Success Story: बिहार के डॉ. बिभु ने दिल्ली में खड़ा किया खुद का हॉस्पिटल

नई दिल्ली : कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता है, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों… यह लाइन फिट बैठती है डॉक्टर बिभु आनंद बिस्वास पर. जो कि सिर्फ 32 साल के हैं, लेकिन खुद के हॉस्पिटल के मालिक हैं. बिहार के एक छोटे से गांव की तंग गलियों से निकलकर बड़े सपने देखने वाले 32 वर्षीय डॉ. बिभु ने वह कर दिखाया है, जो कई लोगों के लिए सिर्फ सपना ही रह जाता है.

उन्होंने सीमित संसाधनों और संघर्षों से भरे बचपन के बावजूद हिम्मत नहीं हारी. अपनी मेहनत, लगन और अपने लक्ष्य के प्रति जुनून के दम पर वह दिल्ली जैसे बड़े शहर में न सिर्फ डॉक्टर बने. बल्कि आज अपने खुद के अस्पताल का संचालन कर रहे हैं. सबसे खास बात यह है कि वह अपने अस्पताल के जरिए गरीब और वंचित लोगों को सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देकर उनकी जिंदगी बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

पीएम मोदी कर चुके हैं सम्मानित

लोकल 18 से खास बातचीत में डॉ. बिभु आनंद ने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई मिथिला पब्लिक स्कूल बिहार से हुई है. वह बिहार के रहने वाले हैं. परिवार अभी बिहार में ही रह रहा है. जबकि वह दिल्ली में रहते हैं. उन्होंने बताया कि उनके पिता अमरनाथ एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, लेकिन उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया था. फिर एक स्कूल खोला, जहां पर वह प्रिंसिपल रहे और साथ ही साथ गरीब और वंचितों को अच्छी पढ़ाई लिखाई की सुविधा उपलब्ध कराई.

इसके साथ ही उन्होंने खेती किसानी में भी अपना योगदान दिया. उनकी मां सुषमा भी उसी स्कूल में प्रिंसिपल रही और उन्होंने भी समाज सेवा में ही अपना जीवन अर्पित किया. उन्होंने बताया कि उन्होंने गंगाराम इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च से डीएनबी मेडिसिन किया है और काठमांडू यूनिवर्सिटी के नोबेल मेडिकल कॉलेज टीचिंग हॉस्पिटल से एमबीबीएस 2013 से लेकर 2019 तक किया. यही नहीं, डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट रहे 2019 से लेकर 2022 तक.

इस दौरान कोविड-19 में भी उन्होंने वैक्सीनेशन इंचार्ज बनकर लोगों को वैक्सीन लगाई और इसके लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनको सम्मानित किया था. उन्होंने बताया कि कोविड-19  के दौरान उनके परिवार यानी माता-पिता बहुत डर रहे थे. उनको बिहार वापस बुला रहे थे, लेकिन वह नहीं गए. क्योंकि वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं, इसीलिए उनके माता-पिता डर रहे थे, लेकिन जब उनके माता-पिता ने उनको टीवी पर मरीजों का इलाज करते हुए लॉकडाउन में देखा तो बहुत गर्व महसूस किया.

खुद का खड़ा किया है हॉस्पिटल

डॉ. आनंद ने बताया कि उन्होंने राजेंद्र नगर में हीलिंग हैंड्स मल्टीस्पेशलिटी क्लिनिक यानी हॉस्पिटल बनाने का सपना देखा था और यह सपना उनका साकार हुआ. फिलहाल इस पूरे अस्पताल में चार फ्लोर हैं. मरीजों के लिए हर तरह की ओपीडी फार्मेसी और ऑपरेशन थिएटर है और अभी भी यहां पर निर्माण काम चल रहा है. उन्होंने बताया कि जल्द ही यहां पर एंबुलेंस सुविधा भी शुरू होने जा रही है.

यह पूरा हॉस्पिटल 88 स्क्वायर यार्ड में बनाया गया है. यहां पर गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सस्ते में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वह लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मेडिकल विंग के प्रेसिडेंट है और फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन में चीफ एडवाइजर हैं और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन में भी हैं.

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