Success Story: पहले घर से निकलने में लगता था डर, अब हर्बल चाय ने दिल्ली तक दिलाई पहचान, खड़ी कर दी 700 लोगों की टीम!

संघर्ष, आत्मनिर्भरता और सफलता की मिसाल पेश कर रही हैं मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की महिलाएं. एक समय घर की चारदीवारी में सीमित रहने वाली ये महिलाएं अब देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुकी हैं. जलकुआं गांव की आदिवासी महिलाओं ने एक अनोखा रास्ता चुना प्राकृतिक औषधियों और हर्बल चाय के निर्माण का. चलिए जानते हैं इन महिलाओं की प्रेरणादायक कहानी.

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले का एक छोटा सा गांव जलकुआं, जहां की आबादी का बड़ा हिस्सा आदिवासी समुदाय से आता है. कभी इस गांव की महिलाएं केवल घर के काम तक सीमित थीं, लेकिन आज वही महिलाएं हर्बल चाय और घरेलू औषधियों का उत्पादन कर लाखों रुपये कमा रही हैं.
इन महिलाओं ने मिलकर बनाई एक महिला किसान समूह नमामि आजीविका फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, जो आज न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली और देश के अन्य राज्यों तक अपने उत्पाद पहुंचा रही है. यही नहीं, इनके बनाए प्रोडक्ट अब विदेशों तक भी एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं.
इस कंपनी की अगुवाई कर रही हैं कला बामने, जो खुद एक साधारण ग्रामीण महिला रही हैं. लेकिन आज कला बामने 700 से ज्यादा महिलाओं के इस समूह को लीड कर रही हैं. उनका सपना है कि यह कंपनी पूरे देश में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बने.

कला बामने बताती हैं कि हमने शुरुआत छोटे स्तर से की थी. पहले तो किसी को यकीन नहीं था कि हम कुछ बना भी पाएंगे. लेकिन जब हमने हर्बल चाय और औषधीय उत्पाद तैयार किए और बाजार में भेजे, तो लोगों ने बहुत सराहा. आज हमारी चाय यूपी से लेकर दिल्ली तक पसंद की जा रही है.
इस ग्रुप की महिलाएं चार प्रकार की हर्बल चाय तैयार कर रही हैं तुलसी टी, गिलोय टी, अश्वगंधा टी और लेमनग्रास टी. ये सभी चाय शरीर को डिटॉक्स करने, इम्यून सिस्टम बढ़ाने और तनाव घटाने में मदद करती हैं. इन सभी उत्पादों को पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से तैयार किया जाता है. खेती भी जैविक पद्धति से होती है, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता और असर दोनों बेहतरीन होते हैं.

समर्थन की भूमिका

इस पहल में सरकार और स्थानीय प्रशासन ने भी अहम भूमिका निभाई है. महिलाओं को प्रशिक्षण, पैकेजिंग यूनिट, मार्केटिंग और ब्रांडिंग की सुविधा प्रदान की गई है. इसके साथ ही, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के माध्यम से इनके उत्पादों को शहरों और अन्य राज्यों तक पहुंचाया गया. एक महिला सदस्य बताती हैं कि पहले हमें घर से बाहर जाने में भी डर लगता था, लेकिन अब हम मशीनें चला रहे हैं, चाय पैक कर रहे हैं और ऑर्डर भी खुद ही ले रहे हैं. यह बदलाव हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है.

मध्य प्रदेश के जलकुआं गांव की इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसला हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती. प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग, मेहनत और सामूहिक प्रयास से उन्होंने एक ऐसा उद्यम खड़ा किया है जो आत्मनिर्भर भारत की सच्ची तस्वीर पेश करता है. जहां महिलाएं सशक्त होती हैं, वहां समाज खुद मजबूत हो जाता है. जलकुआं की महिलाएं अब सिर्फ चाय नहीं, आत्मनिर्भरता का स्वाद बना रही हैं.

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