ऐसा डिजाइनर राइस जो शुगर पर लगाएगा लगाम, CSIR के वैज्ञानिकों ने चावल को ही बना दिया दवा

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Anti-Diabetic Rice: डायबिटीज होते ही सबसे पहले लोग कहते हैं कि चावल खाना बंद करो. डॉक्टर भी कहते हैं कि चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है जिसकी वजह से यह शरीर में शुगर स्पाइक को तेजी से बढ़ा देता है. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस समस्या का एक क्रांतिकारी समाधान खोज निकाला है. CSIR (वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ‘डिजाइनर राइस’ तैयार किया है, जो खाने में साधारण चावल जैसा है, लेकिन शरीर में जाते ही किसी दवा की तरह काम करता है.

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वैज्ञानिकों ने चावल को रिमॉडिफाई कर दिया. AI Photo

Anti-Diabetic Rice: भारत डायबिटीज बीमारी की वैश्विक राजधानी है. यहां 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को डायबिटीज है. वहीं कितने तो ऐसे हैं जिन्हें डायबिटीज है लेकिन उन्हें पता ही नहीं कि उनके शरीर में किस तरह का धीमा जहर पनप रहा है. डायबिटीज को खान-पान से कंट्रोल किया जा सकता है. इसमें सबसे पहले चावल, आलू को त्याग करने के लिए कहा जाता है लेकिन भारत में चावल के बगैर रहना कोई पसंद नहीं करता. इसलिए चावल खाते ही है. ऐसे लोगों के लिए सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने चावल में ही ऐसा जुगाड़ कर दिया है कि इस चावल शुगर बढ़ने का खतरा तो नहीं ही होगा साथ ही इसमें प्रोटीन की भी कोई कमी नहीं होगी.

स्टार्च को निकालकर भर दिया प्रोटीन
तिरुवनंतपुरम स्थित सीएसआईआर और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरडिसिप्लिनरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने सामान्य चावल की संरचना को ही बदल दिया. आमतौर पर चावल में विटामिन ऊपर से छिड़के जाते हैं, लेकिन इस तकनीक में चावल के मूल ढांचे को ही बदल दिया गया है. सबसे पहले वैज्ञानिकों ने चावल को उसके बुनियादी हिस्सों जैसे स्टार्च, प्रोटीन और फाइबर को तोड़कर अलग कर दिया. फिर इन्हें सही मात्रा में दोबारा से इस तरह से जोड़ा कि इसमें स्टार्च की मात्रा कम हो गई और इसकी जगह प्रोटीन की मात्रा बढ़ गई. इसके साथ ही इसमें माइक्रोन्यूट्रेंट्स के तत्व डाले गए.

इसमें स्वाद तो वही रहता है लेकिन पोषण पूरी तरह बदल जाता है. सीएसआईआर-एनआईआईएसटी के डायरेक्टर सी आनंदरामकृष्णन ने बताया कि यह ठीक घर को दोबारा से बनाने की प्रक्रिया जैसी है. चूंकि रेगुलर चावल में स्टार्च की मात्रा ज्यादा होती है और यही डायबिटीज मरीजों के लिए नुकसानदेह है. इसलिए हमने इसमें से स्टार्च को निकाल लिया और इसकी जगह प्रोटीन और माइक्रोन्यूट्रेंट्स की संरचना में बदल दिया. महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें हमने जीन को नहीं बदला बल्कि फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी का सहारा लिया. इससे चावल के पोषण की संरचना को दोबारा से व्यवस्थित किया गया.

दवा की तरह शरीर को हेल्दी बनाता
सीएसआईआर ने एक्स पर इसके बारे में रिपोर्ट शेयर किया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक यह डिजाइनर चावल सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि दवा की तरह शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है.सबसे अच्छी बात यह है कि इस चावल का स्वाद और इसे पकाने का तरीका बिल्कुल वैसा ही है जैसा हम रोज खाते हैं, लेकिन यह अंदर से कहीं ज्यादा ताकतवर है. यह चावल खास तौर पर मेटाबॉलिक समस्याओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यह ऐसा अनाज नहीं है जिसके ऊपर बस विटामिन और खनिजों का छिड़काव किया गया हो बल्कि यह हमारे सबसे बुनियादी भोजन के ढांचे को पूरी तरह से फिर से तैयार करना है. इस रिसर्च को अंजाम देने वाले प्रमुख वैज्ञानिक और सीएसआईआर-एनआईआईएसटी के डायरेक्टर डॉ. सी. आनंदरामकृष्णन ने बताया कि इसे भोजन की वास्तुकला के रूप में समझें. आप इसे इस तरह भी समझ सकते हैं.

यदि आप वर्तमान में जो चावल खा रहे हैं अगर वह चीनी की ईंटों (स्टार्च) से बना एक घर है, तो CSIR-NIIST की टीम ने उस घर के हिस्से अलग कर दिए. उन्होंने स्टार्च का एक बड़ा हिस्सा हटा दिया और उसकी जगह प्रोटीन के बीम लगा दिए. जेनेटिक मॉडिफिकेशन के बजाय फूड-प्रोसेसिंग तकनीक का उपयोग करते हुए, टीम ने टूटा हुआ चावल लिया. वह हिस्सा जो आमतौर पर कम कीमत पर बिकता है. उन्होंने उसे पीसकर आटा बनाया और उसमें प्रोटीन के साथ-साथ आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाए. फिर उन्होंने इस मिश्रण को वापस उन दानों का आकार दे दिया, जो दिखने, महसूस होने और स्वाद में बिल्कुल वैसे ही हैं जैसा चावल हम जानते हैं.

कई संकटों का एक साथ समाधान
भारत एक तरफ डायबिटीज कैपिटल ऑफ वर्ल्ड है तो दूसरी तरफ भारत के लोगों को पौष्टिक भोजन नहीं मिलता. इस तरह यहां के लोग हिडेन हंगर से जूझ रहे हैं. चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज्यादा होता है और चावल मुख्य भोजन है. इस कारण ब्लड शुगर खतरनाकर स्तर को पार कर जाता है. यह ‘डिजाइनर चावल’ इन दोनों समस्याओं पर एक साथ वार करता है. इसका जीआई 55 से कम होता है. यह शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा छोड़ता है, जिससे शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए बड़ी राहत है. वहीं यह प्रोटीन का पावरहाउस है. साधारण चावल में केवल 6–8% प्रोटीन होता है, इस वर्जन में 20% से ज्यादा प्रोटीन है. यह सीधे दाने के अंदर आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 को शामिल कर एनीमिया (खून की कमी) जैसी समस्या को दूर करता है. डॉ. आनंदरामकृष्णन कहते हैं, ज्यादा प्रोटीन होने के कारण इसका स्वाद साधारण चावल से भी बेहतर है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए लोगों को अपनी संस्कृति बदलने की जरूरत नहीं है. आपको महंगे क्विनोआ या सलाद पर शिफ्ट होने की जरूरत नहीं है. आप वही चावल खाते रह सकते हैं जिसे आप पसंद करते हैं, बस अब उसमें तीन गुना ज्यादा पोषण होगा.

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Lakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने अपने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, स…और पढ़ें

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