तनाव, अनिद्रा और हाई बीपी खत्म! जानिए सर्पगंधा की जबरदस्त औषधीय ताकत

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लोकल 18 से बातचीत में वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि सर्पगंधा एक प्राचीन आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से तनाव, अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक विकारों में किया जाता है. इसकी जड़ को सुखाकर चूर्ण या काढ़े के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. दिमाग को शांत करने और बेहतर नींद में मदद करने के कारण आयुर्वेद में इसे बेहद कारगर माना जाता है.

सर्पगंधा एक ऐसा औषधीय पौधा है, जिसका उपयोग आयुर्वेद में प्राचीन समय से किया जा रहा है. यह पौधा कई गंभीर बीमारियों में कारगर माना जाता है. इसके जड़ों में मौजूद औषधीय गुण शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत देते हैं.

सर्पगंधा का पौधा

तनाव और बेचैनी कम करें: नंदू प्रसाद बताते हैं कि सर्पगंधा के सेवन से दिमाग को आराम मिलता है. यह मानसिक तनाव, बेचैनी और चिड़चिड़ापन दूर करने में मदद करता है. आयुर्वेद में इसे मन को शांत करने वाला पौधा कहा गया है.

सर्पगंधा का पौधा

अनिद्रा में बेहद लाभकारी: जिन लोगों को रात में नींद नहीं आती, वे अक्सर कई तरह की दवाइयों का सहारा लेते हैं. लेकिन वैद्य नंदू प्रसाद के अनुसार, सर्पगंधा एक प्राकृतिक औषधि है जो बिना किसी दुष्प्रभाव के नींद लाने में मदद करती है.

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ब्लड प्रेशर

हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित करे: नंदू प्रसाद बताते हैं कि सर्पगंधा की जड़ों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो रक्तचाप को नियंत्रित रखने में सहायक होते हैं. इसलिए इसे हाई बीपी वाले मरीजों के लिए काफी उपयोगी माना जाता है.

सर्पगंधा का पौधा

दिमाग को शांत रखने में असरदार: नंदू प्रसाद बताते हैं कि यह पौधा दिमाग की उत्तेजना कम करता है. मानसिक रोगों जैसे उत्तेजना, घबराहट और मानसिक असंतुलन में भी इसका उपयोग किया जाता है.

सर्पगंधा का पौधा

शरीर को अंदर से मजबूत बनाए: नंदू प्रसाद बताते हैं कि सर्पगंधा के नियमित सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और यह कई छोटी-मोटी बीमारियों से भी बचाव करता है. वैद्य नंदू प्रसाद बताते हैं कि सबसे पहले सर्पगंधा की जड़ों को पौधे से अलग कर सुखाया जाता है. फिर इसे पीसकर चूर्ण बनाया जाता है, जिसका उपयोग कई आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है. कई बार इसका काढ़ा भी तैयार किया जाता है, जिसे डॉक्टर की सलाह अनुसार दिया जाता है. हालांकि सर्पगंधा प्राकृतिक और प्रभावी औषधि है, लेकिन इसकी मात्रा हमेशा वैद्य या डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए. गलत मात्रा लेने पर चक्कर आना या कमजोरी महसूस हो सकती है. इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह इसके सेवन से बचना चाहिए.

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