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Inder Jaisinghani success story: इंदर जयसिंघानी मुंबई के चॉल में पैदा हुए थे. 15 की उम्र में पिता गुजर गए तो स्कूल छोड़ना पड़ा. फिर एक छोटी सी कंपनी बनाई, जो बाद में इतनी पड़ी हो गई कि आज हैवेल्स की मार्केट कैप इसके मुकाबले कम है.

यह सक्सेस स्टोरी इंदर जयसिंघानी (Inder Jaisinghani) की है. उनका जन्म मुंबई के लोहार चॉल में हुआ. साधारण परिवार में पले-बढ़े. घर की जिम्मेदारियों के कारण उन्हें 15 वर्ष की आयु में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी. आर्थिक परेशानियों और कम साधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत और हिम्मत के बल पर अपने सपनों को पूरा करने की ठानी.

साल 1968 में उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर पॉलिकैब कंपनी की शुरुआत की. यह काम उन्होंने एक छोटे से गैरेज से शुरू किया था. शुरूआत में कंपनी सिर्फ इलेक्ट्रिकल केबल्स और तार (वायर्स) बनाती थी और इसके लिए सीमित पूंजी व साधनों का ही इस्तेमाल हुआ.

शुरुआत आसान नहीं थी. पैसों की कमी, बाजार में प्रतियोगिता और संसाधनों की दिक्कतें हमेशा सामने आती थीं. लेकिन जयसिंघानी ने क्वालिटी पर ध्यान दिया और धीरे-धीरे स्थानीय बाजारों में अपनी पहचान बना ली.

समय के साथ पॉलिकैब ने अपने उत्पादों का विस्तार किया. आज यह कंपनी केवल केबल्स और तार ही नहीं, बल्कि स्विच, एलईडी लाइट, पंखे, सोलर प्रोडक्ट्स और स्विचगियर जैसे कई सामान बनाती है, जिनकी मांग अलग-अलग क्षेत्रों में होती है.

2008 में विश्व बैंक की इक्विटी फर्म इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन, जो शेयर बाजार में मौजूद कंपनियों में निवेश करती है, ने पॉलिकैब में हिस्सेदारी खरीदी थी.

आज पॉलिकैब इंडिया की मार्केट वैल्यू काफी बढ़ चुकी है. 19 अगस्त 2025 तक इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 1,07,864.97 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. 2019 में जब कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट हुई थी, उसके बाद से इसकी वैल्यू तेजी से बढ़ी है. इसी तारीख तक हैवेल्स (Havells) की मार्केट कैप 98,251.89 करोड़ रुपये थी.

फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक, 72 वर्षीय इंदर जयसिंघानी की कुल संपत्ति लगभग 8.6 बिलियन डॉलर (करीब 75,000 करोड़ रुपये) है. साल 2022 में यह सिर्फ 3.35 बिलियन डॉलर थी. व्यक्तिगत जीवन में वे सादगी और मेहनत को महत्व देते हैं. वे निजी तौर पर सादा जीवन जीना पसंद करते हैं और अपने परिवार के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं. उनका मानना है कि नैतिकता और गुणवत्ता ही लंबे समय तक सफलता की असली कुंजी है.

उन्होंने पॉलिकैब को तकनीकी रूप से आगे बढ़ाने में भी बड़ा योगदान दिया. आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और रिसर्च सेंटर बनवाए गए, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और कार्यक्षमता और भी बेहतर हो गई.

पॉलिकैब इंडिया के 27 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जो भारत के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं. कंपनी अपने उत्पादों को 84 से अधिक देशों में निर्यात करती है, जिसमें सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस, इन्फ्रा और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों के लिए केबल्स और वायर्स शामिल हैं.
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