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Success Story: पलामू के शिव कुमार पांडे ने इतिहास रचा. मात्र 8वीं तक पढ़े इस साहित्यकार ने अंताक्षरी शैली में लिखी ऐसी रामायण कि दूसरी बार ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में नाम दर्ज हुआ. 24 शब्दों में सिमटा रामायण का सार दुनिया का अनोखा प्रयोग बना.
पलामू: झारखंड की माटी और पलामू की धरती हमेशा से ही विलक्षण प्रतिभाओं की जननी रही है. यहां के लोग सीमित संसाधनों के बीच भी अपनी मेहनत और लगन से आसमान छूने का जज्बा रखते हैं. इसी कड़ी में साहित्य के क्षेत्र से एक ऐसी गौरवशाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान पलामू की ओर खींचा है. मात्र आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त करने वाले शिव कुमार पांडे ने साहित्य सृजन में एक ऐसा अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसे देख दुनिया दंग है. उन्होंने दूसरी बार अपना नाम ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में दर्ज कराकर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी औपचारिक डिग्री की मोहताज नहीं होती.
अंताक्षरी शैली में लिखी रामायण, एक विश्व कीर्तिमान
शिव कुमार पांडे की इस बार की उपलब्धि उनकी रचनात्मकता का शिखर है. उन्होंने चौंसठ चाली चौबीस शब्दीय शब्द अंताक्षरी रामायण की रचना की है. यह कृति अपनी विशेष शैली और कठिन संरचना के कारण साहित्य जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है. इससे पहले भी उन्हें उनकी विशिष्ट रचना एक शब्दीय रामायण के लिए सम्मानित किया जा चुका है.
क्या है इस रचना की खासियत?
पांडे की यह रचना कई मायनों में अद्वितीय है. उन्होंने पूरी रामायण का सार मात्र 24 शब्दों में पिरो दिया है. इस रचना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अंताक्षरी शैली है. इसमें प्रयुक्त हर शब्द का अंतिम अक्षर, अगले शब्द का पहला अक्षर बनता है. उदाहरण के तौर पर यदि वे लिखते हैं राम महान नर रक्षक तो यहां प्रत्येक शब्द पिछले शब्द के अंतिम अक्षर से आरंभ होता है. साहित्य के इतिहास में इस तरह का प्रयोग और सटीक शब्द संयोजन पहले कभी देखने को नहीं मिला, जो इसे एक विश्व कीर्तिमान बनाता है.
साधारण शिक्षा, असाधारण लगन
अपनी सफलता पर बात करते हुए शिव कुमार पांडे भावुक हो जाते हैं. वे बताते हैं कि औपचारिक रूप से वे केवल आठवीं कक्षा तक ही पढ़ पाए, लेकिन भगवान राम के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा और साहित्य के प्रति बचपन के जुनून ने उन्हें रुकने नहीं दिया. उन्होंने प्रभु राम के गुण, कर्म और स्वभाव को संक्षिप्त लेकिन अत्यंत प्रभावी ढंग से अपनी लेखनी में उतारा है.
शिव कुमार पांडे की यह सफलता न केवल पलामू बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव की बात है. वे उन युवाओं के लिए एक जीवंत मिसाल हैं जो संसाधनों की कमी या कम शिक्षा को अपनी प्रगति में बाधक मानते हैं. पलामू के इस लाल ने सिद्ध कर दिया है कि यदि नवाचार की भूख और दृढ़ संकल्प हो, तो साहित्य के क्षेत्र में भी नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं. इस सम्मान के बाद शिव कुमार अब भी रुकने वाले नहीं हैं. वे आगे भी साहित्य में नए प्रयोग जारी रखने का संकल्प रखते हैं.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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