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मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला मामले में हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. याचिका में 23 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन नमाज पर रोक और केवल सरस्वती पूजा की अनुमति देने की मांग की गई है. हिंदू पक्ष ने ASI के 2003 के आदेश पर सवाल उठाते हुए परिसर में सर्वे कराने की भी मांग की है.
धार/ नई दिल्ली. मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है. हिंदू पक्ष ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दावा किया है कि भोजशाला परिसर में मां वागदेवी यानी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मौजूद है. याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि बसंत पंचमी के दिन हिंदुओं को सरस्वती पूजा से रोका नहीं जाना चाहिए. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग की है. याचिका में 23 जनवरी को होने वाली बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समुदाय की नमाज़ पर रोक लगाने और केवल हिंदू पूजा की अनुमति देने की मांग भी की गई है. अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं. अदालत तय करेगी कि इस याचिका पर तत्काल सुनवाई होगी या नहीं और बसंत पंचमी के दिन को लेकर क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे.
हिंदू पक्ष की ओर से दायर अर्जी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के वर्ष 2003 के आदेश को भी चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया है कि ASI के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यदि बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़े तो पूजा और नमाज़ को लेकर क्या व्यवस्था होगी. इस बार 23 जनवरी को बसंत पंचमी शुक्रवार को ही है. ऐसे में टकराव की स्थिति बन रही है. हिंदू पक्ष का कहना है कि ऐसे हालात में पूजा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाएं. इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से ASI सर्वे और स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की गई है.
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा भोजशाला विवाद
भोजशाला मामले में हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जल्द सुनवाई की मांग की है. यह याचिका हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर की गई है. वकील विष्णु शंकर जैन ने हिंदू पक्ष की तरफ से अदालत में दलीलें रखी हैं.
याचिका में क्या कहा गया है
याचिका में कहा गया है कि भोजशाला परिसर में मां वागदेवी यानी सरस्वती का मंदिर मौजूद है. दावा किया गया है कि इस मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में परमार वंश के राजा द्वारा कराया गया था. याचिका के अनुसार लंबे समय तक यहां हिंदू पूजा होती रही.
ASI के 2003 के आदेश पर सवाल
हिंदू पक्ष ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को याचिका का अहम आधार बनाया है. इस आदेश के तहत पूजा और नमाज़ को लेकर समय और दिन तय किए गए थे. लेकिन याचिका में कहा गया है कि आदेश में विशेष परिस्थितियों का समाधान नहीं किया गया.
ASI के आदेश में तय व्यवस्था
- हर मंगलवार हिंदुओं को पूजा की अनुमति
- बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा की इजाजत
- हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज़ की अनुमति
- बसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ पड़ने की स्थिति स्पष्ट नहीं
23 जनवरी को लेकर क्यों बढ़ी चिंता
इस वर्ष 23 जनवरी को बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ रही है. याचिका में कहा गया है कि इसी वजह से विवाद की स्थिति बन रही है. हिंदू पक्ष का तर्क है कि ASI का आदेश इस स्थिति पर मौन है और इससे कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है.
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई
- 23 जनवरी को नमाज़ पर रोक लगाई जाए
- बसंत पंचमी पर केवल हिंदू पूजा की अनुमति दी जाए
- भोजशाला परिसर में ASI से सर्वे कराया जाए
- ASI और राज्य सरकार को कड़ी सुरक्षा के निर्देश दिए जाएं
ASI सर्वे की मांग क्यों
हिंदू पक्ष का कहना है कि ASI सर्वे से भोजशाला परिसर की ऐतिहासिक और धार्मिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. याचिका में कहा गया है कि इससे लंबे समय से चल रहे विवाद का तथ्यात्मक समाधान निकल सकता है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें