सागर में छठ पर नहीं दिखे सूर्यदेव, महिलाएं बोलीं- 20 साल में ऐसा पहली बार हुआ

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Sagar News: व्रत रखने वालीं नंदिनी ने लोकल 18 को बताया कि वह सागर में पिछले 20 साल से छठी मैया के इस व्रत को करती आ रही हैं लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब डूबते सूर्य के दर्शन नहीं हुए. भगवान के प्रति श्रद्धा और आस्था है. उनका प्रकाश यहां पर है, इसलिए हम लोगों ने सूर्यास्त के तय समयानुसार अर्घ्य दिया.

सागर. पूरे देश में लोक आस्था का महापर्व छठ बड़े ही उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. पूर्वांचल में प्रमुख रूप से मनाए जाने वाला यह पर्व अब बुंदेलखंड के सागर में भी दिखाई देने लगा है. कार्तिक षष्ठी को छठी मैया का पूजन करने के लिए सागर में श्रद्धालुओं में अलग ही उत्साह दिखाई दिया लेकिन व्रत करने वाली महिलाओं के साथ पिछले 20 सालों में ऐसा पहली बार हुआ, जब उन्हें डूबते हुए सूर्य देव के दर्शन नहीं हुए और उन्हें ज्योतिष समय के अनुसार अर्घ्य देना पड़ा. पूजन के बाद सभी ने छठी मैया से मनोवांछित फल की प्राप्ति को लेकर कामना की.

सागर की लाखा बंजारा झील के किनारे विट्ठल घाट पर पहली बार शहर के सभी व्रती महिलाएं पहुंचीं, तो उनके साथ में परिवार के लोग भी इस पर्व के साक्षी रहे. बिहार और पूर्वांचल के लोगों द्वारा मनाए जा रहे इस उत्सव में शामिल होने और देखने के लिए शहर के लोग भी सैकड़ों की संख्या में यहां पर पहुंचे थे, जिन्होंने छठी मैया के पूजन को देखा और उनको प्रणाम किया.

20 साल में पहली बार ऐसा हुआ
लाखा बंजारा झील में महिलाओं ने फल-फूल और मिठाई से अर्घ्य दिया. इसके बाद यहां पर प्रसाद का वितरण किया गया और जमकर आतिशबाजी हुई. व्रत रखने वालीं नंदिनी देवी ने लोकल 18 को बताया कि वह सागर में पिछले 20 साल से छठी मैया के व्रत को करती आ रही हैं लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब डूबते हुए सूर्य के दर्शन नहीं हुए. भगवान के प्रति आस्था और श्रद्धा है. उनका प्रकाश यहां पर है, इसलिए हम लोगों ने समय के अनुसार इसको मनाया.

द्रौपदी ने रखा था यह व्रत
पूर्वांचल के शशिकांत सिंह ने कहा कि संतान प्राप्ति, संतान की लंबी आयु और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना को लेकर यह व्रत किया जाता है. इस व्रत का बड़ा महत्व होता है. यह काफी कठिन व्रत है. मान्यता है कि महाभारत काल में द्रौपदी ने इस व्रत को किया था. सूर्य की दो पत्नी हैं उषा और प्रत्यूषा, दोनों की आराधना की जाती है. छठ पर्व पर डूबते हुए सूर्य की आराधना करना अपने आप में अनूठा है. इस बार यहां पर सूर्य दिखाई नहीं दिए लेकिन दूसरी जगह पर दिखाई दिए हैं. भौगोलिक स्थिति की वजह से ऐसा हुआ है लेकिन अगर मन में आस्था है, तो डूबते हुए सूर्य की कल्पना करते हुए महिलाओं ने अर्घ्य दिया और भगवान उसको स्वीकार भी करते हैं, ऐसी हम लोगों में मान्यता है.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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