पढ़ाई आती है काम.. ससुराल में तानों से लड़ी जंग फिर शुरू किया खुद का स्टार्टअप

पिछोर. ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी और घरेलू तानों से जूझने वाली महिलाओं ने अब संघर्ष को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया है. इसी बदलाव की मिसाल बनी हैं ‘रानी अहिरवार’, जो कभी आर्थिक तंगी और ससुराल में अपमान का सामना करती थीं, लेकिन आज एक सफल महिला उद्यमी बनकर, 250 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं. रानी द्वारा संचालित शुद्ध देसी दाल और मसाला पैकिंग यूनिट अब पिछोर क्षेत्र की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है.

रानी बताती हैं कि पढ़ाई पूरी होने के बाद भी बेरोजगारी के चलते उन्हें घर में रोज ताने सुनने पड़ते थे-‘पढ़-लिखकर क्या कर लिया?’ यही ताना उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन गया. बदलाव की ठानकर उन्होंने चार महिलाओं के साथ मिलकर एक टीम बनाई, जिसमें सेंटर मैनेजर, प्रोसेसिंग मैनेजर, मार्केटिंग मैनेजर और कंप्यूटर मैनेजर शामिल हैं. इसी टीम के साथ उन्होंने उद्यम की दिशा में कदम बढ़ाए.

प्रोसेसिंग यूनिट खोल कई महिलाओं को दिया रोजगार
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत रानी और उनकी टीम को 32 लाख रुपये का फंड स्वीकृत हुआ, जिसमें से 9 लाख 28 हजार रुपये की पहली किस्त प्रदान की गई. इसी राशि से रानी ने दाल पैकिंग और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की, जिसने क्षेत्र की महिलाओं के लिए रोजगार का नया द्वार खोला.

लगभग 250 महिलाएं इस स्टार्टअप से जुड़कर आज नियमित आय अर्जित कर रही हैं. बिक्री के आधार पर उन्हें 10-15% कमीशन मिलता है, जिससे वे आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं.

पढ़ाई बेकार नहीं गई
रानी अहिरवार का कहना है, ‘आज गर्व से कह सकती हूं कि पढ़ाई बेकार नहीं गई. उसी ने मुझे और 250 महिलाओं को नई दिशा दी’. रानी का यह मॉडल पिछोर क्षेत्र की महिलाओं में नई उम्मीद पैदा कर रहा है. जो महिलाएं कभी बेरोजगारी के कारण ताने सहती थीं, आज वही ‘लखपति बनने की राह’ पर आगे बढ़ रही हैं. यह उद्यम न सिर्फ रोजगार बल्कि सम्मान, आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है.

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