एमवाय अस्पताल के एनआईसीयू में चूहों के दो नवजातों को काटे जाने पर मौत हो गई थी।
एमवाय अस्पताल के एनआईसीयू में चूहों के दो नवजातों को काटे जाने से हुई मौत के मामले में शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले में पेस्ट कंट्रोल और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली निजी कंपनी एजाइल सिक्योरिटी का एमओयू खत्म करने का निर्देश दिया है।
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3 सितंबर को गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर तरुण राठी को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके आधार पर प्रमुख सचिव संदीप यादव ने एचएलएल इंफ्राटेक सर्विसेज (HITES) को एजाइल सिक्योरिटी का अनुबंध रद्द करने के निर्देश दिए। एजाइल को अस्पताल की सफाई, सुरक्षा और पेस्ट कंट्रोल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
NICU में नवजातों को इन्हीं इंक्यूबेटर में रखा गया था। चूहों ने उनके हाथ कुतर दिए थे।
मामले को शुरू से दबाने की कोशिश
मामले में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शुरू से ही तथ्यों को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह दावा किया कि नवजातों की मौत गंभीर बीमारी के कारण हुई है, न कि चूहों के काटने से। बताया गया कि बच्चों के अंग पूरी तरह विकसित नहीं थे।
धार निवासी एक दंपती के नवजात की मौत को लेकर भी गलत जानकारी दी गई। तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह और मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर तरुण राठी को भी गलत फीडबैक देकर गुमराह किया गया कि पोस्टमॉर्टम हो गया है और रिपोर्ट में चूहे के काटने का जिक्र नहीं है। इसी आधार पर दोनों अधिकारियों ने मीडिया को गलत जानकारी दी।
‘दैनिक भास्कर’ के खुलासे से सामने आया सच
मामले की सच्चाई सामने तब आई जब ‘दैनिक भास्कर’ ने डिजिटल सबूत जुटाकर सीएमओ रूम में वीडियो के जरिए से यह स्पष्ट किया कि नवजात का पोस्टमॉर्टम हुआ ही नहीं था।
इसके बाद 6 सितंबर को परिजनों के आने पर पोस्टमॉर्टम कराया गया। सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब परिजन देर रात शव लेकर गांव पहुंचे और पैकिंग खोलने पर देखा कि चूहे उसके एक हाथ की चार अंगुलियां पूरी तरह खा चुके थे।

परिजन को बॉक्स में नवजात का शव रखकर दिया था। घर पर जब बॉक्स खोला तो उसकी चार उंगलियां नहीं थी।
एजाइल पर पहले सिर्फ मामूली जुर्माना लगाया
शुरुआत में एजाइल सिक्योरिटी पर केवल 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने की चेतावनी दी गई। जबकि कंपनी शुरू से ही सवालों के घेरे में थी, इसके बावजूद उसका एमओयू रद्द नहीं किया गया और संवेदनशील जिम्मेदारी के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज, जिम्मेदार एजेंसी बचाई गई
पूर्व में डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने दो नर्सिंग ऑफिसरों को सस्पेंड किया था, जबकि नर्सिंग सुपरिटेंडेंट जोसेफ को हटाया गया और छह अन्य को शोकॉज नोटिस जारी किए गए।
इन कर्मचारियों में नाराजगी थी कि मुख्य जिम्मेदारी एजाइल की थी, लेकिन उसे बचाते हुए निचले स्तर के स्टाफ को निशाना बनाया गया। इसके बाद डॉ. महेश कछारिया को असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट के रूप में नियुक्त किया गया।
मामले में कांग्रेस और जयस शुरू से ही इस मामले में विरोध कर रहे थे और मांग कर रहे थे कि डीन और सुपरिटेंडेंट को सस्पेंड किया जाए और एजाइल कंपनी पर कठोर कार्रवाई हो।
सुपरिटेंडेंट छुट्टी पर, कई अधिकारियों पर कार्रवाई

डॉ अशोक यादव ने स्वास्थ्य खराब होने का दिया हवाला और छुट्टी ली।
इस बीच सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने 11 सितंबर को स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देकर 15 दिन की छुट्टी मांगी और बुधवार को उन्हें अवकाश पर भेजते हुए डॉ. बसंत निंगवाल को कार्यवाहक सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया। हालांकि चर्चाएं हैं कि उन्हें छुट्टी के नाम पर हटाया गया है।
इसके साथ ही डॉ. मनोज जोशी (प्रभारी एचओडी, पीडियाट्रिक सर्जरी) को सस्पेंड कर दिया गया है।
अब तक हुई नई कार्रवाई
- डॉ. बृजेश कुमार लाहोटी को एचओडी, पीडियाट्रिक सर्जरी के पद से हटाया गया।
- डॉ. अशोक कुमार लाढा को विभाग का प्रभार सौंपा गया।
- डॉ. बसंत निंगवाल को प्रभारी सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया गया।
- डॉ. सुमित सिंह को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई।
- डॉ. रामू ठाकुर को एचओडी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग बनाया गया।
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