सतना रेलवे यार्ड में एक 16 वर्षीय किशोर आदर्श गौतम ट्रेन छत पर सेल्फी लेते समय ओएचई तार की चपेट में आ गया। 25 हजार वोल्ट करंट से वह गंभीर झुलस गया, उसे रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। घटना से रेलवे यार्ड में सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं।
Publish Date: Mon, 15 Sep 2025 12:09:40 PM (IST)
Updated Date: Mon, 15 Sep 2025 12:15:04 PM (IST)
HighLights
- सेल्फी के लिए ट्रेन छत पर चढ़ना बन गया जानलेवा।
- रेलवे यार्ड में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कमजोर।
- सेल्फी का क्रेज युवाओं को खतरनाक स्थिति में डाल रहा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, सतना। मोबाइल पर सेल्फी का क्रेज रविवार सुबह एक 16 वर्षीय किशोर पर भारी पड़ गया। रेलवे यार्ड में खड़ी मालगाड़ी की छत पर चढ़कर सेल्फी लेने का प्रयास कर रहा किशोर अचानक हाई वोल्टेज ओएचई (ओवरहेड इलेक्ट्रिक) वायर की चपेट में आ गया। हादसे में वह गंभीर रूप से झुलस गया। घटना सुबह करीब 7:20 बजे सतना यार्ड की लाइन नंबर आरडी-06 पर हुई।
किशोर जैसे ही ट्रेन की छत पर चढ़ा, ऊपर से गुजर रहे 25 हजार वोल्ट के तार के संपर्क में आ गया। जोरदार धमाके के साथ वह नीचे गिर पड़ा। तत्काल मौके पर पहुंचे एएसई जयकरण मिश्रा ने एंबुलेंस बुलवाकर उसे जिला अस्पताल भिजवाया।
झुलसे किशोर की पहचान घायल किशोर की पहचान आदर्श गौतम (16 वर्ष) पिता अजय गौतम निवासी उमरी थाना सिविल लाइन, सतना के रूप में हुई है। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत देखते हुए उसे रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। सूचना मिलते ही स्वजन भी अस्पताल पहुंचे और बच्चे की हालत देखकर स्तब्ध रह गए।

रेलवे की लापरवाही या किशोर की गलती?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, किशोर ने सेल्फी लेने के लिए ट्रेन की छत पर चढ़ने जैसी खतरनाक गलती की। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यार्ड क्षेत्र में सुरक्षा प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था भी बेहद ढीली है। सतना रेलवे यार्ड में यह पहली घटना नहीं है। पिछले दो वर्षों में यह तीसरी बार है जब किशोर या युवक ट्रेन की छत पर चढ़कर हाई वोल्टेज तार की चपेट में आए हैं। इसके बावजूद रेलवे सुरक्षा प्रबंधन में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक लापरवाही की कीमत मासूम जिंदगियों को चुकानी पड़ेगी?
सेल्फी से मौत के साये तक
विशेषज्ञ मानते हैं कि 25 हजार वोल्ट की धारा पलभर में जान ले सकती है। ऐसे में रेलवे परिसर में फोटो और सेल्फी लेने का प्रयास सीधे-सीधे जान से खेलने के बराबर है। अब सवाल यह है कि क्या इस घटना से सबक लेकर किशोर और अभिभावक सतर्क होंगे या फिर यह खतरनाक जुनून आगे भी जिंदगियां लीलता रहेगा?
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