Steamed Vs Raw Sprouts Health Benefits: बरसात के मौसम में खाने-पीने को लेकर हम अधिक सतर्क रहते हैं. ऐसे में हेल्दी ब्रेकफास्ट(Healthy Breakfast) में स्प्राउट्स यानी अंकुरित अनाज को डाइट में शामिल करते वक्त अक्सर कंफ्यूजन होता है कि इन्हें कच्चा खाएं या स्टीम कर. दरअसल, इस सुपरफूड(Superfood) को अगर आप कच्चा खाएं तो इसमें न्यूट्रिशन और फाइबर भरपूर होता है, वहीं इनमें बैक्टीरिया का रिस्क भी छुपा रहता है. दूसरी तरफ, स्टीम्ड स्प्राउट्स आसानी से डाइजेस्ट हो जाते हैं और पेट पर हल्के माने जाते हैं. तो आखिर ब्रेकफास्ट में कौन-सा ऑप्शन है ज्यादा हेल्दी? आइए जानते हैं.
स्टीम्ड स्प्राउट्स: डाइजेशन और सेफ्टी के लिए बेस्ट
स्प्राउट्स को भाप में पकाना एक बेहद लोकप्रिय तरीका है. जब इन्हें हल्का स्टीम किया जाता है तो ये नर्म और आसानी से चबाने योग्य हो जाते हैं. यह खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जिन्हें पाचन संबंधी दिक्कतें रहती हैं.
स्टीमिंग की सबसे बड़ी खासियत है कि यह हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म कर देती है. E.coli और Salmonella जैसे बैक्टीरिया अक्सर कच्चे स्प्राउट्स में पाए जाते हैं क्योंकि इन्हें अंकुरण के लिए नमी और गर्म माहौल चाहिए होता है. 160°F तापमान पर भाप देने से यह जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है और फूड पॉइजनिंग की संभावना भी घट जाती है.
साथ ही, स्टीमिंग से पोषक तत्वों की बायोअवेलेबिलिटी यानी अवशोषण की क्षमता भी बढ़ती है. इसका मतलब है कि शरीर स्प्राउट्स से ज्यादा विटामिन और मिनरल्स ले पाता है. हालांकि कुछ न्यूट्रिएंट्स पकाने की प्रक्रिया में कम हो जाते हैं, लेकिन समग्र रूप से स्प्राउट्स पौष्टिक ही रहते हैं. इन्हें आप सूप, स्टिर-फ्राई, करी या सलाद में आसानी से शामिल कर सकते हैं.
रॉ स्प्राउट्स: पोषण से भरपूर लेकिन रिस्क भी ज्यादा-
कच्चे स्प्राउट्स उन लोगों की पहली पसंद होते हैं जो हेल्दी डाइट को लेकर बेहद जागरूक हैं. बिना पकाए हुए स्प्राउट्स कुरकुरे और स्वाद में ताजगी भरे होते हैं.
इनमें लाइव एंजाइम्स मौजूद रहते हैं, जो शरीर की मेटाबॉलिक एक्टिविटी को बढ़ाने में मदद करते हैं. कच्चे स्प्राउट्स विटामिन C, विटामिन K, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं.
इनकी सबसे खास बात यह है कि इनमें बहुत कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होता है. यही वजह है कि वजन घटाने वाले लोग इन्हें डाइट में जरूर शामिल करते हैं.
लेकिन इसके साथ सबसे बड़ा खतरा है बैक्टीरिया का संक्रमण. अंकुरण के दौरान स्प्राउट्स को नमी और गर्म वातावरण चाहिए होता है, जो बैक्टीरिया पनपने के लिए भी अनुकूल है. ऐसे में E.coli और Salmonella जैसे बैक्टीरिया आसानी से पनप सकते हैं. इन्हें खाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
यही वजह है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को कच्चे स्प्राउट्स खाने से बचने की सलाह दी जाती है. भले ही इन्हें अच्छी तरह धो लिया जाए, लेकिन केवल धोने से सभी बैक्टीरिया नहीं हटते.
तो कौन-सा है ज्यादा हेल्दी? अब सवाल यह है कि आखिर कौन-सा विकल्प बेहतर है- स्टीम्ड या रॉ स्प्राउट्स? इसका जवाब आपकी सेहत और पाचन क्षमता पर निर्भर करता है. अगर आपकी डाइजेशन स्ट्रॉन्ग है और आपको फूड से जुड़ी कोई समस्या नहीं है तो कच्चे स्प्राउट्स ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं क्योंकि इनमें लाइव एंजाइम्स और न्यूट्रिएंट्स भरपूर रहते हैं.
लेकिन अगर आप सुरक्षित विकल्प चाहते हैं और पाचन से जुड़ी परेशानियों से बचना चाहते हैं तो स्टीम्ड स्प्राउट्स आपके लिए ज्यादा अच्छे रहेंगे. दोनों ही तरीके से खाए जाने पर स्प्राउट्स आपकी डाइट में पौष्टिकता जोड़ते हैं. इसलिए बेहतर यही होगा कि आप अपनी सेहत और जरूरत को ध्यान में रखते हुए सही विकल्प चुनें.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)