फाल्गुन मास के तीज-त्योहार: 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर लगाएं चंदन, 16 फरवरी को करें पितरों के लिए धूप-ध्यान


आज 2 फरवरी से हिन्दी पंचांग का अंतिम महीना फाल्गुन शुरू हो गया है। ये महीना धर्म-कर्म के नजरिए से बहुत खास है। इस महीने में महाशिवरात्रि और होली जैसे बड़े व्रत-पर्व मनाए जाते हैं। जानिए फाल्गुन मास के व्रत-पर्वों पर कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं… इस दिन भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए व्रत और पूजा करने का विशेष महत्व है। इस व्रत से जीवन की बाधाएं दूर हो सकती हैं। भगवान गणपति को दूर्वा और मोदक खासतौर पर अर्पित करना चाहिए। विजया एकादशी व्रत शत्रुओं पर विजय और रुके हुए कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। पूजा में ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। इस दिन सूर्य मकर से कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। ज्योतिष में सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। इस दिन नदी स्नान और सूर्य पूजा करने की परंपरा है। फाल्गुन मास का सबसे बड़ा पर्व है महाशिवरात्रि। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। इस दिन महादेव और देवी पार्वती की विशेष पूजा करनी चाहिए। भक्त रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण भी करते हैं। इस अमावस्या पर पितर देवताओं के लिए तर्पण और दान-पुण्य करना चाहिए। इस दिन पितरों के नाम से जल, तिल और अन्न का दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। जरूरतमंदों को भोजन कराना भी शुभ फल देता है। मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान गणेश की पूजा करने से बुद्धि, विवेक और सौभाग्य मिलता है। जो लोग कोई नया कार्य शुरू करना चाहते हैं, वे इस दिन कर सकते हैं। इस तिथि पर आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा की जाती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करें। इस दिन आंवले का दान, सेवन और वृक्ष की परिक्रमा की जाती है। फाल्गुन की अंतिम तिथि यानी पूर्णिमा की रात होलिका दहन होगा। इस त्योहार पर होलिका पूजन करके जलती हुई होली में नारियल, गेहूं की बालियां अर्पित की जाती हैं। होलिका दहन के बाद अगले दिन होली खेली जाती है। इस दिन शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल चढ़ाना चाहिए। अपने इष्टदेव को अबीर-गुलाल अर्पित करें। इस दिन श्रीकृष्ण की विशेष पूजा करने की भी परंपरा है। फाल्गुन मास में करें ये शुभ काम इस महीने भगवान श्रीकृष्ण और शिव की पूजा खासतौर पर की जाती है। घी, तिल, सरसों का तेल और मौसमी फलों का दान करना चाहिए। इस महीने में मौसम परिवर्तन होता है, शीत ऋतु खत्म होती है, गर्मी बढ़ने लगती है, ऐसे में खान-पान को लेकर अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए। दैनिक जीवन में नियम-संयम का पालन करना चाहिए। किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। अगर संभव हो सके तो श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा, वृंदावन, गोकुल, गोवर्धन पर्वत, बरसान की यात्रा कर सकते हैं। इन दिनों में यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। .

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