बजट 2026 से पहले आयी बड़ी खुशखबरी, जानकर अमेरिका से लेकर पड़ोसी चीन-पाक तक लगेगी मिर्ची

India’s Forex Reserve: ऐसे समय में जब एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाना है और शेयर बाजार से लेकर रुपये तक में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, इसी बीच देश के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. इस खबर से जहां भारत पर हाई टैरिफ लगाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को असहजता हो सकती है, वहीं चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की चिंता भी बढ़ सकती है.

दरअसल, 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.05 अरब डॉलर बढ़कर 709.41 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है.

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, इससे पिछले सप्ताह देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 14.16 अरब डॉलर बढ़कर 701.36 अरब डॉलर रहा था. इससे पहले सितंबर 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार 704.89 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचा था, हालांकि हाल के महीनों में रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए इसका उपयोग किया गया, जिससे भंडार पर दबाव देखा गया था.

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 23 जनवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) 2.36 अरब डॉलर बढ़कर 562.88 अरब डॉलर हो गईं. डॉलर में दर्शाई जाने वाली इन परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल रहता है.

स्वर्ण भंडार भी मजबूत

समीक्षाधीन सप्ताह में स्वर्ण भंडार का मूल्य 5.63 अरब डॉलर बढ़कर 123.08 अरब डॉलर पहुंच गया. इसके अलावा, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 3.3 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 18.73 अरब डॉलर हो गया. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की आरक्षित स्थिति भी 1.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.70 अरब डॉलर हो गई.

गौरतलब है कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका भारत ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को तेज़ी से मजबूत करने में जुटा हुआ है. इसके साथ ही, अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने के लिए भारत ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (EU) समेत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) कर नए निर्यात बाजार तैयार करने की दिशा में भी काम कर रहा है.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को लगातार करीब आठ प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर बनाए रखना जरूरी होगा. ऐसे में भारत को आर्थिक सुधारों, निवेश बढ़ाने और वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी मजबूत करने के लिए तेज़ और ठोस कदम उठाने होंगे.

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