माहवारी की उम्र 12-13 से घटकर 9-11 हुई, कहीं इसका PCOS से कनेक्शन तो नहीं? ओवरडायग्नोसिस पर एक्सपर्ट्स ने चेताया, कही ये बात

Periods and PCOS Connection: आमतौर पर माहवारी यानी मासिक धर्म (पीरियड्स) की शुरुआत 12 से 13 वर्ष की उम्र के बीच लड़कियों में होती है, लेकिन आज की बदलती लाइफस्टाइल, खराब खानपान आदि के कारण माहवारी की उम्र घटकर 9 से 11 साल हो गई है. इस बात को लेकर आजकल के अधिकतर पेरेंट्स काफी चिंतित हैं. उन्हें लगता है कि इतनी कम उम्र में पीरियड्स होना कहीं पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) तो नहीं. ऐसे में अधिकतर पेरेंट्स के साथ टीनएजर्स लड़कियां भी पीसीओएस के लक्षणों को लेकर अधिक सतर्क हो रही हैं और डॉक्टर के पास निदान और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं. इस बढ़ती चिंता को लेकर एक्सपर्ट 13 से 14 वर्ष की लड़कियों और उनके पेरेंट्स को समय से पहले निदान, उपचार को लेकर चेतावनी दे रहे हैं.

माहवारी की औसत आयु पहले से घटी

टीओआई में छपी एक खबर के अनुसार, डॉक्टर्स के अनुसार, माहवारी की औसत आयु 12-13 साल से घटकर 9-11 साल हो गई है. माहवारी की इस जल्दी शुरुआत का मतलब है कि शुरुआती कुछ वर्षों में अनियमित चक्र, मुंहासे और बालों का बढ़ना सामान्य है, लेकिन इन्हें अक्सर पीसीओएस समझ लिया जाता है. बेंगलुरू के गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार, पीरियड्स का जल्दी आने का ये मतलब नहीं कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम है. खासकर, बेंगलुरू में प्रत्येक सप्ताह कम से कम 10-15 ऐसे मामले देखे जा रहे हैं. कई बार माहवारी शुरू होने के तुरंत बाद उसका अनियमित होना सामान्य है.

लेकिन, अब होंठों के ऊपर या ठोड़ी पर हल्के बाल भी नजर आते हैं तो माता-पिता को पीसीओएस की चिंता सताने लगती है. वे यह नहीं समझ पाते हैं कि किशोरावस्था में शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं, जो कई बार पीसीओएस के लक्षणों जैसे नजर आ सकते हैं. ये पीसीओएस ही हो, ऐसा समझने की भूल न करें.

डॉक्टर्स के अनुसार, सोशल मीडिया ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है. आज अधिकतर किशोरियां खुद ही अपने आप को पीसीओएस का रोगी मान लेती हैं. चेहरे पर छोटे-छोटे रोएं, बाल नजर आते हैं तो परेशान हो जाती हैं. ऑनलाइन वीडियो देखकर, अपनी दोस्तों से बात करने के बाद पेरेंट्स के पास इलाज कराने की बात करती हैं.

टीओआई को दिए इंटरव्यू में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. एन. वेंकटेश ने बताया कि मुंहासे और बाल झड़ने जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं किशोरियों को क्लिनिक तक ले आती हैं. वे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की जांच करवाने की मांग करती हैं. ऐसे में हमें अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है. यहीं से ओवरडायग्नोसिस की समस्या शुरू होती है. कई बार सिर्फ एक-दो फॉलिकल्स या थोड़े मोटे अंडाशय को भी रेडियोलॉजिस्ट पीसीओएस बता देते हैं. इस वजह से भी पेरेंट्स चिंतित हो जाते हैं.

कैसे करें पीसीओएस की पुष्टि

पीसीओएस की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर स्पष्ट मानदंडों पर जोर देते हैं, जिसमें माहवारी के एक विशेष चरण में कम से कम 20 फॉलिकल्स का होना जरूरी है. हालांकि, किशोरियों और पेरेंट्स में इसका ओवरडायग्नोसिस एक चिंता का विषय है. डॉक्टर मानते हैं कि जीवनशैली से जुड़ी वजहें वास्तव में पीसीओएस (PCOS) के शुरुआती लक्षणों को बढ़ावा दे रही हैं. अधिक मीठा और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन , मोटापा, निष्क्रिय दिनचर्या, तनाव अक्सर इसके प्रमुख कारण होते हैं.

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