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Illegal to Treat Autism with Stem Cells: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने ऑटिज्म के इलाज के लिए स्टेम सेल थेरेपी को गैरकानूनी घोषित कर दिया है. NMC और ICMR के नए आदेश के अनुसार इस थेरेपी का उपयोग केवल 32 स्वीकृत बीमारियों के लिए ही किया जा सकता है. महानगरों में निजी क्लीनिकों द्वारा ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी के नाम पर की जा रही अवैध वसूली को रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है.
ऑटिज्म में स्टेम सेल थेरेपी को गैरकानूनी माना गया है.
NMC Order on Stem Cell Therapy: स्टेम सेल थेरेपी अब ऑटिज्म के इलाज के लिए गैरकानूनी है. राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने देश के सभी मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और पंजीकृत डॉक्टरों को आदेश जारी करते हुए कहा है कि स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल अब केवल उन्हीं बीमारियों में किया जाएगा, जिन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग जैसी एजेंसियों से अनुमति प्राप्त हैं. ऑटिज्म इस सूची में शामिल नहीं है.
देश के टियर 2 शहरों और महानगरों में निजी क्लीनिक या अस्पताल ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज के नाम पर स्टेम सेल थेरेपी का दावा करते हुए मरीजों से मोटी रकम तक वसूल रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने बीते 30 जनवरी को एक केस की सुनवाई में स्टेम सेल थेरेपी को लेकर फैसला सुनाया, जिसे लेकर 10 मार्च को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने एनएमसी के अध्यक्ष डॉ. अभिजीत सेठ को सिफारिश पत्र लिखते हुए कुल 32 बीमारियों की सूची साझा की, जिनके इलाज में स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है. डॉ. बहल ने पत्र में स्पष्ट किया कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) को लेकर स्टेम सेल थेरेपी का दावा नहीं किया जा सकता.
स्टेम सेल थेरेपी के इस्तेमाल के नियम को सख्त करते हुए आईसीएमआर ने कहा कि इसका उपयोग स्वीकृत बीमारियों के अलावा सिर्फ रिसर्च के तहत ही किया जा सकता है, जिनमें क्लीनिकल ट्रायल की अनिवार्यता, संस्थागत एथिक्स कमेटी की मंजूरी, संबंधित नियामक एजेंसियों जैसे औषधि नियंत्रक विभाग की अनुमति लेना जरूरी होगा. इसके लिए मरीज से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता. साथ ही परीक्षण के दौरान नुकसान या मृत्यु की स्थिति में मुआवजा देना जरूरी है.
बिना अनुमति इलाज पर होगा एक्शन
एनएमसी के सचिव डॉ. राघव लैंगर ने कहा है कि अगर तय नियमों के बाहर या बिना अनुमति के दी गई स्टेम सेल थेरेपी को गैरकानूनी माना जाएगा. ऐसे मामलों में संबंधित डॉक्टरों और हॉस्पिटल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. आयोग ने एडवाइजरी को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं. आदेश के मुताबिक ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा, एप्लास्टिक एनीमिया के अलावा कुछ इम्यून सिस्टम और बोन मैरो से जुड़ी बीमारियों के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्या है स्टेम सेल थेरेपी?
स्टेम सेल थेरेपी एक आधुनिक चिकित्सा तकनीक है, जिसमें शरीर की खास तरह की कोशिकाओं का उपयोग करके खराब या बीमार टिश्यू को ठीक करने की कोशिश की जाती है. ये शरीर की मास्टर सेल होती हैं, जिनमें अलग-अलग तरह की कोशिकाओं जैसे खून, मांसपेशी, नस में बदलने की क्षमता होती है जो शरीर की मरम्मत और पुनर्निर्माण में सहायता करती हैं.
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रवि सिंह News 18 India में कार्यरत हैं. पिछले 20 वर्षों से इलेक्ट्रानिक मीडिया में सक्रिय हैं. उनकी मुख्य रूप से रेलवे,स्वास्थ्य,शिक्षा मंत्रालय,VHP और राजनीतिक गतिविधियों पर पकड़ है. अयोध्या में मंदिर की कवरेज…और पढ़ें