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कृषि विशेषज्ञ राजेश सिंह ने लोकल 18 से कहा कि बांस की खेती के लिए जुलाई-अगस्त का समय सबसे उपयुक्त होता है. इस दौरान पौधों को पर्याप्त नमी और पोषण मिलता है, जिससे उनकी बढ़त तेजी से होती है.
मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में आज भी कई जगहों पर ऐसी जमीन है. जहां पारंपरिक फसलें उगाना मुश्किल होता है। कम जल धारण क्षमता वाली ये बंजर भूमि किसानों के लिए चुनौती तो है. अब बांस की खेती करके यही जमीन कमाई का अवसर ला सकती है.सीधी जिले के सीमा से लगे शहडोल जिले में पेपर मिल है, जो बड़ी मात्रा में बांस खरीदती है. यानी बाजार की कोई कमी नहीं है.
कृषि विशेषज्ञ राजेश सिंह ने लोकल 18 से कहा कि बांस की खेती के लिए जुलाई-अगस्त का समय सबसे उपयुक्त होता है. इस दौरान पौधों को पर्याप्त नमी और पोषण मिलता है, जिससे उनकी बढ़त तेजी से होती है.
बांस की खेती कर सकते है
राजेश सिंह ने कहाकी खेती के लिए ऐसी मिट्टी बेहतर रहती है जिसमें रेत, कंकड़ या पत्थर मौजूद हों और जल निकासी अच्छी हो. जून महीने में खेत की तैयारी कर लें और गड्ढे खोदकर उन्हें धूप में रहने दें ताकि रोगाणु नष्ट हो जाएं. पौधे रोपते समय गोबर खाद और मिट्टी मिलाकर गड्ढों को भरना चाहिए. एक एकड़ में 800 से 1000 बांस पौधे लगाने की जरूरत होती है. 100 ग्राम बीज से लगभग 500 पौधे आसानी से तैयार किए जा सकते हैं. पौधों के बीच दूरी 3×4 मीटर रखनी चाहिए, ताकि बढ़ने पर पौधों को पर्याप्त जगह मिल सके.
50% तक मिलेगा अनुदान
सबसे खास बात बांस की फसल सिर्फ एक बार मेहनत मांगती है. फिर सालों तक कमाई देती रहती है। लगभग 5 साल बाद पहली कटाई होती है. प्रति एकड़ 50 से 60 टन उत्पादन मिलता है. इससे किसान हर साल करीब एक लाख रुपये तक कमा सकते हैं.किसान राजेश सिंह बताते हैं कि प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत किसानों को कुल लागत का 50% अनुदान प्रदान किया जाता है, जो तीन साल में किस्तों के रूप में मिलता है.
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