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Japan Election India-China Effect: जापान में साने ताकाइची की ऐतिहासिक जीत एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव है. दो-तिहाई बहुमत से मजबूत सरकार बनने से जापान की विदेश और सुरक्षा नीति और सख्त होगी, जिससे चीन पर दबाव बढ़ेगा. पूर्वी एशिया में चीन की आक्रामक रणनीति को चुनौती मिलेगी. वहीं भारत के लिए यह जीत फायदेमंद है.
जापान में तकाइची की जीत से बेचैन चीन.
जापान के आम चुनाव में प्रधानमंत्री साने ताकाइची की ऐतिहासिक जीत केवल जापान का सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि एशिया की राजनीति में एक बड़ा मोड़ भी मानी जा रही है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी जापानी प्रधानमंत्री को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिला है. यह जनादेश न सिर्फ जापान की घरेलू राजनीति को मजबूत करता है, बल्कि चीन के लिए रणनीतिक झटका और भारत के लिए बड़ा अवसर भी लेकर आता है.
ताकाइची की जीत से चीन सबसे ज्यादा असहज स्थिति में दिखेगा. अब तक जापान की राजनीति गठबंधन मजबूरियों और कमजोर बहुमत के कारण सीमित फैसले लेती रही थी. लेकिन दो-तिहाई बहुमत के साथ ताकाइची सरकार को संविधान संशोधन, रक्षा बजट बढ़ाने और सुरक्षा नीति को सख्त करने की खुली छूट मिल गई है.
यह वही मुद्दे हैं जिनसे चीन सबसे ज्यादा चिंतित रहता है.
क्यों चीन को नहीं पचेगी तकाइची की जीत?
दरअसल तकाइची जापान में दक्षिणपंथी नेता हैं और उनके अजेंडे में ही चीन और ताइवान का मसला है. पूर्वी चीन सागर, ताइवान हार्बर और सेनकाकू द्वीपों को लेकर जापान-चीन तनाव पहले से मौजूद है. ताकाइची का नेतृत्व चीन के खिलाफ स्पष्ट, सख्त और बिना झिझक वाला रुख अपनाने के लिए जाना जाता है. मजबूत सरकार अब बीजिंग के दबाव में आए बिना फैसले ले सकती है. इसका सीधा असर चीन की उस रणनीति पर पड़ेगा जिसमें वह एशिया में कमजोर और बंटे हुए लोकतंत्रों का फायदा उठाता रहा है. इसके अलावा जापान की आक्रामक फिस्कल और निवेश नीति का मतलब है- रक्षा उत्पादन, टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक सहयोग में तेजी आना. यह चीन के क्षेत्रीय वर्चस्व के सपने को कमजोर करता है.
एशिया की राजनीति में शक्ति संतुलन बदलेगा
ताकाइची की जीत के बाद जापान अब केवल आर्थिक महाशक्ति नहीं, बल्कि खुलकर रणनीतिक शक्ति के रूप में उभरेगा. अमेरिका के साथ सुरक्षा गठबंधन और मजबूत होगा, जिससे चीन पर दबाव और बढ़ेगा. दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ताइवान जैसे देश भी जापान को पहले से ज्यादा भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखेंगे. इसका मतलब साफ है- चीन अब एशिया में मनमानी नहीं कर पाएगा. उसे हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा.
भारत के लिए क्यों फायदेमंद है तकाइची की जीत?
- भारत के लिए ताकाइची की जीत रणनीतिक वरदान की तरह है. भारत-जापान रिश्ते पहले से ही विशेष और वैश्विक साझेदारी के स्तर पर हैं, लेकिन अब उन्हें नई गति मिलने की संभावना है.
- पहला फायदा इंडो-पैसिफिक रणनीति में दिखेगा. भारत- जापान दोनों ही चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के पक्षधर हैं. मजबूत जापानी सरकार के साथ भारत को सुरक्षा सहयोग, नौसैनिक अभ्यास और खुफिया साझेदारी में ज्यादा मजबूती मिलेगी.
- दूसरा फायदा आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में है. ताकाइची की आक्रामक फिस्कल नीति विदेशों में रणनीतिक निवेश को बढ़ावा देती है. भारत में रेलवे, सेमीकंडक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में जापानी निवेश बढ़ सकता है.
- तीसरा फायदा क्वाड (Quad) को लेकर है. अमेरिका-जापान-भारत-ऑस्ट्रेलिया का यह समूह अब पहले से ज्यादा प्रभावी हो सकता है क्योंकि जापान की राजनीतिक स्थिरता क्वाड को निर्णय लेने में मजबूती देगी.
जापान में प्रधानमंत्री साने ताकाइची की ऐतिहासिक जीत ने एशिया की राजनीति में साफ संदेश दे दिया है कि जापान अब कमजोर और रक्षात्मक भूमिका में नहीं रहेगा. चीन के लिए यह चेतावनी है कि उसके विस्तारवादी इरादों को अब सख्त जवाब मिलेगा. वहीं भारत के लिए यह मौका है कि वह जापान के साथ मिलकर सुरक्षा, विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के नए अध्याय लिखे. यह जीत सिर्फ चुनावी आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि एशिया के भविष्य की दिशा तय करने वाला मोड़ है.
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें
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