Last Updated:
Success Story: सफलता रातोंरात नहीं मिलती है बल्कि उसके लिए मेहनत करनी पड़ती है. सोचिए दो छोटी लड़कियों जो अपना खुद का बिजनेस करना चाहती थी उनपर दुकानदार हंसते थे और धीरे-धीरे उन्होंने ऐसा कमाल कर दिया जिससे सबकी बोलती ही बंद हो गई.
बेंगलुरु की दो बहनों ने ऐसा कमाल कर दिखाया जिससे आज लाखों लोगों की जिंदगी को स्वस्थ बना दिया है. सुहासिनी और अनिंदिता संपत ये दोनों बहनें बचपन से ही हेल्दी खाने की दीवानी रहीं.

उम्र के साथ बड़ा होने के दौरान घर में पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद भी उतना ही जरूरी था. फैमिली ने उन्हें मजबूत मूल्य और काम की लगन सिखाई, और करियर चुनने की आजादी दी, दोनों ने पूरी मेहनत करनी थी. फिर वे बहने देश-विदेश के टॉप स्कूलों-कॉलेजों की स्टूडेंट रहीं.

घर में रेस्टोरेंट फूड से ज्यादा घर का खाना पसंद था, सभी लोग सब्जियां, होल ग्रेन और फल खूब खाते थे. तली-भुनी चीजें सख्त मनाई रहतीं, लेकिन क्रेविंग्स को संभालने के लिए मां घर पर ही हेल्दी वर्जन बनातीं. सुहासिनी और अनिंदिता को यहीं से योगा बार शुरू करने का आईडिया मिला.

कहानी शुरू हुई अमेरिका में, जहां ये बहनें पढ़ाई और जॉब कर रही थीं. न्यूयॉर्क में योगा क्लासेस जातीं, वर्कआउट के बाद भूख लगती, लेकिन वेजिटेरियन और ग्लूटेन इनटॉलरेंट होने से हेल्दी स्नैक्स मिलना मुश्किल था. एनर्जी बार खरीदतीं, जो कन्वीनियंट और न्यूट्रिशियस लगते. एक बार स्नैकिंग करते हुए अनिंदिता ने कहा, अगर बिजनेस किया तो एनर्जी बार बनाऊंगी और नाम रखूंगी योगा बार.

सुहासिनी को नाम इतना पसंद आया कि उन्होंने तुरंत ट्रेडमार्क रजिस्टर करा लिया, वो भी बिजनेस शुरू करने से चार साल पहले. 2012 में भारत लौटकर तीन साल रिसर्च की. 2015 में पहला प्रोडक्ट मल्टीग्रेन एनर्जी बार लॉन्च किया, फिर 2018 में प्रोटीन बार.

शुरुआत में मां के किचन से बनवाकर दीवाली गिफ्ट्स में दोस्तों-फैमिली को भेजा, फिर बेंगलुरु के योगा सेंटर्स पर पॉप-अप्स से बेचना शुरू किया. प्रोडक्ट-मार्केट फिट कन्फर्म होने पर कलरफुल डिजाइन बनाया, जो शेल्फ पर चमकता रहता है. जब इस बारे में उनके आसपास के दुकानदारों को पता चला तो वह इन दोनों बहनों का मजाक बनाते थे. लेकिन धीरे-धीरे योगा बार की सेल काफी बढ़ गई.

आज प्रोडक्ट्स इंडियन स्टैंडर्ड्स के साथ अमेरिकी एफडीए अप्रूव्ड हैं. भारत में एनर्जी बार नया कॉन्सेप्ट था, लोग हेल्थ को बेचने लायक नहीं मानते थे. कस्टमर्स को टेस्ट और टेक्स्चर के नाम पर कन्विंस करना पड़ा. 2021-22 में 68 करोड़ टर्नओवर पहुंचा. 2023 में आईटीसी ने 40% स्टेक 175 करोड़ में खरीदा. पहले सीरीज ए में 11.6 मिलियन डॉलर एलिवेशन कैपिटल और फायर्साइड वेंचर्स से मिले. योगा बार का सालाना रेवेन्यू रन रेट 100 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है.

इससे ये बात तो सच साबित होती है कि सक्सेस पैसे से नहीं, लोगों की जिंदगी बदलने से आती है. आज योगा बार हेल्थ रेवोल्यूशन का चेहरा है. ये बेहनें भारत को हेल्दी बनाने में ये योगदान दे रही हैं.
.