Small Business Success Story: कहते हैं ना, किस्मत उसी का साथ देती है जो हार मानने को तैयार नहीं होता. खंडवा के एक साधारण से सब्जी बेचने वाले युवक की कहानी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है. नाम है विजय मोरे, रहने वाले दादाजी वार्ड, संजय नगर. पढ़ाई ज्यादा नहीं हो पाई, लेकिन मेहनत और ईमानदारी ने उन्हें आज उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जहां वो पूरे परिवार की जिम्मेदारी अकेले उठा रहे हैं.
पढ़ाई छूटी, जिम्मेदारियां आ गईं
विजय सिर्फ 10वीं तक ही पढ़ पाए. घर की हालत इतनी कमजोर थी कि आगे पढ़ना सपना बनकर रह गया. मजबूरी में कम उम्र में ही काम करने का फैसला लिया. उस समय न कोई पूंजी थी, न कोई सहारा. बस हिम्मत थी और कुछ कर गुजरने की चाह.
1000 रुपए से शुरू हुआ सफर
करीब 15 साल पहले, विजय ने अपने एक दोस्त से 1000 रुपए उधार लिए और सब्जी बेचने का काम शुरू किया. शुरुआत में गली-गली घूमकर सब्जी बेचते थे. पहले दिन की कमाई सिर्फ 400-500 रुपए रही, लेकिन उसी दिन विजय ने तय कर लिया कि अब पीछे नहीं हटना. अगले दिन फिर मंडी गए, फिर ठेला लगाया… और यही सिलसिला चलता रहा.
मेहनत लाई रंग, आज दो ठेले हैं
धीरे-धीरे मेहनत रंग लाने लगी. आज विजय के पास दो सब्जी के ठेले हैं, जिन्हें वे खुद संभालते हैं. उनका ठेला जिला अस्पताल के सामने, अंबेडकर जी की प्रतिमा के पास लगता है, जहां रोज बड़ी संख्या में ग्राहक आते हैं. विजय बताते हैं कि वे सीजन के हिसाब से ताजी सब्जी बेचते हैं मटर, गाजर, गार्डू, कंद, शलजम. यही वजह है कि उनका लगभग पूरा माल रोज बिक जाता है.
महीने की 25 हजार कमाई, बच्चों के बड़े सपने
आज विजय हर महीने 20 से 25 हजार रुपए कमा लेते हैं. इसी से घर चलता है. परिवार में माता-पिता, पत्नी, एक बेटी और एक बेटा हैं. दोनों बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. भावुक होकर विजय कहते हैं मैं पढ़ नहीं पाया, लेकिन चाहता हूं कि मेरे बच्चे मजबूरी में ठेला न लगाएं. पढ़-लिखकर अफसर या इंजीनियर बनें, यही सपना है.”
दोस्त की मदद आज भी याद है
विजय आज भी उस दोस्त को नहीं भूले, जिसने मुश्किल वक्त में 1000 रुपए उधार दिए थे. कहते हैं कि अगर वो साथ नहीं देता, तो शायद आज मेरी जिंदगी कुछ और होती.
खंडवा के युवाओं के लिए मिसाल
विजय मोरे आज सिर्फ सब्जी बेचने वाले नहीं, बल्कि हजारों लोगों के लिए प्रेरणा हैं. ये कहानी सिखाती है कि पढ़ाई कम हो सकती है, पैसे कम हो सकते हैं, लेकिन अगर मेहनत और ईमानदारी हो तो जिंदगी जरूर आगे बढ़ती है.
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