विदिशा में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के दूसरे समाधि दिवस के अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज ने एक विशेष अभियान चलाया। इस दौरान, स्वर्णप्राशन संस्कार का दूसरा चरण स्टेशन जैन मंदिर परिसर के बाहर आयोजित किया गया। देर शाम तक लगभग 6 हजार बच्चों को निःशुल्क स्वर्णप्राशन आयुर्वेदिक औषधि पिलाई गई। इस अभियान का पहला चरण 8 जनवरी को आयोजित किया गया था, जिसमें जिला प्रशासन के सहयोग से जिले के स्कूलों और आंगनवाड़ियों के माध्यम से 50 हजार 600 बच्चों को स्वर्णप्राशन कराया गया था। यह आयुर्वेदिक औषधि 0 से 16 वर्ष तक के बच्चों को पुष्य नक्षत्र के शुभ अवसर पर दी जाती है। निर्यापक श्रवण मुनि श्री संभवसागर जी महाराज ने स्वर्णप्राशन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत ऋषि-मुनियों की भूमि है और आयुर्वेद भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। मुनि श्री के अनुसार, स्वर्णप्राशन से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, स्मरण शक्ति तेज होती है और शारीरिक व मानसिक विकास बेहतर होता है। सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष शैलेंद्र चौधरी ने बताया कि समाज का उद्देश्य आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को घर-घर तक पहुंचाना है। इसका लक्ष्य आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और सशक्त बनाना है। अभियान के संयोजक संजय सेठ ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने हमेशा भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद को बढ़ावा दिया। उनके “इंडिया नहीं, भारत बोलो” संदेश से प्रेरित होकर समाज आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने का यह प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि रवि पुष्य नक्षत्र के संयोग में दी गई औषधि अधिक प्रभावी मानी जाती है। सुबह से शाम तक चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्वर्णप्राशन संस्कार कराया। .