Success Story: भाई-बहन ने 0 से शुरू किया बिजनेस, कोक-पेप्सी पड़े फीके! ‘पीयो’ के दीवाने हुए युवा

दिल्ली की एक छोटी सी लैब थी. यहां बोतलों और फ्लेवर्स की महक हवा में घुली हुई थी. दो भाई-बहन एक बड़े सपने को सच करने में लगे थे. उनका सपना भारतीय लोगों के पार्टी कल्चर को हमेशा के लिए बदल देना था. पार्टी का मतलब ही होता है कि खाना-पीना और खूब मस्ती. इन दोनों ने ‘पीने-पिलाने’ पर फोकस किया, मगर शराब नहीं. आपने देखा होगा जब भी कोई पार्टी होती है, या दोस्त घर पर जमा होते हैं, तो सबसे बड़ी ज़रूरत होती है एक जबरदस्त ‘मिक्सर’ ड्रिंक की. ऐसे ड्रिंक्स जो मीठा सोडा, या बोरिंग जूस के अलावा कुछ हों. राजनंदिनी और दिव्यशक्ति ने ठीक इसी कमी को पकड़ा. उन्हें लगा, क्यों न कुछ ऐसा बनाया जाए जो पीने में मज़ेदार हो, लेकिन सेहत के लिए भी बुरा न हो? उन्होंने तय कर लिया कि अब पार्टियों में सिर्फ कोला या नींबू पानी से काम नहीं चलेगा, बल्कि एक नया, कूल, और देसी फ्लेवर वाला मॉकटेल दुनिया को मिलेगा. यहीं से शुरुआत हुई पीयो (PEEYO) की.

राजनंदिनी और दिव्यशक्ति का बचपन बाकी बच्चों से थोड़ा अलग था. उनके परिवार में बिज़नेस और एंटरप्रेन्योरशिप की बातें टेबल पर रोज़ होती थीं. बिज़नेस की नस-नस को समझने की कला उन्हें विरासत में मिली थी, पर इसका मतलब यह नहीं था कि सफलता की राह आसान थी. दोनों ने अपनी पढ़ाई पूरी की. दिव्यशक्ति ने जहां बिज़नेस की बारीकियों को समझा, वहीं राजनंदिनी के पास एक क्रिएटिव दिमाग था, जो चीज़ों को एक नया विज़ुअल और फ्लेवर दे सकता था. दिव्यशक्ति का ज़ोर था मार्केट और नंबर्स पर, और राजनंदिनी का ध्यान था प्रोडक्ट की ‘फील’ और ‘टेस्ट’ पर.

कोका-कोला, पेप्सी के बीच बनानी थी जगह

ग्रेजुएशन के बाद दोनों ने पारंपरिक रास्ते भी देखे, लेकिन उनका मन हमेशा कुछ नया करने में लगा रहता था. वो देखते थे कि आजकल की युवा पीढ़ी हेल्थ-कॉन्शियस है. उन्हें मीठे, आर्टिफिशियल फ्लेवर्स वाले ड्रिंक्स पसंद नहीं. अगर मार्केट में प्रीमियम, बढ़िया-स्वाद वाले और हेल्दी मॉकटेल मिक्सर नहीं हैं, तो एक बहुत बड़ी खाली जगह है. लेकिन एक नया ड्रिंक मार्केट में उतारना, जहां कोका-कोला और पेप्सी जैसी बड़ी कंपनियों का राज है, किसी भी छोटे स्टार्ट-अप के लिए पहाड़ चढ़ने जैसा था. उनका पहला संघर्ष यहीं से शुरू हुआ. अपने आइडिया को सिर्फ़ एक सपने से निकालकर एक बोतल में बंद करना.

कैसे आया Peeyo का आइडिया

एक रात दोनों भाई-बहन एक फैमिली डिनर के बाद बैठे थे. बात वही थी कि “आजकल पीने के लिए कुछ अच्छा नहीं मिलता.” तभी दिव्यशक्ति ने एक देसी नुस्ख़े को याद किया. बोला- “अपनी नानी के हाथ का जलजीरा कितना ज़बरदस्त होता था, वो क्यों नहीं मिलता इन फैंसी बोतलों में?” राजनंदिनी ने तुरंत कहा, “हां! और ब्लूबेरी और मिक्सड बेरी जैसे फैंसी फ्लेवर्स को भी देसी ट्विस्ट देकर क्यों नहीं बनाया जा सकता, जो सोडा न होकर एक प्रीमियम ड्रिंक हो?” उसी पल, उन्हें लगा कि उनका आइडिया सिर्फ़ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि ‘देसी’ और ‘प्रीमियम’ का एक शानदार मिश्रण है. उन्होंने तय किया कि वे भारत का पहला ‘रेडी-टू-ड्रिंक मॉकटेल और मिक्सर’ बनाएंगे, जो प्राकृतिक फ्लेवर्स से बना हो और जिसमें फालतू की चीनी न हो. उस रात, उनकी डायरी में ‘पीयो’ का पहला स्केच बन गया. यह सिर्फ़ नाम नहीं था, बल्कि एक आवाज़ थी जो ड्रिंक के लिए बुला रही थी.

लैब में घंटों बिताकर बनाया टेस्टी ड्रिंक

सफर की शुरुआत किसी भी छोटे स्टार्टअप की तरह ही हुई. कम पैसे, दिल्ली की एक छोटी-सी टेस्टिंग लैब और अनगिनत रातें. दिव्यशक्ति ने अपना सारा ध्यान बिज़नेस प्लान और फंडिंग पर लगाया, जबकि राजनंदिनी टेस्ट और फ्लेवर के कॉम्बिनेशन को लेकर घंटों प्रयोग करती रहीं. उनका लक्ष्य साफ़ था- प्रोडक्ट ऐसा हो कि पहली घूंट में ही लगे कि ‘वाह! मज़ा आ गया’. उन्होंने जलजीरा, ब्लूबेरी, स्पाइस्ड जिंजर एल और ग्रीन ऐपल जैसे अनोखे फ्लेवर्स पर काम किया. ये फ्लेवर्स सुनने में भले ही अजीब लगें, पर उन्हें एक प्रीमियम और रिफ्रेशिंग टेस्ट में बदलना सबसे बड़ा चैलेंज था. परिवार का सपोर्ट तो था, लेकिन डर भी था. बिज़नेस के बड़े खिलाड़ी हमेशा नए स्टार्टअप्स को डराते हैं. पर

दोनों भाई-बहन का दृढ़ निश्चय गजब का था. उन्होंने तय किया कि उनका बिज़नेस मॉडल एकदम सरल होगा कि वे सीधे कंज्यूमर (D2C) तक पहुंचेंगे, और साथ ही बड़े रेस्टोरेंट्स, होटलों और प्रीमियम रिटेल स्टोर्स को अपना ‘मिक्सर’ बेचेंगे. यह स्मार्ट मूव था, क्योंकि इससे उनका प्रोडक्ट सिर्फ़ पीने की चीज़ नहीं, बल्कि हाई-क्लास पार्टियों का ज़रूरी हिस्सा बन गया. ‘पीयो’ सिर्फ़ एक बोतल में बंद ड्रिंक नहीं, बल्कि एक ‘लाइफ़स्टाइल’ बन गया.

पहले फ्री में चखाया स्वाद

शुरुआत में, कुछ छोटी पार्टियों और इवेंट्स में अपने प्रोडक्ट को फ्री में टेस्ट कराया. लोगों को स्वाद अच्छा लगा. उन्हें यह बात पसंद आई कि यह मीठा कम है, और फ्लेवर एकदम असली. यह शुरुआती सफलता उनके लिए एक बड़ी एनर्जी बूस्टर साबित हुई. जल्द ही, छोटे-छोटे ऑर्डर्स आने शुरू हुए और फिर बड़े निवेशकों की नज़र भी उन पर पड़ी. पीयो को कई इन्वेस्टर्स ने सपोर्ट दिया, जिससे उन्हें अपनी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने, नए शहरों तक पहुंचने और सबसे ज़रूरी अपनी पैकिंग को और भी आकर्षक बनाने में मदद मिली.

मजाक उड़ाने वाले ने ही दिया ऑर्डर!

ग्रोथ का सफ़र एक रोलर-कोस्टर राइड जैसा था. एक बड़ा फैसला यह था कि उन्होंने अपनी पैकेजिंग को बहुत प्रीमियम रखा. उन्हें पता था कि ग्राहक सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि उस ‘एक्स्पीरियेंस’ के लिए पैसे दे रहा है. एक दिलचस्प किस्सा यह है कि शुरुआती दिनों में, जब वे एक बड़े डिस्ट्रीब्यूटर से मिलने गए, तो उस डिस्ट्रीब्यूटर ने उनके देसी फ्लेवर वाले जलजीरा को देखकर थोड़ा मज़ाक उड़ाया. लेकिन जब उसने चखा तो वो इतना प्रभावित हुआ कि उसने तुरंत एक बड़ा ऑर्डर दे दिया. यह हार को जीत में बदलने वाला पल था.

उन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान भी हिम्मत नहीं हारी. जब सब कुछ बंद था, तब लोगों ने घर पर छोटी पार्टियों का सहारा लिया, और ‘पीयो’ उनके लिए एकदम सही साथी बन गया. लोग बोरिंग सोडा की जगह इस ‘कूल’ और ‘डिफरेंट’ मॉकटेल मिक्सर को पसंद करने लगे. राजनंदिनी और दिव्यशक्ति ने मार्केटिंग भी बहुत स्मार्ट तरीक़े से की. उन्होंने इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपने ड्रिंक को ‘पार्टी स्टार्टर’ और ‘गेम चेंजर’ के तौर पर पेश किया.

पीयो: प्रोडक्ट्स और सेल चैनल

पीयो ने बाज़ार में तीन मुख्य श्रेणियों में अपने ‘रेडी-टू-ड्रिंक’ (RTD) उत्पाद उतारे हैं: मॉकटेल (Mocktails), कॉकटेल (Cocktails), और विभिन्न ड्रिंक्स के लिए मिक्सर (Mixers). उनके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में ‘देसी’ और ‘ग्लोबल’ फ्लेवर्स का शानदार मिश्रण है- जैसे स्पाइस्ड जिंजर एल, ग्रीन एप्पल मोजितो, और सिट्रस टॉनिक वॉटर, साथ ही ब्लूबेरी मोजितो और जलजीरा जैसे अनोखे फ्लेवर भी शामिल हैं. वे ग्राहक की जरूरत के हिसाब से कई पैक विकल्प (Pack Options) देते हैं, जिनमें ‘बिल्ड योर ओन बॉक्स’ (6, 12, या 24 पैक) और ‘सेलिब्रेशन बॉक्स’ जैसे कॉम्बो शामिल हैं, जो छोटे गेट-टुगेदर से लेकर बड़ी पार्टियों तक, हर मौके के लिए एक रेडी-मेड समाधान पेश करते हैं. उनका मुख्य ध्यान ‘पार्टी ड्रिंक्स’ पर है.

Peeyo: मार्केट प्रेजेंस और विस्तार

पीयो ने अपने उत्पादों को बेचने के लिए मुख्य रूप से सीधे-ग्राहक (D2C) मॉडल को अपनाया है. ग्राहक उनके अपने ऑनलाइन स्टोर peeyo.in से सीधे ख़रीददारी कर सकते हैं. इसके अलावा, अमेज़न (Amazon) जैसे बड़े ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर भी उनके उत्पाद आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे उनकी पहुंच पैन-इंडिया (Pan-India) यानी पूरे भारत में दिखाई देती है. भले ही उनका आधिकारिक संपर्क पता मध्य प्रदेश (इंदौर) में हो, पर ऑनलाइन बिक्री और सोशल मीडिया पर मजबूत उपस्थिति (ख़ासकर इंस्टाग्राम पर) के कारण उनका टारगेट स्पष्ट रूप से देशभर के उन युवा हैं.

फंडिंग कहां से आई?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीयो की सटीक वैल्यूएशन (Valuation) या फंडिंग (Funding) की जानकारी कहीं उपलब्ध नहीं है. पीयो ने अभी तक कोई भी औपचारिक फंडिंग राउंड नहीं किया है, जो निवेशकों से पैसा जुटाने की एक प्रक्रिया है. पीयो एक अनफंडेड (Unfunded) कंपनी है. मतलब कि उन्होंने वेंचर कैपिटल (VC) फर्मों या बड़े एंजेल इन्वेस्टर्स से अभी तक कोई बड़ा निवेश नहीं लिया है. राजनंदिनी और दिव्यशक्ति ने अभी तक बूटस्ट्रैपिंग (Bootstrapping) मॉडल पर ज़्यादा ध्यान दिया है. यानी, कंपनी को अपने निजी पैसों या बिज़नेस से होने वाली कमाई से ही चलाया है. 31 मार्च 2024 तक कंपनी का राजस्व लगभग 25.2 हज़ार डॉलर (लगभग 20-21 लाख रुपये) था.

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