Success Story: छोटे गांव की छोटी रसोई…पर यहां बने अचार की कई राज्यों में डिमांड, महिलाएं बनीं मिसाल

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Women Success Story: खंडवा के गांव की महिलाओं द्वारा बनाया गया आचार आज कई राज्यों में पसंद किया जा रहा है. लेकिन, इस अचार की कहानी बेहद रोचक है. जानें…

Khandwa News: मध्य प्रदेश का एक छोटा-सा गांव, वहां एक छोटी-सी रसोई और वहीं से शुरू होकर एक बिजनेस कई प्रदेशों में छा गया. जी हां, आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं खंडवा के कुदईमाल गांव की महिलाओं से, जिन्होंने अपनी मेहनत, हौसले और हुनर से वो कर दिखाया जो बड़े-बड़े शहरों में भी कम ही देखने को मिलता है. यह कहानी है अचार की है. अचार से आत्मनिर्भरता की है. महिला सशक्तिकरण की है.

कुदईमाल गांव की माधुरी शिंदे जब रसोई में अचार बना रही थीं, तब शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन उनका बनाया अचार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, और बेंगलुरु तक जाएगा. कहते हैं न, अगर इरादे मजबूत हों, तो रास्ते खुद बनते हैं. माधुरी शिंदे ने अपने घर से छोटे स्तर पर अचार बनाना शुरू किया. शुरुआत में आसपास के लोगों को पसंद आया, फिर धीरे-धीरे ये स्वाद गांव के बाहर भी पहुंचने लगा. आज इनके बनाए अचार की मांग देश के कई राज्यों में है.

केरी, नींबू, आंवला के बीच एक स्पेशल अचार भी
माधुरी द्वारा बनया गया अचार पूरी तरह नेचुरल है. इसमें कोई प्रिजर्वेटिव नहीं, कोई केमिकल नहीं. केरी, नींबू, आंवला, मिर्ची, मिक्स अचार के अलावा ये एक खास अचार भी बनाती हैं. सहजन यानी सुरजना फली का अचार, जो स्वाद में भी लाजवाब है. सेहत के लिए भी फायदेमंद. सबसे खास बात यह कि ये सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं. माधुरी जी ने अकेले आगे बढ़ने की बजाय अपने गांव की दूसरी महिलाओं को भी इस मुहिम से जोड़ा. आज गांव की कई महिलाएं इस अचार यूनिट में काम कर रही हैं. स्वावलंबी बन चुकी हैं. कम कीमत में, बेहतरीन क्वालिटी का अचार बनाना इनका फंडा है. अचार ऑनलाइन माध्यमों और लोकल बाजारों में बिकता है. आज इनके पास नियमित ऑर्डर आते हैं और ग्राहक भी सालों से जुड़े हुए हैं.

गांव की महिलाएं बनीं मिसाल
माधुरी शिंदे ने कहा, इस गांव की महिलाएं पहले घरों में ही सीमित थीं. अचार बनाकर हम भी अपने घर की आमदनी बढ़ा रहे हैं. हमें गर्व है कि हम कुछ कर पा रहे हैं. जहां एक तरफ देश के कई गांव आज भी बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, वहीं कुदईमाल गांव की महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं. इस बदलाव की शुरुआत हुई एक अचार के डिब्बे से. ये सिर्फ अचार नहीं है, ये महिलाओं का आत्मविश्वास है, ये उनकी मेहनत की खुशबू है. जब स्वाद, मेहनत और सच्चाई मिलती है तब कामयाबी तो खुद-ब-खुद चली आती है.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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