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Success Story: मुजफ्फरपुर जिले के बोचहा प्रखंड के रहने वाले 21 वर्षीय अनुराग ने 21 साल की उम्र में अपने दोस्त के साथ मिलकर करीब 20 लाख रुपये में बत्तख पालन प्रोजेक्ट खड़ा कर दिया है. अब अनुराग सालाना 50 लाख रुपये कमा रहा हैं
मुजफ्फरपुर जिले के बोचहा प्रखंड के रहने वाले 21 वर्षीय अनुराग आज युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं. महज 21 साल की उम्र में अनुराग ने अपने दोस्त के साथ मिलकर करीब 20 लाख रुपये का बत्तख पालन प्रोजेक्ट खड़ा कर दिया है. कभी निजी बैंक में नौकरी करने वाले अनुराग आज न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि चार लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.
अनुराग बताते हैं कि वह वर्ष 2022 में एक निजी बैंक में नौकरी कर रहे थे. नौकरी के दौरान ही उनका जाना मोतीपुर इलाके में हुआ. जहां उन्होंने पहली बार बत्तख पालन का व्यवसाय देखा। वहां एक व्यक्ति को बत्तख पालन से अच्छी आमदनी करते देख उनके मन में विचार आया कि क्यों न इस व्यवसाय को खुद शुरू किया जाए। इसके बाद उन्होंने इस आइडिया को अपने दोस्त हर्ष से साझा किया. उस समय हर्ष दिल्ली में एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन अनुराग की बिजनेस योजना ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने पढ़ाई छोड़कर बिहार लौटने का फैसला कर लिया. इसके बाद दोनों दोस्तों ने मिलकर बत्तख पालन व्यवसाय की नींव रखी और धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाना शुरू किया.
बत्तख पाल कर कमा रहे लाखों रुपये
अनुराग बताते हैं कि इस व्यवसाय में अब तक करीब 16 लाख रुपये से अधिक की पूंजी लगाई जा चुकी है. उनका कहना है कि बत्तख पालन का बिजनेस 50 प्रतिशत का सौदा है, यानी मेहनत और सही प्रबंधन हो तो मुनाफा तय है। उन्होंने बताया कि उनके पिता का निधन वर्ष 2021 में हो गया था. जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। घर चलाने के लिए मजबूरी में उन्हें नौकरी करनी पड़ी, लेकिन बचपन से ही उनका सपना खुद का बिजनेस करने का था. आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. अनुराग कहते हैं कि पहले हम दूसरों के यहां नौकरी करते थे, आज हमारे यहां चार लोग नौकरी कर रहे हैं। यह हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है.
सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपये तक पहुंचा
अनुराग के अनुसार, बत्तख पालन व्यवसाय से सालाना कुल टर्नओवर करीब 50 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. इसमें सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें 15 से 20 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है. फिलहाल उन्होंने 3,000 बत्तखों से इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, लेकिन भविष्य में इसे तीन लाख बत्तखों तक पहुंचाने का लक्ष्य है. अनुराग का कहना है कि अगर सरकार से सहयोग और सही मार्गदर्शन मिले तो वे इस प्रोजेक्ट को बिहार स्तर तक ले जाना चाहते हैं.
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