मार्च में ऐसे करें अपराजिता की देखभाल, पूरी गर्मी फूलों से लदी रहेगी बेल

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Aparajita Flower Gardening Tips: नीले-सफेद फूलों वाली अपराजिता की बेल घर और बालकनी की खूबसूरती बढ़ाती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है. गर्मियों में बेल कमजोर पड़ सकती है और फूल कम आने लगते हैं, लेकिन मार्च में सही देखभाल से यह पूरी गर्मी फूलों से लदी रह सकती है. समय पर हार्ड या सॉफ्ट प्रूनिंग, रूट प्रूनिंग, मिट्टी बदलना और उपजाऊ मिट्टी में जैविक खाद डालना जरूरी है. सही सिंचाई, हल्का शाम का शॉवर, पर्याप्त धूप और पोषण देने से नई शाखाएं निकलती हैं, फूलों की संख्या बढ़ती है और बेल लंबे समय तक हरी-भरी, घनी और आकर्षक बनी रहती है.

नीले और सफेद रंग के सुंदर फूलों से सजी अपराजिता की बेल घर-आंगन और बालकनी की खूबसूरती बढ़ाने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी मानी जाती है. कई लोग इसे सजावटी पौधे के रूप में लगाते हैं, लेकिन गर्मियों की शुरुआत होते ही कई बार यह बेल कमजोर पड़ने लगती है और उसमें फूल आना कम हो जाते हैं. अगर मार्च में इस पौधे की सही देखभाल की जाए, तो पूरी गर्मी बेल फूलों से लदी रह सकती है. समय पर प्रूनिंग, मिट्टी का सुधार, सही सिंचाई और पोषण देने से पौधे को नई ऊर्जा मिलती है और इसमें तेजी से नई शाखाएं विकसित होती हैं, जिससे फूलों की संख्या बढ़ती है और पौधा लंबे समय तक हरा-भरा रहता है.

मार्च का समय अपराजिता की बेल के कायाकल्प के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है. इस समय पौधे की हार्ड प्रूनिंग या सॉफ्ट प्रूनिंग जरूर करनी चाहिए. बेल में मौजूद पुरानी, सूखी या पीली पड़ चुकी टहनियों को काट देने से पौधे को नई ऊर्जा मिलती है और वहीं से नई शाखाएं निकलने लगती हैं. जब पौधे में नई शाखाओं की संख्या बढ़ती है, तो फूलों की संख्या भी अपने-आप ज्यादा होने लगती है. इसके अलावा, अगर पौधा लंबे समय से एक ही गमले में लगा हुआ है और उसकी जड़ें बहुत फैल गई हैं, तो रूट प्रूनिंग भी की जा सकती है. इससे जड़ों को फिर से सांस लेने की जगह मिलती है और पौधा तेजी से विकसित होने लगता है.

अगर अपराजिता की बेल एक या दो साल पुरानी हो चुकी है और गमले में लगी है, तो उसकी मिट्टी बदलना बेहद जरूरी माना जाता है. लंबे समय तक एक ही मिट्टी में रहने से उसमें मौजूद पोषक तत्व धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं और मिट्टी सख्त भी हो जाती है. ऐसे में पौधे की बढ़वार रुकने लगती है और फूलों की संख्या भी कम हो जाती है. गमले की ऊपरी दो से तीन इंच मिट्टी को सावधानी से निकालकर उसकी जगह नई और उपजाऊ मिट्टी भरनी चाहिए. इस नई मिट्टी में जैविक खाद मिलाने से पौधे की जड़ों को भरपूर पोषण मिलता है और पौधा फिर से तेजी से बढ़ने लगता है, जिससे गर्मियों में बेल घनी और आकर्षक दिखाई देती है.

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गर्मियों में अपराजिता की बेल को नमी पसंद होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी देना नुकसानदायक है. सिंचाई केवल तभी करनी चाहिए जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी हो. लगातार अधिक पानी देने से जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधा कमजोर पड़ता है. गर्मियों में शाम के समय स्प्रे बोतल से पत्तियों पर हल्का शावर करें. इससे धूल साफ होती है, पौधा हाइड्रेटेड रहता है और कलियों के गिरने की समस्या कम होती है. यह उपाय बेल की ताजगी और फूलों की संख्या लंबे समय तक बनाए रखता है.

अपराजिता की बेल को अच्छी वृद्धि और अधिक फूलों के लिए पर्याप्त धूप और सही पोषण जरूरी है. यह पौधा दिन में कम से कम पांच-छह घंटे सीधी धूप पसंद करता है. पूरी छाया में रखने पर बेल बढ़ेगी, लेकिन फूल कम होंगे. मिट्टी तैयार करते समय रेत और वर्मीकंपोस्ट का सही अनुपात रखें ताकि पानी का निकास अच्छा रहे. रिपोटिंग में ह्यूमिक एसिड मिलाने से जड़ों को पोषण मिलता है. महीने में एक बार गोबर की खाद या सरसों की खली वाला लिक्विड फर्टिलाइजर देने से फूल बढ़ते हैं और बेल घनी व आकर्षक बनती है.

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