Success Story: कभी सड़क किनारे दो कुर्सियों पर करते थे हेयर कटिंग… अब मॉल में 8 कर्मचारी वाला आलीशान सैलून

Last Updated:

Success Story: जबलपुर के आलोक सेन ने सड़क किनारे नाई की दुकान से सफर शुरू किया, जो अब मॉल में सैलून तक पहुंच चुका है. उनके साथ 8 कर्मचारी हैं. जरूरतमंद हेयर कटर को मुफ्त ट्रेनिंग भी देते हैं.

Jabalpur News: आज कहानी जबलपुर के उस शख्स की, जो कभी सड़क किनारे बाल काटने का काम करते थे. अब फर्श से उठकर अर्श तक पहुंच चुके हैं. जी हां, कभी सड़क किनारे दो सेट की दुकान लगाकर नाई की दुकान चलाने वाला शख्स आज खुद का आलीशान शोरूम चला रहे हैं. हम बात कर रहे हैं जबलपुर के हेयर स्टाइलिश आलोक सेन की.

उनका सफर इतना आसान नहीं था. यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा. लोगों के साथ ही दोस्तों के भी तंज सहना पड़ा. लेकिन, हिम्मत, हौसला और दिल में कुछ कर गुजरने की चाहत ने तमाम अर्चन को दरकिनार करते हुए इस मुकाम तक पहुंचे. लिहाजा, अब आलोक सेन के साथ आठ कर्मचारी भी साथ में काम करते हैं.

दूर तक रखी सोच 
हेयर स्टाइलिश आलोक सेन का कहना है, सैलून की दुकान विरासत में मिली है. जहां परिवार की वर्षों से परंपरा रही है. पिताजी के साथ रहकर बहुत सा काम सीख गया, लेकिन टीवी देख कर लगता था प्रोफेशनल सैलून खोलना है. कुछ नया करना हैं, यह तरह-तरह के मन आइडिया आ रहे थे. इसके लिए डिप्लोमा भी करना होगा, जिसकी चाहत में जबलपुर छोड़कर मुंबई, इंदौर और दिल्ली जैसी मेट्रो सिटी पहुंचकर सैलून मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया और काम सीखा.

बेटे ने मॉल में खोला सैलून
आलोक का कहना है, जब मेट्रो सिटी में काम कर रहे थे, तब लग रहा था कि अपने शहर वापस लौट जाएं. खुद का बिजनेस शुरू किया जाए. पिता अपनी पुरानी कॉलोनी स्थित दुकान चल रहे थे, लेकिन आलोक ने अपनी अलग सदर के एक मॉल में दी क्रॉपर्स नाम से सैलून ओपन कर दिया. जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे. लिहाजा, देखते ही देखते कस्टमर बढ़ने लगे और अब एक या दो नहीं करीब आठ कर्मचारी इस शॉप पर काम करते हैं.

हेयर कटर को भी देते हैं मुफ्त में ट्रेनिंग
आलोक बताते हैं कि हेयर कटिंग के दौरान काफी चीज देखनी होती है. यही अंदाज कस्टमर को काफी पसंद आता है. हालांकि आलोक यहां तक ही नहीं रुके, वे आर्थिक रूप से कमजोर हेयर कटर को भी मुफ्त में ट्रेनिंग देने का काम करते हैं. उनका कहना है किसी भी कार्य को मन लगाकर किया जाए और लगातार उसी काम में जुनून बना रहे, तब हर कार्य सफल होते हैं. आलोक यह भी कहते हैं जो लोग कभी तंज कसते थे, आज काम को देखकर पीठ थपथपाते हैं.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

न्यूज़18 हिंदी को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
homemadhya-pradesh

कभी सड़क किनारे दो कुर्सियों पर करते थे हेयर कटिंग… अब मॉल में सैलून

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *