इसलिए पीएम मोदी ने कहा सीने में भर-भरकर सांस लेना जरूरी, विज्ञान और योग से गहरा नाता, जानें इसके फायदे

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PM Modi Breathing Exercise: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा के दूसरे सत्र में विद्यार्थियों से कहा है कि दिन में जब भी मौका मिले सीने में भर-भरकर सांस लें. यह खाने के बाद सबसे ज्यादा जरूरी है. दरअसल, लंबी गहरी सांस लेने के कई फायदे हैं. विज्ञान में भी इसे प्रमाणित किया गया. साथ ही हमारी सदियों पुराने योग विद्या में मुख्य रूप से यही है.

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परीक्षा पे चर्चा के दौरान विद्यार्थियों के साथ पीएम मोदी. photo -PMO Via PTI

PM Modi Breathing Exercise: हम खाना खाना तो जानते हैं लेकिन सांस कैसे ली जाती है, इसे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हीं बातों को रेखांकित करते हुए परीक्षा पे चर्चा के दौरान विद्यार्थियों को नई सीख दी है. उन्होंने कहा कि गहरी सांस लेना हमारे फिटनेस का मूल आधार है. इसलिए हमें सीने में भर-भरकर सांस लेनी चाहिए. जिस तरह हमारे लिए अन्न जरूरी है, उसी तरह गहरी सांस लेना भी जरूर है. इसके कई वैज्ञानिक कारण है.

पीएम ने क्या कहा
परीक्षा पे चर्चा के दौरान जब एक स्टूडेंट ने पीएम से पूछा कि आप हमलोगों को किस तरह की डाइट लेने की सलाह देंगे तो उन्होंने कहा कि पहले यह तय करो कि पेट भर के खाना है या मन भर के खाना. ज्यादातर लोगों जब भोजन करने बैठते हैं तो जब तक उसे मना न करे तब तक वह खाता रहता है. अनाज पेट भर के खाते हैं लेकिन सांस सीना भर के नहीं लेते. पीएम मोदी ने कहा कि यहां उल्टा करना चाहिए. दिन में जब भी मौका मिले एकदम शरीर भर जाए इतना सांस लेना चाहिए. हो सके तो कुछ पल उसे रोकना चाहिए और धीरे से निकालना चाहिए. हमलोग बाकी 50 कामों में शरीर को आखिरी प्रायोरिटी देते हैं. आपलोगों में कितने है जिन्होंने तय किया है कि हम सूर्योदय देखेंगे. शरीर को ये चीजें ताजगी देती है. एक एनर्जी देती है. इनकों हमें आदत बनानी चाहिए. शरीर को अक्सर प्रायोरिटी देनी चाहिए.

विज्ञान में सांस भरने का कनेक्शन
क्लीवलैंड क्लीनिक के मताबिक विज्ञान में इसे डायफ्राम ब्रीदिंग टेक्निक (Diaphragmatic Breathing) कहा जाता है. डायफ्राम फेफड़ों के निचले हिस्से में स्थित एक बड़ी, गुंबद के आकार की मांसपेशी होती है. इसी के अंदर लंग्स टिके रहते हैं. डायाफ्रामैटिक ब्रीदिंग का उद्देश्य सांस लेते समय डायफ्राम का सही तरीके से उपयोग करना है. यह श्वसन तकनीक शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है. इससे बीपी और हार्ट रेट कम होता है. वहीं इससे शरीर और मन को गहरी शांति मिलती है.

Photo-PMO via PTI Photo 

डायाफ्रामैटिक ब्रीदिंग के फायदे
डायाफ्रामैटिक ब्रीदिंग गहरी सांस लेनी होती है. इससे डायफ्राम एक्टिव होता है. सामान्य सांस लेने में हम फेफड़ों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाते है. जबकि यह तकनीक फेफड़ों को लगभग 100 प्रतिशत क्षमता से काम करने में मदद करती है, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है. इससे डायाफ्राम की मांसपेशी को मजबूत होती है. अगर हम इसका नियमित अभ्यास करें तो सामान्य तरह से जो सांस लेते हैं उसमें हमें कम मेहनत करनी पड़ती है ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है. इससे शरीर की ऑक्सीजन की मांग कम होती है. इससे कम ऊर्जा और कम प्रयास में बेहतर तरीके से सांस ले पाते हैं. यह शरीर और मन को आराम देने में मदद करती है और तनाव कम करती है. एक्सरसाज के दौरान मांसपेशियों की कार्यक्षमता बेहतर बनाती है और खिंचाव या चोट से बचाव करती है. यह खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाती है, जिससे शरीर ज्यादा ऊर्जावान महसूस करता है. फेफड़ों से कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों को बाहर निकालना आसान बनाती है. इससे बीपी कम रहता है और हार्ट रेट संतुलित रहता है. एंग्जाइटी, अस्थमा, सीओपीडी और तनाव की स्थिति में गहरी लंबी सांस बहुत मदद करती है.

इस अभ्यास को कैसे करें

  • सबसे पहले पीठ के बल सीधी सतह या बिस्तर पर लेट जाएं. घुटनों को मोड़ लें और सिर के नीचे तकिया रखें. चाहें तो घुटनों के नीचे भी तकिया रख सकते हैं.
  • एक हाथ छाती पर और दूसरा हाथ पसलियों के नीचे पेट पर रखें. इससे आपको सांस लेते समय डायाफ्राम की हलचल महसूस होगी.
  • अब नाक से धीरे-धीरे सांस अंदर लें. सांस लेते समय आपका पेट बाहर की ओर फूलेगा और पेट पर रखा हाथ ऊपर उठेगा. छाती पर रखा हाथ लगभग स्थिर रहना चाहिए.
  • फिर होठों को हल्का सिकोड़कर मुंह से धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें. सांस छोड़ते समय पेट अंदर की ओर जाएगा और पेट वाला हाथ नीचे आएगा.
  • इस पूरी प्रक्रिया के दौरान छाती को ज्यादा हिलने न दें. इस अभ्यास को रोज़ 5–10 मिनट करने से सांस लेने की क्षमता और मानसिक शांति दोनों बढ़ती हैं.

पीएम मोदी के पसंदीदा 2 प्राणायाम: ऐसे करें अभ्यास

1. अनुलोम-विलोम -यह शरीर की ऊर्जा प्रणालियों में संतुलन बनाने के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है.

कैसे करें:

  • सुखासन या पद्मासन में बैठें और अपनी आंखें बंद कर लें.
  • दाएं अंगूठे से दाईं नाक (Nostril) को बंद करें और बाईं नाक से गहरी सांस भरें.
  • अब दाईं नाक से सांस छोड़ें.
  • फिर दाईं नाक से सांस लें और बाईं से छोड़ें.
  • फायदा: यह फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है और शरीर के ऑक्सीजन लेवल को बेहतर करता है.

2. भ्रामरी प्राणायाम –पीएम मोदी ने कई बार एकाग्रता बढ़ाने के लिए इसका जिक्र किया है. यह मानसिक शांति के लिए रामबाण है.

कैसे करें:

  • सीधे बैठें और अपनी तर्जनी उंगलियों को कान के छेद पर रखें.
  • एक लंबी गहरी सांस लें.
  • सांस छोड़ते समय मुंह बंद रखें और ‘ऊँ’ का उच्चारण करते हुए मधुमक्खी जैसी भिनभिनाहट की आवाज निकालें.
  • फायदा: यह तुरंत तनाव कम करता है, याददाश्त बढ़ाता है और मन को ‘शांत’ (Calm) करता है.
  • गहरी सांस लेने के 3 स्वर्णिम नियम (Golden Rules)
    लेख के अंत में आप ये टिप्स दे सकते हैं:
  • नाक से ही सांस लें: हमेशा नाक से सांस लें क्योंकि यह हवा को फिल्टर और गर्म करके फेफड़ों तक भेजती है.
  • पेट से सांस लें (Belly Breathing): सांस लेते समय आपका पेट फूलना चाहिए, न कि सिर्फ कंधे ऊपर उठने चाहिए.
  • नियमितता: पीएम मोदी के अनुसार, योग का फल तभी मिलता है जब वह आपकी दिनचर्या का हिस्सा हो.

गहरी सांस लेने के 3 बड़े वैज्ञानिक कारण:

  1. ऑक्सीजन सप्लाई: गहरी सांस से फेफड़ों के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुँचती है, जिससे रक्त शुद्ध होता है और एनर्जी लेवल बढ़ता है.
  2. स्ट्रेस रिलीफ: गहरी सांस लेने से शरीर का ‘पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम’ एक्टिव होता है, जो तुरंत तनाव कम करता है.
  3. डिटॉक्स: शरीर के 70% टॉक्सिन्स (जहरीले तत्व) सांस छोड़ने के जरिए बाहर निकलते हैं.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने अपने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, स…और पढ़ें

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