YouTube की कहानी: एक फ्लॉप डेटिंग वेबसाइट, जो बाद में बना दुनिया का सबसे बड़ा वीडियो प्लेटफॉर्म, देखिए पहली क्लिप

साल 2005 की एक शाम सिलिकॉन वैली के एक छोटे से ऑफिस में तीन दोस्त एक कंप्यूटर स्क्रीन को घूर रहे थे. उनके चेहरे पर वैसी ही थकान थी, जो किसी बड़े प्रोजेक्ट के फेल होने के बाद आती है. उन्होंने हफ्तों की मेहनत से एक वेबसाइट बनाई थी जिसका नाम था ‘ट्यून इन, हुक अप’ (Tune In, Hook Up). आइडिया बड़ा दिलचस्प था कि लोग वीडियो के जरिए अपना पार्टनर ढूंढेंगे, यानी एक वीडियो डेटिंग वेबसाइट. लेकिन हकीकत यह थी कि कई दिन बीत जाने के बाद भी एक भी इंसान ने अपना वीडियो अपलोड नहीं किया था. उन तीनों दोस्तों को समझ आ गया था कि उनका सपना पूरी तरह फ्लॉप हो चुका है.

चाड हर्ले, स्टीव चेन और जावेद करीम नाम के तीनों लड़के उस वक्त शायद खुद भी नहीं जानते थे कि उनकी यही नाकामी अगले कुछ महीनों में इंटरनेट की दुनिया को हमेशा के लिए बदलने वाली है. वह फ्लॉप डेटिंग साइट दरअसल दुनिया के सबसे बड़े वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब की शुरुआत थी.

इन तीनों की मुलाकात दुनिया की मशहूर पेमेंट कंपनी पेपैल (PayPal) में काम करने के दौरान हुई थी. चाड हर्ले डिजाइन के मास्टर थे, जबकि स्टीव और जावेद इंजीनियरिंग की बारीकियों को समझते थे. जब ईबे (Ebay) ने पेपैल को खरीदा, तो इन तीनों के पास थोड़े पैसे आए और उन्होंने अपनी खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया. उस समय इंटरनेट पर फोटो शेयर करना तो आसान था, लेकिन वीडियो शेयर करना न तो आसान था और न ही आम. अगर आप किसी को कोई छोटा-सा वीडियो भी भेजना चाहते थे, तो ईमेल की फाइल साइज लिमिट आड़े आ जाती थी. बड़े वीडियो के लिए तो कोई जगह नहीं थी. इसी कमी को दूर करने के लिए उन्होंने पहले डेटिंग साइट का रास्ता चुना, लेकिन जब वेबसाइट नहीं चली तो तीनों बेचैन हो गए.

जैनेट जैक्सन का विवादित क्लिप और…

इस बेचैनी को और बढ़ाने वाली दो बड़ी घटनाएं हुईं. पहली थी 2004 की सुनामी, और दूसरी थी जैनेट जैक्सन (Janet Jackson) का एक विवादित वीडियो क्लिप. जावेद करीम इंटरनेट पर इन घटनाओं के वीडियो ढूंढ रहे थे, लेकिन उन्हें कहीं भी वह क्लिप नहीं मिली. हर जगह सिर्फ आर्टिकल थे. यहीं से इन तीनों के दिमाग की बत्ती जली. उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसी जगह बनाई जाए, जहां दुनिया का कोई भी इंसान बस एक क्लिक में अपना वीडियो डाल सके और कोई भी उसे देख सके. उन्हें डेटिंग के चक्कर को छोड़कर इसे ओपन बनाने का फैसला किया. उन्होंने अपनी पुरानी वेबसाइट का नाम बदलकर यूट्यूब (YouTube) रखा और 14 फरवरी 2005 को डोमेन रजिस्टर करवा लिया.

19 सेकंड के वीडियो से हुई थी शुरुआत

शुरुआत बहुत सिंपल-सी थी. कैलिफोर्निया के सैन मेटो में एक जापानी रेस्टोरेंट के ऊपर छोटा-सा कमरा इनका हेडक्वार्टर बना. जावेद करीम ने पहला वीडियो अपलोड किया, जिसका टाइटल था ‘मी एट द जू’. सिर्फ 19 सेकंड के इस वीडियो में जावेद हाथी के सामने खड़े थे.

यह वीडियो आज भले ही साधारण लगे, लेकिन उसने एक नई क्रांति की नींव रख दी थी. धीरे-धीरे लोगों ने वहां अपने पालतू जानवरों के वीडियो, अपनी छुट्टियों की क्लिप्स और हंसी-मजाक वाले वीडियो डालना शुरू किया. जून 2005 में उन्होंने अपनी साइट को पब्लिक के लिए पूरी तरह खोल दिया. उस समय तक उनके पास कोई बड़ा सर्वर नहीं था, बस कुछ पुराने कंप्यूटर और बहुत सारा जुनून था.

ग्रोथ इतनी तेज थी कि संभालना हुआ मुश्किल

दिसंबर 2005 आते-आते यूट्यूब पर हर रोज 20 लाख से ज्यादा लोग आने लगे थे. यह ग्रोथ इतनी तेज थी कि इन तीनों के लिए इसे संभालना मुश्किल हो रहा था. बैंडविड्थ का खर्चा लाखों डॉलर में जा रहा था और कमाई का कोई जरिया नहीं था. लेकिन एक बात साफ थी कि उन्होंने लोगों की एक बहुत बड़ी समस्या हल कर दी थी. यूट्यूब अब सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, एक आदत बन चुका था. इसी दौरान एक बड़ी कंपनी की नजर उन पर पड़ी. गूगल, जो खुद अपना वीडियो प्लेटफॉर्म चलाने की कोशिश कर रहा था और फेल हो रहा था, उसने यूट्यूब की ताकत को भांप लिया.

गूगल ने सही 1.65 अरब डॉलर में खरीदा यूट्यूब

सिर्फ डेढ़ साल पुरानी कंपनी को खरीदने के लिए गूगल ने 1.65 अरब डॉलर का ऑफर दिया. उस समय कई लोगों ने कहा कि गूगल पागल हो गया है, क्योंकि यूट्यूब के पास कोई बिजनेस मॉडल नहीं था और उन पर कॉपीराइट के कई केस होने का खतरा था. लेकिन चाड, स्टीव और जावेद को यह डील पसंद आई. रातों-रात तीन दोस्त अरबपति बन गए. जिस ऑफिस में कभी खाली कुर्सियां और सन्नाटा था, वहां अब दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी का पैसा और पावर था. यूट्यूब ने टीवी की दुनिया को चुनौती देना शुरू कर दिया और आम लोगों को ‘क्रिएटर’ बना दिया.

अभी क्या करते हैं ये तीनों दोस्त

गूगल के साथ हुई उस ऐतिहासिक डील ने चाड हर्ले, स्टीव चेन और जावेद करीम की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. 1.65 अरब डॉलर की उस रकम ने उन्हें इतनी दौलत दी कि वे आराम की जिंदगी जी सकते थे, लेकिन सिलिकॉन वैली के इन दिमागों ने रुकना नहीं सीखा. आज ये तीनों दोस्त अलग-अलग रास्तों पर हैं, लेकिन तकनीक और निवेश की दुनिया में इनका दबदबा अब भी कायम है.

चाड हर्ले, जो यूट्यूब के पहले सीईओ थे, उन्होंने 2010 तक इस पद को संभाला. गूगल से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी क्रिएटिविटी को नहीं रोका. उन्होंने MixBit नाम का एक वीडियो एडिटिंग ऐप बनाया, जिसे बाद में ब्लूजीन्स ने खरीद लिया. चाड सिर्फ टेक तक सीमित नहीं रहे, उन्होंने खेलों में भी अपनी दिलचस्पी दिखाई. आज वे बास्केटबॉल टीम ‘गोल्डन स्टेट वॉरियर्स’ और फुटबॉल क्लब ‘लॉस एंजिल्स एफसी’ के को-ओनर हैं. वे एक इन्वेस्टर के तौर पर जाने जाते हैं जो नई कंपनियों को आगे बढ़ने में मदद करते हैं.

स्टीव चेन का सफर थोड़ा अलग और भावनात्मक रहा. यूट्यूब बेचने के कुछ समय बाद ही उन्हें पता चला कि उनके दिमाग में ट्यूमर है. इस घटना ने उन्हें जिंदगी को नए नजरिए से देखने पर मजबूर किया. उन्होंने सर्जरी करवाई और ठीक होने के बाद फिर से स्टार्टअप की दुनिया में लौट आए. उन्होंने चाड के साथ मिलकर ‘एवोस सिस्टम्स’ की शुरुआत की. बाद में वे ताइवान चले गए, जहां वे अपनी जड़ों से जुड़े और वहां के स्टार्टअप ईकोसिस्टम को बढ़ावा देने लगे. फिलहाल वे ‘नॉमिनेस्ट’ जैसी कंपनियों के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नए तरह के वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रहे हैं.

जावेद करीम, जिन्होंने यूट्यूब पर सबसे पहला वीडियो अपलोड किया था, वे हमेशा से थोड़े अलग रहे. डील के वक्त ही वे अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी चले गए थे. उन्होंने सीधे तौर पर गूगल में काम करने के बजाय अपनी खुद की इन्वेस्टमेंट फर्म यूनिवर्सिटी वेंचर्स (Youniversity Ventures) शुरू की. इस फर्म के जरिए उन्होंने शुरुआती दौर में एयरबीएनबी (Airbnb) और रेडिट (Reddit) जैसी दिग्गज कंपनियों में पैसा लगाया. जावेद आज एक बहुत बड़े वेंचर कैपिटलिस्ट हैं. वे मीडिया की चकाचौंध से दूर रहते हैं, लेकिन जब भी यूट्यूब अपनी पॉलिसी में कोई बड़ा बदलाव करता है (जैसे डिस्लाइक बटन हटाना), तो जावेद अपने उसी पुराने ‘मी एट द जू’ वीडियो का डिस्क्रिप्शन बदलकर अपना विरोध दर्ज कराना नहीं भूलते.

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