6 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
स्वामी विवेकानंद से जुड़ा किस्सा है। वे विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे थे। उनका मुख्य उद्देश्य खुद के लिए कुछ पाना नहीं था, बल्कि वे पूरे विश्व के कल्याण का मार्ग खोजना चाहते थे। यात्रा पर जाने से पहले वे अपनी गुरु मां शारदा देवी से आशीर्वाद लेने पहुंचे।
विवेकानंद जी ने मां शारदा से कहा कि मां, मैं संसार के दुखों को दूर करना चाहता हूं। मैं एक बड़ी यात्रा पर जा रहा हूं। आप मुझे ऐसा आशीर्वाद दीजिए, जो विश्व कल्याण के मेरे उद्देश्य में काम आ सके।
मां शारदा उस समय रसोई में काम कर रही थीं। विवेकानंद की बात सुनकर वे मुस्कराईं और थोड़ी देर के लिए मौन रहीं। फिर उन्होंने पास रखे एक चाकू की ओर इशारा करते हुए कहा कि नरेन, वह चाकू मुझे उठाकर दो।
विवेकानंद जी ने बिना कुछ पूछे, तुरंत चाकू उठाया। उन्होंने चाकू के धार वाले हिस्से को अपनी ओर रखा और हत्थे की ओर से मां शारदा को सौंप दिया, ताकि उन्हें किसी प्रकार की चोट न लगे।
मां शारदा ने चाकू लिया और विवेकानंद से बोलीं कि मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है। अब मैं निश्चिंत हूं कि तुम संसार की सच्ची सेवा अवश्य करोगे।
विवेकानंद आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने पूछा कि मां, मैंने तो केवल एक चाकू उठाकर आपको दिया है। इस छोटे-से कार्य से आपने कैसे जान लिया कि मैं संसार की सेवा कर पाऊंगा?
मां शारदा ने प्रेमपूर्वक उत्तर दिया कि बेटा, तुमने जिस ढंग से मुझे चाकू दिया, उससे ही मैं समझ गई। तुमने धार अपनी ओर रखी और हत्था मेरी ओर, इसका अर्थ ये है कि तुम कष्ट अपने ऊपर लोगे, लेकिन किसी और को तकलीफ नहीं होने दोगे। यही भाव सच्ची सेवा का आधार है। जो व्यक्ति अपने सुख-दुख से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई के लिए जीता है, वही ईश्वर का सच्चा सेवक है।
स्वामी विवेकानंद की सीख
- सेवा का अर्थ त्याग है
सेवा करने का अर्थ सिर्फ मदद करना नहीं है, बल्कि स्वयं के आराम को छोड़कर रखकर दूसरों के सुख के लिए काम करना है। एक अच्छा इंसान, प्रबंधक औरपर नेता वही है, जो अपनी टीम की जरूरतों को पहले देखता है।
- जीवन में संवेदनशीलता जरूरी है
विवेकानंद का कार्य केवल विचारों का प्रचार करना नहीं था, बल्कि संवेदनाओं का प्रसार करना था। जो व्यक्ति दूसरों की भावनाओं को समझता है, वही सही निर्णय ले सकता है। हमारे जीवन में दूसरों के लिए संवेदनाएं होनी चाहिए, तभी हमें भी सुख-शांति मिल सकती है।
- छोटी-छोटी बातों पर भी ध्यान दें
महानता बड़े कार्यों से नहीं आती, बल्कि रोज के छोटे-छोटे कामों से आती है। जैसे दूसरों के साथ सम्मानपूर्वक बात करना, दूसरों की सुरक्षा और सुख-दुख का ध्यान रखना।
- बुरी इच्छाओं पर नियंत्रण रखें
जब हम अपनी गलत इच्छाओं और अहकार को नियंत्रित कर लेते हैं, तब हम दूसरों के लिए उपयोगी बन जाते हैं। यही आत्मनियंत्रण जीवन में सुख-शांति पाने के लिए जरूरी है।
चाहे व्यवसाय हो, परिवार या समाज, जो व्यक्ति दूसरों की सुरक्षा, सुख और सम्मान को प्राथमिकता देता है, वही सफलता के साथ मान-सम्मान पाता है।
.