हादसे ने छीना पति और ससुराल ने छीना संपत्ति का अधिकार, बेटियों का हक मांगने…

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Balaghat News: मंजूलता ने ससुराल पक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह अपनी बेटियों का हक मांगती हैं, तो वे कहते हैं कि तुम्हारी तो लड़कियां हैं, हम संपत्ति क्यों देंगे. बेटियां दूसरों के घर चली जाएंगी और फिर हमारी संपत्ति पराये घर चली जाएगी.

बालाघाट. मध्य प्रदेश के बालाघाट के महेश और मंजूलता का हंसता-खेलता परिवार था. उनकी दो बेटियां हैं. इतना ही नहीं, परिवार में दादा-दादी के साथ बड़े पापा और मम्मी भी थीं. सब कुछ अच्छा चल रहा था. परिवार मिल-जुलकर रह रहा था. सारे सुख-दुख में एक दूसरे के साथ रहते थे. संपत्ति भी एक ही में थी. कभी यह न हुआ कि ये तेरा ये मेरा. सभी दोनों बच्चियों को खूब प्यार करते थे. बच्चियां भी अपनी दादी और बड़े मम्मी-पापा को उतना ही चाहती थीं लेकिन वक्त ने करवट ली और मंजूलता और उनकी बच्चियों की जिंदगी ही बदल गई. दरअसल महेश करीब चार साल पहले एक सड़क हादसे का शिकार हो जाते हैं. रात में हुए हादसे की खबर किसी को नहीं होती और इलाज के अभाव में महेश की मौत हो जाती है. वह अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ जाते हैं.

मंजूलता ने लोकल 18 से कहा कि पति की मौत के बाद शुरुआत में परिवार की हमदर्दी रही लेकिन कुछ वक्त के बाद अपनों के मन में पैतृक संपत्ति का लालच ऐसे टूटा कि जो कभी अपनापन जताते थकते नहीं थे, अब उन्हीं लोगों ने नकार दिया. धीरे-धीरे परिजनों का व्यवहार बदला और उन्होंने पैतृक संपत्ति अवैध तरीके से अपने नाम कर ली. उन्होंने आरोप लगाया है कि पटवारी से मिलीभगत कर ऐसा किया गया. नियमों के मुताबिक पैतृक संपत्ति में उनकी बच्चियों का भी हक है.

अब ठोकरें खाने को मजबूर
पति की मौत के बाद मंजूलता और उनकी बच्चियों को ससुराल वालों ने दुत्कार दिया. ऐसे में दो बच्चियों के लालन-पालन और भविष्य को उज्ज्वल बनाने की जिम्मेदारी मंजूलता के सिर पर आ गई. एक आसरा यह था कि पैतृक जमीन मिल जाती, तो वहां से हुई फसल से घर का गुजारा होता. ससुराल पक्ष ने न सिर्फ उन्हें जमीन से बेदखल किया बल्कि पैतृक मकान से भी निकाल दिया. अब शहर में बने मकान को भी खाली करने की धमकी देते हैं. मंजूलता के पास शहर में एक मकान है और उसके दो कमरे के किराये से घर चल पाता है.

बेटियां दूसरे घर चली जाएंगी
मंजूलता का ससुराल पक्ष पर आरोप है कि जब वह अपनों से अपनी बेटियों का हक मांगती हैं, तो वे कहते हैं कि तुम्हारी तो बेटियां हैं, संपत्ति क्यों देंगे. बेटियां दूसरों के घर चली जाएंगी और हमारी संपत्ति पराये घर में चली जाएगी. अगर बेटा होता, तो हम शायद संपत्ति दे भी देते. कानून कहता है कि बेटियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. उन्हें भी बेटे के बराबर अधिकार है लेकिन जन्मसिद्ध अधिकार को समाज नकारता है.

पति के रहने तक ही अच्छा व्यवहार
मंजूलता ने आगे कहा कि दूसरों के घर से जब आप किसी बेटी को ब्याह के लाते हैं, पति के रहने तक ही अच्छा व्यवहार रहता है. पति के चले जाने के बाद महिलाओं जिंदगी लटक सी जाती है. ऐसे में पति के न होने पर उसके परिवार का ख्याल रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए. यह सिर्फ उनकी कहानी नहीं है बल्कि हमारे समाज में अक्सर ऐसा ही होता है.

समाज पर सवाल और न्याय की गुहार
मंजूलता ने कहा कि जिस तरह समाज कई कार्यों में एकजुट होता है, वैसे ही बेटियों के अधिकार को संरक्षित करने के लिए भी समाज को आगे आना चाहिए और अन्याय के खिलाफ बोलना चाहिए. हालांकि मंजूलता प्रशासन की चौखट पर भी अधिकारों के लिए गईं लेकिन मिला सिर्फ आश्वासन. अब उनका कहना है कि वह हार नहीं मानेंगी और अपनी बेटियों को अधिकार दिलाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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