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Strawberry storage Tricks : ये तरीका स्ट्रॉबेरी किसानों के लिए वरदान है. इससे स्ट्रॉबेरी को सामान्य तापमान पर 10 से 12 दिन और कोल्ड स्टोरेज में 25 दिन तक ताजा रखी जा सकेगी. गोरखपुर विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक डॉ. मानसी द्विवेदी ने इसके लिए नई तकनीक ईजाद की है. इतने दिनों तक रखने के बाद भी फल के स्वाद, रंग और पोषण में किसी तरह की कमी नहीं आती. तकनीक पूरी तरह प्राकृतिक और ऑर्गेनिक है. इसे विधि को ‘ऑर्गेनिक बेरी सेफ गार्ड’ नाम दिया गया है. ये ट्रिक सिर्फ स्ट्रॉबेरी तक सीमित नहीं, बल्कि इसी प्रजाति के दूसरे फलों को सुरक्षित रखने में भी मदद करेगी.
अब स्ट्रॉबेरी तोड़ने के 10 से 12 दिन बाद भी खराब नहीं होगी. एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि नॉर्मल तापमान में भी इसे आराम से स्टोर किया जा सकता है. स्ट्रॉबेरी किसानों के लिए ये तरीका वरदान बन सकता है.
स्ट्रॉबेरी किसानों और इस नाजुक फल के कारोबार से जुड़े लोगों के लिए ये राहत भरी खबर है. अब स्ट्रॉबेरी सिर्फ दो-तीन दिन में खराब नहीं होगी, बल्कि सामान्य तापमान पर 10 से 12 दिन और कोल्ड स्टोरेज में 25 दिन तक ताजा रखी जा सकेगी. इससे सीधा किसानों को फायदा होगा.
गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) की वैज्ञानिक डॉ. मानसी द्विवेदी ने इसके लिए नई तकनीक ईजाद की है. इसकी मदद से आम लोग भी इस फल का इस्तेमाल 10 से 12 दिन तक कर सकते हैं. अभी तक इसे ज्यादा दिन सुरक्षित रखना मुश्किल था.
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डॉ. मानसी द्विवेदी ने ऐसी जैविक तकनीक विकसित की है, जिससे स्ट्रॉबेरी की गुणवत्ता और स्वाद लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा. इतने दिनों तक रखने के बाद भी फल के स्वाद, रंग और पोषण में किसी तरह की कमी नहीं आती. इस तकनीक को ‘ऑर्गेनिक बेरी सेफ गार्ड’ नाम दिया गया है.
यह तकनीक पूरी तरह प्राकृतिक और ऑर्गेनिक है. डॉ. मानसी ने यह शोध डॉ. रितेश कुमार राय और प्रो. पूजा सिंह के साथ मिलकर किया है. इस तकनीक को तैयार करने में मीठी तुलसी और पामारोसा (लेमनग्रास प्रजाति का पौधा) का उपयोग किया गया है. इन प्राकृतिक तत्वों को मिलाकर मोती जैसे सूक्ष्म कणों का मिश्रण बनाया गया, जो स्ट्रॉबेरी को फंगस और खराब होने से बचाता है.
स्ट्रॉबेरी बेहद नाजुक फल माना जाता है, जो कटाई के बाद जल्दी खराब हो जाता है. इसी वजह से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. नई तकनीक से न सिर्फ बर्बादी कम होगी, बल्कि किसानों को अपनी फसल दूर-दराज के बाजारों तक भेजने का भी मौका मिलेगा. इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और फलों की सप्लाई चेन भी मजबूत होगी.
डॉ. मानसी द्विवेदी के इस शोध का पेटेंट भी प्रकाशित हो चुका है. इस तकनीक को कई अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में जगह मिल चुकी है, जिससे गोरखपुर विश्वविद्यालय और क्षेत्र का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन हुआ है. किसानों के लिए भी यह रिसर्च काफी फायदेमंद साबित होगी.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक सिर्फ स्ट्रॉबेरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसी प्रजाति के दूसरे फलों को सुरक्षित रखने में भी कारगर साबित हो सकती है. आने वाले समय में इस पर और शोध किया जाएगा, डॉ. मानसी की इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय प्रशासन और उनके परिवार ने खुशी जताई है.
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