के जरिए नवंबर और दिसंबर तक 30,000-40,000 करोड़ रुपये तक जुटाएंगी. कुछ बैंकरों का तो अनुमान है कि आंकड़ा 40,000 के पार जा सकता है. इसी के साथ यह प्राइमरी मार्केट  के लिए साल का सबसे व्यस्त महीना बन गया है. 

देश के आईपीओ मार्केट में बढ़ी हलचल

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए अभिनव भारती ने कहा, हमें उम्मीद है कि भारत आने वाले समय में एशिया-पैसिफिक रीजन का सबसे व्यस्त आईपीओ मार्केट होगा, जिसका नेतृत्व स्टार्टअप कंपनियां करेंगी. पैंटोमैथ कैपिटल एडवाइजर्स के इंवेस्टमेंट बैंकिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर कामराज सिंह नेगी ने कहा कि 2024 के मुकाबले इस साल 20-25 से अधिक स्टार्टअप कंपनियां अपना आईपीओ लॉन्च कर सकती हैं.

स्टार्टअप कंपनियों की घर वापसी

उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स आईपीओ की इस होड़ को बढ़ावा देने वाली बात यह है कि कंपनियों को भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट होने में मुनाफा दिखाई दे रहा है. कंपनियों के भारत में बसने का चलन फिर से बढ़ रहा है. बाहरी चुनौतियों के बावजूद घरेलू बुनियादी ढांचा मजबूत है. कई सालों तक विदेशों में हेडक्वॉर्टर स्थापित करने के बाद अब कंपनियां घर वापसी कर रही हैं.

इन स्टार्टअप्स का हेडक्वॉर्टर भारत शिफ्ट करने का प्रॉसेस तेजी से चल रहा है. अमेरिका और सिंगापुर जैसे देशों में अब भी 500 से अधिक स्टार्टअप कंपनियां रजिस्टर्ड हैं. आईपीओ लाने की खातिर करीब 70 स्टार्टअप कंपनियां पहले ही भारत शिफ्ट हो चुकी हैं. इस सिलसिले में अब आप पेटीएम को देख लीजिए, जिसने सिंगापुर से भारत अपनी वापसी की. 

क्यों भारत लौट रहीं कंपनियां

दरअसल, कंपनियों को देश के प्राइमरी मार्केट में बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं और भारत के इकोनॉमिक ग्रोथ की संभावनाएं भी मजबूत है इसलिए ये अपना हेडक्वॉर्टर विदेशों से भारत में शिफ्ट कर रही हैं. स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने भी नियम आसान बनाए हैं. पहले जहां किसी विदेशी कंपपी को अपनी भारतीय यूनिट में मर्ज होने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) से अप्रूवल लेना पड़ता था. यह प्रॉसेस काफी लंबा होता था, लेकिन अब बस RBI की ही मंजूरी लेनी पड़ती है. 

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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