‘सचल रथ’ पर दौड़ते शिक्षक, शिक्षा का जुनून है ताकत, आदिवासी बच्चों की तकदीर बदलने का मिशन

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Teacher Ranjeet Lodhi Success Story: सागर में एक सरकारी शिक्षक हजारों लोगों के लिए मिसाल बने हुए हैं दिव्यांग होने के बावजूद वे शिक्षा की ऐसी अलख जगा रहे है कि उनके जुनून और जज्बे को देखकर हर कोई सलाम करता है.

Teacher Ranjeet Lodhi Success Story: सागर में एक सरकारी शिक्षक हजारों लोगों के लिए मिसाल बने हुए हैं दिव्यांग होने के बावजूद वे शिक्षा की ऐसी अलख जगा रहे है कि उनके जुनून और जज्बे को देखकर हर कोई सलाम करता है. एक तरफ जहां वह पिछड़े ग्रामीण और आदिवासी आंचल जैसे इलाके में हर साल अपने स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ा रहे हैं तो दूसरी तरफ वह अपने आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांव गांव जाकर चौपाल लगाते हैं. लोगों की समस्या सुनकर उन्हें समाधान पाने का रास्ता बताते हैं. और इसके प्रति ना भाई कभी छुट्टी का दिन देखते हैं ना रात का समय जब भी किसी को मदद की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी सचल रथ से दौड़े चले जाते हैं.

सागर और ललितपुर जिले की बॉर्डर पर स्थित सेसई गांव के रंजीत लोधी बचपन से ही एक पैर से कमजोर है लेकिन उन्होंने अपनी इस कमजोरी को ही ताकत बनाया और पढ़ाई लिखाई में खूब मेहनत की वह अपने परिवार से सरकारी नौकरी पाने वाले पहले सदस्य बने. वह पिछले कई साल से टीचर है और इस दौरान जिलेभर के अलग-अलग स्कूल में सेवाएं दी. लेकिन पिछले 5 साल से बंडा तहसील के शासकीय हाई स्कूल पथरिया गौड़ में पदस्थ हैं. यहां पर नवी और दसवीं की कक्षाएं ही लगते हैं लेकिन रंजीत लोधी इसके बाद भी बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं कि उन्हें ट्वेल्थ तक और फिर इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई कैसी करनी है वह पुलिस आर्मी अग्निवीर मैं किस तरह से तैयारी कर सकते हैं.

दिव्यांग गाड़ी का सचल रथ नाम रखा
रंजीत लोधी ने अपनी दिव्यांग गाड़ी को सचल रथ का नाम दे रखा है. छुट्टी वाले दिन वह अपने संकुल के 7 गांव मैं दौरा करने जाते हैं. इस दौरान लोगों को पता होता है कि शिक्षक रंजीत कब आएंगे और उनसे संबंधी कोई काम है तो वह किस दिन कहां मिलेंगे. इसके साथ-साथ उनके स्कूल में बच्चों की संख्या कैसे बढ़ेगी वह इस पर भी काम करते हैं, बच्चों के अभिभावकों को समझते हैं पढ़ाई का महत्व बताते हैं ताकि बच्चे बीच में पढ़ाई ना छोड़े, यही वजह है कि आज उनकी मात्र दो क्लास में डेढ़ सौ से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं और जब वह आए थे उसे समय यह संख्या आधे से भी कम थी.

.आदिवासी अंचल वाले इस क्षेत्र में रंजीत लोधी के द्वारा किए जा रहे प्रयास अब परिणाम में बदलने लगे हैं उनके द्वारा पढ़ाये गए करीब आधा दर्जन बच्चों का अग्निवीर और सेना जैसे क्षेत्र में सिलेक्शन हुआ है. इसके अलावा पॉलिटेक्निक कॉलेज में एडमिशन लेकर बच्चे फैशन डिजाइनिंग जैसी कोर्स इन्हीं की प्रेरणा से कर रहे हैं सेंट्रल यूनिवर्सिटी में भी एक बच्ची बी फार्मा कर रही है.

रंजीत लोधी ऐसे शिक्षक है जो गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को पढ़ने में मदद करने के लिए अपनी जेब से फीस के साथ-साथ किताबें भी उपलब्ध कराते हैं उनका कहना है कि किसी भी बच्चे को आर्थिक समस्या की वजह से पढ़ाई में बाधा नहीं आनी चाहिए उन्होंने भी गरीबी देखी है और जिस तरह उन्होंने संघर्ष किया है वह दूसरे इस तरह बच्चों को देखते हैं तो अपने बचपन की याद आ जाती है. इसलिए सुविधाओं के अभाव में कोई बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

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