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Indore News: साउथ कोरिया की कंपनी ईसीडीएस एफडीआई अनुकूल नीतियों के चलते मेडिकल डिवाइस पार्क में इस प्लांट को अपनी सहयोगी कंपनी एचएलवी बेंजीन के साथ मिलकर ज्वाइंट वेंचर के रूप में स्थापित कर रही है. यह यूनिट छह प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करेगी. जिनमें क्लीनटेक और ऑर्गेनिक प्लास्टिक निर्माण, हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एविएशन स्किल सेक्टर शामिल है.
प्लास्टिक से पूरी दुनिया परेशान है, रोजाना लाखों टन प्लास्टिक का कचरा समुद्र और लैंडफिल (Landfills) में फेंका जाता है. इस समस्या का समाधान निकालते हुए वैज्ञानिकों ने कई साल के शोध के बाद ऐसा बायोमास पॉलीमर विकसित किया है जो पारंपरिक प्लास्टिक जैसा ही मजबूत होता है और बायोडिग्रेडेबल भी होता है. इसे जंगल से निकलने वाले पेड़-पौधों के कचरे से बनाया जाता है. करीब 2030 करोड़ के निवेश के साथ साउथ कोरिया की ईसीडीएस कंपनी MPIDC के मेडिकल डिवाइस पार्क में इसका प्लांट लगाने जा रही है.
कंपनी के डायरेक्टर राजेश भारद्वाज के अनुसार इस उत्पाद में 70 से 72% हिस्सा जंगल से निकले बायो प्रोडक्ट्स का होता है. जिसमें पेड़ों की सूखी पत्तियां, टहनियां, चावल का भूसा, गेहूं की पराली और अन्य कृषि अवशेषों का उपयोग किया जाता है. शेष 20% हिस्से में मिनरल्स, मोम और प्राकृतिक रंगों का मिश्रण होता है जो इसे क्रॉस लिंक पॉलीमर का रूप देता है.
बायोमास पॉलीमर प्राकृतिक पदार्थ होते है जो पौधों, कृषि अवशेषों जैसे पराली, भूसा और लकड़ी के कचरे से तैयार किए जाते है. पारंपरिक प्लास्टिक के विपरीत ये पूरी तरह ईको-फ्रेंडली होते है. ये उतने ही मजबूत और लचीले होते है. लेकिन मिट्टी में मिलने पर आसानी से विघटित हो जाते है. जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता.
साउथ कोरिया की कंपनी ईसीडीएस एफडीआई अनुकूल नीतियों के चलते मेडिकल डिवाइस पार्क में इस प्लांट को अपनी सहयोगी कंपनी एचएलवी बेंजीन के साथ मिलकर ज्वाइंट वेंचर के रूप में स्थापित कर रही है. यह यूनिट छह प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करेगी. जिनमें क्लीनटेक और ऑर्गेनिक प्लास्टिक निर्माण, हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एविएशन स्किल सेक्टर शामिल है.
इस निवेश से न केवल प्रदेश में हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि किसानों के लिए भी यह आय का नया जरिया बनेगा. अब तक जो पराली और कृषि कचरा जला दिया जाता था. उसे कंपनी कच्चे माल के तौर पर खरीदेगी. इससे बड़ी मात्रा में घरेलू उपयोग के प्लास्टिक के सामान बनाए जा सकेंगे जो न केवल सस्टेनेबल होंगे बल्कि स्वास्थ्य पर भी कोई हानिकारक प्रभाव नहीं डालेंगे.
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