रामपुर: जैसे ही सर्दियों का मौसम दस्तक देता है, रामपुर की गलियों और बाजारों में एक अलग ही माहौल बन जाता है. ठंड बढ़ते ही देसी घी, दूध और मेवों से बनी एक खास मिठाई की खुशबू पूरे शहर में फैलने लगती है. यह खुशबू रामपुर के मशहूर हब्शी हलवे ( Rampur Famous Habshi Halwa) की होती है. यह कोई आम हलवा नहीं है, बल्कि वह पारंपरिक मिठाई है, जिसे नवाबी दौर में खासतौर पर सर्दियों के लिए तैयार किया गया था. आज भी ठंड के मौसम में इसकी मांग अपने आप बढ़ जाती है और लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं.
रामपुर का हब्शी हलवा सिर्फ स्वाद के लिए नहीं बनाया गया था, बल्कि इसके पीछे सेहत का बड़ा मकसद छिपा हुआ था. नवाबी दौर में खानपान को दवा की तरह देखा जाता था. उस समय यह माना जाता था कि अगर शरीर को सही और पौष्टिक भोजन मिले, तो कई बीमारियां अपने आप दूर रहती हैं. खासकर सर्दियों में, जब ठंड का असर शरीर पर ज्यादा पड़ता है, तब ऐसे पकवान चुने जाते थे जो शरीर को अंदर से गर्म रखें और ताकत दें. हब्शी हलवा भी इसी सोच का नतीजा था.
नवाबी दौर से जुड़ा है हब्शी हलवे का इतिहास
हब्शी हलवे का इतिहास नवाबी दौर से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि नवाब हामिद अली खान के समय अफ्रीका से एक हकीम को रामपुर बुलाया गया था. नवाब ने हकीम से ऐसा पकवान बनाने को कहा था, जो सर्दियों में शरीर को ताकत दे, ठंड से बचाए और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखे. इसके बाद हकीम ने जड़ी-बूटियों, दूध, देसी घी और अलग-अलग तरह के मेवों को मिलाकर एक खास हलवा तैयार किया. जब नवाब ने इस हलवे को चखा, तो वह इसके स्वाद और असर दोनों से बेहद प्रभावित हुए. तभी से इस हलवे को हब्शी हलवा कहा जाने लगा.
हलवे को खाने का भी था खास तरीका
नवाबी दौर में हब्शी हलवा किसी आम मिठाई की तरह नहीं खाया जाता था. इसे खाने का समय और तरीका भी तय होता था. सर्दियों में इसे या तो सुबह नाश्ते में दिया जाता था या फिर रात के खाने के बाद परोसा जाता था. माना जाता था कि इससे शरीर को अंदर से गर्मी मिलती है, कमजोरी दूर होती है और ठंड का असर कम हो जाता है. यही वजह थी कि सर्दियों में यह हलवा नवाबों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया था.
नवाबों की रसोई से आम लोगों तक पहुंचा स्वाद
जो हब्शी हलवा कभी सिर्फ नवाबों की रसोई तक सीमित था, आज वही मिठाई आम लोगों की पहुंच में है. रामपुर के लगभग हर इलाके में इसकी दुकानें मिल जाती हैं. बाहर से आने वाले पर्यटक भी इसे रामपुर की खास पहचान मानते हैं और बिना चखे वापस नहीं जाते. स्वाद, सेहत और इतिहास का यह अनोखा संगम हब्शी हलवे को आज भी सर्दियों की सबसे खास मिठाई बनाए हुए है.